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Pilibhit News: अमृतपाल के बारे में सुराग तलाशने पीलीभीत के गुरुद्वारे पहुंची एसटीएफ
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पूरनपुर इलाके के मोहनापुर गुरुद्वारे में छिपने के शक में खंगाले कैमरे, डीबीआर ले गई साथ
13 में से चार कैमरे मिले बंद, डीबीआर से छेड़छाड़ की बातें आईं सामने
संवाद न्यूज एजेंसी
पूरनपुर (पीलीभीत)। मोहनापुर गुरुद्वारे के सेवादार जोगा सिंह की गिरफ्तारी के बाद पंजाब पुलिस को शक है कि कहीं खालिस्तान समर्थक अमृतपाल मोहनपुर गुरुद्वारे में तो नहीं रुका था। जांच में जुटी पंजाब की एसटीएफ ने शनिवार शाम को फिर गुरुद्वारे पहुंचकर छानबीन की। जांच में गुरुद्वारा परिसर में चले 16 कैमरों में चार बंद मिले। रिकार्डिंग से भी छेड़छाड़ होने की बात पता चली। इसलिए टीम कैमरों की डीबीआर ले गई।
अमृतपाल के मोबाइल फोन की लोकेशन लखीमपुर-पीलीभीत सीमा पर मिलने के बाद से ही उसके इस इलाके में आने का पूरा शक सुरक्षा एजेंसियों को पहले ही हो गया था। वहीं बाद में बीते बुधवार को पंजाब के फगवाड़ा में यहां स्कार्पियो गाड़ी बरामद होने के बाद यह शक और बढ़ गया। गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर उत्तराखंड का था। गाड़ी पीलीभीत जिले के गुरुद्वारे के मुख्य ग्रंथी बाबा मोहन सिंह के नाम पंजीकृत थी। खुफिया एजेंसियों को पता चला कि अमृतपाल इसी गाड़ी में सवार होकर पंजाब तक पहुंचा था। इसके बाद खुफिया एजेंसियों ने छानबीन शुरू कर दी।
मुख्य ग्रंथी बाबा मोहन सिंह ने बताया कि यह गाड़ी मोहनापुर गुरुद्वारे के सेवादार जोगा सिंह को दे रखी थी और वह ही सप्ताह भर पहले यह गाड़ी लेकर पंजाब गया था। उसके साथ ड्राइवर पंजाब के सानेवाल निवासी गुरवंत सिंह भी था। गुरवंत सिंह को पंजाब में गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद एसटीएफ अमरिया व पूरनपुर पहुंची। जांच में जुटी एसटीएफ तीन दिन तक डेरा जमाए रही। गिरफ्तार किए जा चुके जोगा सिंह के बारे में कई लोगों से मालूमात की।
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इसी क्रम में एसटीएफ शनिवार शाम को कोतवाल आशुतोष रघुवंशी को साथ लेकर मोहनापुर गुरुद्वारे पहुंची। टीम ने गुरुद्वारे में लगे सीसीटीवी कैमरों की जानकारी ली। गुरुद्वारा में लगे 16 कैमरों में चार कैमरे बंद मिले। साथ ही पाया कि कैमरों की डीबीआर से छेड़छाड़ की गई। टीम डीबीआर को अपने साथ ले गई। एसटीएफ ने इस दौरान गुरुद्वारा पहुंचने वाले कई लोगों से जोगा सिंह के बारे में जानकारी की।
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कमरे से बाहर ही रोका कोतवाल को
शनिवार को जब एसटीएफ की टीम मोहनपुर गुरुद्वारे पहुंची, तब कोतवाल आशुतोष रघुवंशी उनके साथ थे। मगर टीम सदस्यों ने जब गुरुद्वारे के एक कमरे में पहुंचकर आपस में बातचीत की, तब कोतवाल को कमरे के बाहर ही रहने को कहा गया। कुछ देर रुकने के बाद कोतवाल वापस कोतवाली आ गए, लेकिन एसटीएफ देरशाम तक गुरुद्वारे में ही रुकी रही।
