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Pilibhit News: एफडीआर तकनीक से बनने लगी सड़क, अभियंताओं ने किया निरीक्षण
Sat, 05 Aug 2023 11:59 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Sat, 05 Aug 2023 11:59 PM IST
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गांव कंजा हरैया में नई तकनीक से बनाई जा रही सड़क । संवाद
पीलीभीत। शासन ने जिले में फुल-डेप्थ रिक्लेमेशन (एफडीआर) से दो सड़कें बनाने की मंजूरी दी थी। इसके लिए आरईएस को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बजट जारी होने के बाद एक सड़क को बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। नई तकनीक से बनने वाली सड़क को लेकर अभियंताओं ने मौके पर जाकर जांच पड़ताल की। यह सडक पीलीभीत- पूरनपुर मार्ग से गांव कंजा हरैया होते हुए अजीतपुर तक बनाई जा रही है।
जिले में पहली बार ट्रायल के तौर पर फुल-डेप्थ रिक्लेमेशन (एफडीआर) तकनीक से 18 किलोमीटर लंबी दो सड़कों की शासन की ओर से मंजूरी मिली थी। इससे सड़कें मजबूत बनने के साथ ही लागत में करीब बीस प्रतिशत की कमी आएगी। इस तकनीक में खास बात यह है कि इसे बनाने में सामान्य सड़कों कम खर्च आएगा। जिले में मंजूर दो सड़कों में एक को बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके लिए बाहर से मशीनों को मंगवाया गया है। काम शुरू होने के बाद अभियंताओं ने मौके पर जाकर इसको देखा। काम करने के तौर तरीकों को देखा जा रहा है। यदि यह ट्रायल सही पाया जाता है तो आने वाले दिनों में अन्य सड़कों को भी शामिल किया जाएगा।
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इस तरह होगा काम
फुल डेप्थ रिक्लेमेशन तकनीक में पुरानी सड़क की कोलतार-बजरी की परत का दोबारा इस्तेमाल हो जाता है। स्टोन एग्रीगेट यानी गिट्टी की जरूरत नहीं पड़ती है। इसमें सड़क का निर्माण बहुत तेजी से होता है और मरम्मत में खर्च भी कम आता है। विशेष मशीनों से पपड़ी, सीमेंट आदि को मिलाकर सड़क बनती है। यदि मिट्टी की सड़क भी होगी तो कुछ गिट्टी का प्रयोग करके कम लागत में सड़क बन जाएगी।
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इसमें नई गिट्टी नहीं लाते हैं, पुरानी सामग्री में ही सीमेंट व अन्य तत्वों को डालकर इस्तेमाल किया जाता है और सड़क भी मजबूत बनती है। इस समय एक सड़क पर काम शुरू करा दिया गया है।-शैलेंद्र चौधरी, एई, आरईएस
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जिले में पहली बार ट्रायल के तौर पर फुल-डेप्थ रिक्लेमेशन (एफडीआर) तकनीक से 18 किलोमीटर लंबी दो सड़कों की शासन की ओर से मंजूरी मिली थी। इससे सड़कें मजबूत बनने के साथ ही लागत में करीब बीस प्रतिशत की कमी आएगी। इस तकनीक में खास बात यह है कि इसे बनाने में सामान्य सड़कों कम खर्च आएगा। जिले में मंजूर दो सड़कों में एक को बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके लिए बाहर से मशीनों को मंगवाया गया है। काम शुरू होने के बाद अभियंताओं ने मौके पर जाकर इसको देखा। काम करने के तौर तरीकों को देखा जा रहा है। यदि यह ट्रायल सही पाया जाता है तो आने वाले दिनों में अन्य सड़कों को भी शामिल किया जाएगा।
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इस तरह होगा काम
फुल डेप्थ रिक्लेमेशन तकनीक में पुरानी सड़क की कोलतार-बजरी की परत का दोबारा इस्तेमाल हो जाता है। स्टोन एग्रीगेट यानी गिट्टी की जरूरत नहीं पड़ती है। इसमें सड़क का निर्माण बहुत तेजी से होता है और मरम्मत में खर्च भी कम आता है। विशेष मशीनों से पपड़ी, सीमेंट आदि को मिलाकर सड़क बनती है। यदि मिट्टी की सड़क भी होगी तो कुछ गिट्टी का प्रयोग करके कम लागत में सड़क बन जाएगी।
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इसमें नई गिट्टी नहीं लाते हैं, पुरानी सामग्री में ही सीमेंट व अन्य तत्वों को डालकर इस्तेमाल किया जाता है और सड़क भी मजबूत बनती है। इस समय एक सड़क पर काम शुरू करा दिया गया है।-शैलेंद्र चौधरी, एई, आरईएस

गांव कंजा हरैया में नई तकनीक से बनाई जा रही सड़क । संवाद