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मोदी जी! यहां तो खेलों के साथ ही खेल रहा शिक्षा विभाग
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पीलीभीत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही खेलेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया का नारा देकर खेलों और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने में लगे हों, लेकिन यहां माध्यमिक शिक्षा से जुड़े विद्यालयों मेें खेलों के नाम पर खेल हो रहा है। विभाग की बेरुखी से साल दर साल जिला और मंडल स्तरीय खेलों में शामिल होने वाली टीमों की संख्या घटती जा रही है। ऐसे में मोदी का बॉडी फिट तो माइंड हिट का मंत्र कैसे धरातल पर उतरेगा। फिलहाल इसकी संभावना कम ही जताई जा रही है।
जिले में सरकारी, वित्त पोषित और वित्त विहीन मिलाकर कुल 160 माध्यमिक स्कूल हैं। कबड्डी, कुश्ती और एथलेटिक्स के तो इन स्कूलों में कुछ खिलाड़ी हैं, लेकिन प्रतियोगिताओं में पांच तहसीलों के 20 फीसदी विद्यालयों के खिलाड़ी भी हिस्सा नहीं लेते। कई खेलों की स्थिति तो इतनी खराब है कि उसमें खिलाड़ी ढूंढे नहीं मिलते। माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से प्रतिवर्ष अंडर-14, अंडर-17 और अंडर-19 में करीब 20 से अधिक खेलों का आयोजन किया जाता है, लेकिन हालत यह है कि क्रिकेट सरीखे लोकप्रिय खेल में भी पांचों तहसीलों की टीमें शामिल नहीं होतीं।
160 विद्यालयों में पढ़ते हैं 60 हजार विद्यार्थी
जिले के सरकारी और एडेड मिलाकर करीब 160 विद्यालयों में करीब 60 हजार विद्यार्थी पढ़ते हैं। इन सभी खेल शुल्क के नाम पर सालाना 60 रुपये लिए जाते हैं। इसके बाद भी खेलों में इनकी प्रतिभागिता दिनोंदिन घटती जा रही है। मंडलस्तरीय प्रतियोगिताओं का भी कुछ ऐसा ही हाल है।
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शूटिंग, तीरंदाजी और स्कैटिंग का कोई खिलाड़ी नहीं
जिलास्तरीय प्रतियोगिताओं की बात करें तो शूटिंग, तीरंदाजी और स्केटिंग का कोई खिलाड़ी हिस्सा नहीं लेता। सालों से यही चला आ रहा है। इस ओर किसी भी जिम्मेदार ने ध्यान नहीं दिया।
जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं को लेकर खेल प्रशिक्षकों और प्रधानाचार्यों को जागरूक करने का निर्देश दिया है। खेलों में प्रतिभाग करने वाले खिलाडिय़ों की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। - संतप्रकाश, डीआईओएस
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जिले में सरकारी, वित्त पोषित और वित्त विहीन मिलाकर कुल 160 माध्यमिक स्कूल हैं। कबड्डी, कुश्ती और एथलेटिक्स के तो इन स्कूलों में कुछ खिलाड़ी हैं, लेकिन प्रतियोगिताओं में पांच तहसीलों के 20 फीसदी विद्यालयों के खिलाड़ी भी हिस्सा नहीं लेते। कई खेलों की स्थिति तो इतनी खराब है कि उसमें खिलाड़ी ढूंढे नहीं मिलते। माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से प्रतिवर्ष अंडर-14, अंडर-17 और अंडर-19 में करीब 20 से अधिक खेलों का आयोजन किया जाता है, लेकिन हालत यह है कि क्रिकेट सरीखे लोकप्रिय खेल में भी पांचों तहसीलों की टीमें शामिल नहीं होतीं।
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160 विद्यालयों में पढ़ते हैं 60 हजार विद्यार्थी
जिले के सरकारी और एडेड मिलाकर करीब 160 विद्यालयों में करीब 60 हजार विद्यार्थी पढ़ते हैं। इन सभी खेल शुल्क के नाम पर सालाना 60 रुपये लिए जाते हैं। इसके बाद भी खेलों में इनकी प्रतिभागिता दिनोंदिन घटती जा रही है। मंडलस्तरीय प्रतियोगिताओं का भी कुछ ऐसा ही हाल है।
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शूटिंग, तीरंदाजी और स्कैटिंग का कोई खिलाड़ी नहीं
जिलास्तरीय प्रतियोगिताओं की बात करें तो शूटिंग, तीरंदाजी और स्केटिंग का कोई खिलाड़ी हिस्सा नहीं लेता। सालों से यही चला आ रहा है। इस ओर किसी भी जिम्मेदार ने ध्यान नहीं दिया।
जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं को लेकर खेल प्रशिक्षकों और प्रधानाचार्यों को जागरूक करने का निर्देश दिया है। खेलों में प्रतिभाग करने वाले खिलाडिय़ों की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। - संतप्रकाश, डीआईओएस