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13 में से चार कैमरे मिले बंद, डीबीआर से छेड़छाड़ की बातें आईं सामने
संवाद न्यूज एजेंसी
पूरनपुर (पीलीभीत)। मोहनापुर गुरुद्वारे के सेवादार जोगा सिंह की गिरफ्तारी के बाद पंजाब पुलिस को शक है कि कहीं खालिस्तान समर्थक अमृतपाल मोहनपुर गुरुद्वारे में तो नहीं रुका था। जांच में जुटी पंजाब की एसटीएफ ने शनिवार शाम को फिर गुरुद्वारे पहुंचकर छानबीन की। जांच में गुरुद्वारा परिसर में चले 16 कैमरों में चार बंद मिले। रिकार्डिंग से भी छेड़छाड़ होने की बात पता चली। इसलिए टीम कैमरों की डीबीआर ले गई।
अमृतपाल के मोबाइल फोन की लोकेशन लखीमपुर-पीलीभीत सीमा पर मिलने के बाद से ही उसके इस इलाके में आने का पूरा शक सुरक्षा एजेंसियों को पहले ही हो गया था। वहीं बाद में बीते बुधवार को पंजाब के फगवाड़ा में यहां स्कार्पियो गाड़ी बरामद होने के बाद यह शक और बढ़ गया। गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर उत्तराखंड का था। गाड़ी पीलीभीत जिले के गुरुद्वारे के मुख्य ग्रंथी बाबा मोहन सिंह के नाम पंजीकृत थी। खुफिया एजेंसियों को पता चला कि अमृतपाल इसी गाड़ी में सवार होकर पंजाब तक पहुंचा था। इसके बाद खुफिया एजेंसियों ने छानबीन शुरू कर दी।
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मुख्य ग्रंथी बाबा मोहन सिंह ने बताया कि यह गाड़ी मोहनापुर गुरुद्वारे के सेवादार जोगा सिंह को दे रखी थी और वह ही सप्ताह भर पहले यह गाड़ी लेकर पंजाब गया था। उसके साथ ड्राइवर पंजाब के सानेवाल निवासी गुरवंत सिंह भी था। गुरवंत सिंह को पंजाब में गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद एसटीएफ अमरिया व पूरनपुर पहुंची। जांच में जुटी एसटीएफ तीन दिन तक डेरा जमाए रही। गिरफ्तार किए जा चुके जोगा सिंह के बारे में कई लोगों से मालूमात की।
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इसी क्रम में एसटीएफ शनिवार शाम को कोतवाल आशुतोष रघुवंशी को साथ लेकर मोहनापुर गुरुद्वारे पहुंची। टीम ने गुरुद्वारे में लगे सीसीटीवी कैमरों की जानकारी ली। गुरुद्वारा में लगे 16 कैमरों में चार कैमरे बंद मिले। साथ ही पाया कि कैमरों की डीबीआर से छेड़छाड़ की गई। टीम डीबीआर को अपने साथ ले गई। एसटीएफ ने इस दौरान गुरुद्वारा पहुंचने वाले कई लोगों से जोगा सिंह के बारे में जानकारी की।
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कमरे से बाहर ही रोका कोतवाल को
शनिवार को जब एसटीएफ की टीम मोहनपुर गुरुद्वारे पहुंची, तब कोतवाल आशुतोष रघुवंशी उनके साथ थे। मगर टीम सदस्यों ने जब गुरुद्वारे के एक कमरे में पहुंचकर आपस में बातचीत की, तब कोतवाल को कमरे के बाहर ही रहने को कहा गया। कुछ देर रुकने के बाद कोतवाल वापस कोतवाली आ गए, लेकिन एसटीएफ देरशाम तक गुरुद्वारे में ही रुकी रही।