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मरम्मत कार्य में लापरवाही से हो सकती बड़ी अनहोनी
ब्ययूराो, अमर उजाला पीलीभ्ाीत
Updated Tue, 18 Oct 2016 11:15 PM IST
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श्ाारदा डैम
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प्रदेश के पौन दर्जन जनपदों की कृषि फसलों को सिंचाई का पानी मुहैय्या कराने वाले शारदा सागर डैम में सिंचाई की क्षमता घटकर आधी रह गई है। इधर इंजीनियरों की हड़ताल के बावजूद बिना तकनीकी सहायता के मरम्मत कार्य कराया जा रहा है। ऐसे में यदि कोई अनहोनी होती है तो इससे 127 वर्ग किमी एरिया (कैचमेंट एरिया) पानी से घिर जाएगा और करीब आधा दर्जन जनपद बुरी तरह प्रभावित होंगे।
प्रथम पंचवर्षीय योजना में प्रदेश की कृषि फसलों की सिंचाई को 22 किमी लंबा शारदा सागर डैम बनाया गया था। डैम में भंडार किए गए पानी से प्रदेश की 74930 हेक्टेयर असिंचित भूमि को सिंचाई उपलब्ध कराने की योजना थी। यह डैम 399723 एकड़ में फैला हुआ है। शुरूआती दौर में डैम में 623.50 फिट तक पानी भरा जाता था। सूखा पड़ने और पहाड़ों से कम पानी आने से डैम में भंडार किए गए पानी से ही कृषि फसलों की सिंचाई की जाती है। पिछले कुछ सालों से लापरवाही के चलते डैम में सिंचाई की क्षमता लगातार घटती जा रही है।
क्रेक पाइपिंग बन सकती है नासूर
जानकारों के मुताबिक सिल्टिंग के कारण डैम को पहले से ही खतरा बना हुआ है। जितनी भी रेत डैम में जमा होती है। उसका अतिरिक्त भार डैम को ही झेलना पड़ता है। डैम में पाइपिंग की समस्या भी बढ़ती जा रही है। पाइप से ही पानी रिसकर डैम की नींव तक पहुंचता है। पानी पहुंचने से नींव की मिट्टी अपने स्थान से हटना शुरू कर देती है और डैम में क्रेक पाइपिंग की समस्या बढ़ती जा रही है। इधर आज तक मिट्टी से बने जितने भी डैम नष्ट हुए उनमें 23 प्रतिशत डैम के नष्ट का कारण पाइपिंग की समस्या ही रही है। इसी पाइपिंग की समस्या के चलते शारदा डैम में भी दो वर्ष में दो बार मुख्यबाडी के किनारे लीकेज हुआ। ऐसे में यदि कोई अनहोनी होती है तो इससे 127 वर्गकिमी एरिया (कैचमेंट एरिया) पानी से घिर जाएगा और पीलीभीत, लखीमपुर, सीतापुर सहित आधा दर्जन जिले प्रभावित होंगे।
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मरम्मत के नाम पर हो रही खानापूरी
इस वर्ष डैम की मरम्मत को दो करोड़ रुपया स्वीकृत कर काम शुरू कराया गया है, लेकिन डिप्लोमा इंजीनियरों की हड़ताल के चलते न तो उस काम को रुकवाया और न ही किसी अधिकारी की मौजूदगी यहां रहती है। जिससे घटिया निर्माण कार्य की शिकायतें लगातार मिल रही है। ऐसे में डैम भरते समय तेज हवाएं चलने व पानी के थपेड़ों से कोई अनहोनी हो सकती है। इधर शिकायत के बाद मंगलवार को अधीक्षण अभियंता जीवनराम ने डैम पर हो रहे मरम्मत कार्यवों का निरीक्षण किया।
इस समय इंजीनियरों की हड़ताल चल रही है। निर्माण कार्य न कराया जाए, इसके लिए अधिकारियों को जानकारी दी गई है। निर्माण कार्य स्वयं कोई अधिकारी कराए अन्यथा कार्यों की गुणवत्ता गड़बड़ हो सकती है।
वीरेंद्र सिंह यादव, अवर अभियंता, शारदा सागर
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प्रथम पंचवर्षीय योजना में प्रदेश की कृषि फसलों की सिंचाई को 22 किमी लंबा शारदा सागर डैम बनाया गया था। डैम में भंडार किए गए पानी से प्रदेश की 74930 हेक्टेयर असिंचित भूमि को सिंचाई उपलब्ध कराने की योजना थी। यह डैम 399723 एकड़ में फैला हुआ है। शुरूआती दौर में डैम में 623.50 फिट तक पानी भरा जाता था। सूखा पड़ने और पहाड़ों से कम पानी आने से डैम में भंडार किए गए पानी से ही कृषि फसलों की सिंचाई की जाती है। पिछले कुछ सालों से लापरवाही के चलते डैम में सिंचाई की क्षमता लगातार घटती जा रही है।
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क्रेक पाइपिंग बन सकती है नासूर
जानकारों के मुताबिक सिल्टिंग के कारण डैम को पहले से ही खतरा बना हुआ है। जितनी भी रेत डैम में जमा होती है। उसका अतिरिक्त भार डैम को ही झेलना पड़ता है। डैम में पाइपिंग की समस्या भी बढ़ती जा रही है। पाइप से ही पानी रिसकर डैम की नींव तक पहुंचता है। पानी पहुंचने से नींव की मिट्टी अपने स्थान से हटना शुरू कर देती है और डैम में क्रेक पाइपिंग की समस्या बढ़ती जा रही है। इधर आज तक मिट्टी से बने जितने भी डैम नष्ट हुए उनमें 23 प्रतिशत डैम के नष्ट का कारण पाइपिंग की समस्या ही रही है। इसी पाइपिंग की समस्या के चलते शारदा डैम में भी दो वर्ष में दो बार मुख्यबाडी के किनारे लीकेज हुआ। ऐसे में यदि कोई अनहोनी होती है तो इससे 127 वर्गकिमी एरिया (कैचमेंट एरिया) पानी से घिर जाएगा और पीलीभीत, लखीमपुर, सीतापुर सहित आधा दर्जन जिले प्रभावित होंगे।
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मरम्मत के नाम पर हो रही खानापूरी
इस वर्ष डैम की मरम्मत को दो करोड़ रुपया स्वीकृत कर काम शुरू कराया गया है, लेकिन डिप्लोमा इंजीनियरों की हड़ताल के चलते न तो उस काम को रुकवाया और न ही किसी अधिकारी की मौजूदगी यहां रहती है। जिससे घटिया निर्माण कार्य की शिकायतें लगातार मिल रही है। ऐसे में डैम भरते समय तेज हवाएं चलने व पानी के थपेड़ों से कोई अनहोनी हो सकती है। इधर शिकायत के बाद मंगलवार को अधीक्षण अभियंता जीवनराम ने डैम पर हो रहे मरम्मत कार्यवों का निरीक्षण किया।
इस समय इंजीनियरों की हड़ताल चल रही है। निर्माण कार्य न कराया जाए, इसके लिए अधिकारियों को जानकारी दी गई है। निर्माण कार्य स्वयं कोई अधिकारी कराए अन्यथा कार्यों की गुणवत्ता गड़बड़ हो सकती है।
वीरेंद्र सिंह यादव, अवर अभियंता, शारदा सागर