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Pilibhit News: रमजान व बोर्ड परीक्षा से मिजेल्स-रुबेला अभियान की रफ्तार पड़ी धीमी
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एक स्कूल में बच्चों को टीका लगाती स्वास्थ्य विभाग की आशा। स्त्रोत विभाग
- फोटो : 1
चार दिन में सिर्फ 20 फीसद बच्चों का हुआ टीकाकरण, 27 तक होना है समापन
पीलीभीत। जिले के 1.57 लाख बच्चों को खसरा व रुबेला का टीका लगाने के मिजेल्स-रुबेला (एमआर) टीकाकरण अभियान की रफ्तार चार दिन बीतने के बाद धीमी पड़ गई है। एक तरफ मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों के परिजन रमजान की वजह से टीका लगवाने से कतरा रहे हैं। वहीं, जिले के कई निजी और सरकारी विद्यालयों में बोर्ड परीक्षाओं के होने के कारण बच्चों की छुट्टी कर दी गई है, जिससे अभियान की रफ्तार प्रभावित हुई है। स्वास्थ्य विभाग चार दिन में लक्ष्य के सापेक्ष सिर्फ 20 प्रतिशत बच्चों का ही टीकाकरण कर सका है।
खसरा व रुबेला, जो कि एक त्वचा संबंधित संक्रमित बीमारी है। बच्चों को इस बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए 16 फरवरी से स्वास्थ्य विभाग ने एमआर अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान में जिले के 1753 सरकारी व निजी स्कूल और मदरसे में पढ़ने वाले कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को टीका लगाया जाना है। तय लक्ष्य में 1.57 लाख बच्चों के टीका लगना है। इसमें अब तक विभाग सिर्फ 31,587 बच्चों को टीके लगा सका है। इस अभियान की धीमी रफ्तार का कारण बृहस्पतिवार से शुरू हुआ रमजान और बोर्ड परीक्षाएं बताई जा रही हैं। रमजान के कारण मदरसे व स्कूलों में पढ़ने वाले मुस्लिम समुदाय के बच्चों को एमआर टीका लगाने से परिजन मना कर रहे हैं। 18 फरवरी से शुरू हुई बोर्ड परीक्षा के कारण बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं। इस वजह से स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव-गांव जाकर बच्चों का टीकाकरण कर रही है, जिससे रफ्तार पर फर्क पड़ रहा है। संवाद
अभियान में लगी 259 एएनएम, 1336 आशा कार्यकर्ता
जिले में चल रहे एमआर टीकाकरण अभियान में सफल बनाने की जिम्मेदारी 259 एएनएम को दी गई है। यह सभी स्कूल व मदरसों में जाकर कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को टीके लगाएंगी। इनके साथ ही 1336 आशा कार्यकर्ता भी सहायक की जिम्मेदारी संभाल रहीं हैं।
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30 से अधिक निजी व सरकारी स्कूल बोर्ड परीक्षा केंद्र बनाए गए
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में 30 से अधिक ऐसे निजी व सरकारी स्कूल हैं, जो कक्षा एक से लेकर 12 तक संचालित है। इन्हें विभिन्न बोर्डों का परीक्षा केंद्र बनाया गया है। यहां पर स्वास्थ्य विभाग का एमआर अभियान बोर्ड परीक्षा के कारण निष्प्रभावी है।
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आस्था अपनी जगह, लेकिन बच्चों को लगवाए एमआर टीका : सीएमओ
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आलोक कुमार ने माना है कि रमजान और बोर्ड परीक्षा के टीकाकरण अभियान पर असर पड़ा है। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि हर वर्ग समाज व समुदाय में आस्था एक अलग स्थान रखती है। स्वास्थ्य सेवा एक आपातकालीन सेवा है। इसमें दवाएं, टीका आदि से परहेज नहीं करना चाहिए। सभी बच्चों को जागरूकता के साथ परिवार के बच्चों को एमआर टीका लगवाना चाहिए।
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पीलीभीत। जिले के 1.57 लाख बच्चों को खसरा व रुबेला का टीका लगाने के मिजेल्स-रुबेला (एमआर) टीकाकरण अभियान की रफ्तार चार दिन बीतने के बाद धीमी पड़ गई है। एक तरफ मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों के परिजन रमजान की वजह से टीका लगवाने से कतरा रहे हैं। वहीं, जिले के कई निजी और सरकारी विद्यालयों में बोर्ड परीक्षाओं के होने के कारण बच्चों की छुट्टी कर दी गई है, जिससे अभियान की रफ्तार प्रभावित हुई है। स्वास्थ्य विभाग चार दिन में लक्ष्य के सापेक्ष सिर्फ 20 प्रतिशत बच्चों का ही टीकाकरण कर सका है।
खसरा व रुबेला, जो कि एक त्वचा संबंधित संक्रमित बीमारी है। बच्चों को इस बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए 16 फरवरी से स्वास्थ्य विभाग ने एमआर अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान में जिले के 1753 सरकारी व निजी स्कूल और मदरसे में पढ़ने वाले कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को टीका लगाया जाना है। तय लक्ष्य में 1.57 लाख बच्चों के टीका लगना है। इसमें अब तक विभाग सिर्फ 31,587 बच्चों को टीके लगा सका है। इस अभियान की धीमी रफ्तार का कारण बृहस्पतिवार से शुरू हुआ रमजान और बोर्ड परीक्षाएं बताई जा रही हैं। रमजान के कारण मदरसे व स्कूलों में पढ़ने वाले मुस्लिम समुदाय के बच्चों को एमआर टीका लगाने से परिजन मना कर रहे हैं। 18 फरवरी से शुरू हुई बोर्ड परीक्षा के कारण बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं। इस वजह से स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव-गांव जाकर बच्चों का टीकाकरण कर रही है, जिससे रफ्तार पर फर्क पड़ रहा है। संवाद
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अभियान में लगी 259 एएनएम, 1336 आशा कार्यकर्ता
जिले में चल रहे एमआर टीकाकरण अभियान में सफल बनाने की जिम्मेदारी 259 एएनएम को दी गई है। यह सभी स्कूल व मदरसों में जाकर कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को टीके लगाएंगी। इनके साथ ही 1336 आशा कार्यकर्ता भी सहायक की जिम्मेदारी संभाल रहीं हैं।
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30 से अधिक निजी व सरकारी स्कूल बोर्ड परीक्षा केंद्र बनाए गए
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में 30 से अधिक ऐसे निजी व सरकारी स्कूल हैं, जो कक्षा एक से लेकर 12 तक संचालित है। इन्हें विभिन्न बोर्डों का परीक्षा केंद्र बनाया गया है। यहां पर स्वास्थ्य विभाग का एमआर अभियान बोर्ड परीक्षा के कारण निष्प्रभावी है।
आस्था अपनी जगह, लेकिन बच्चों को लगवाए एमआर टीका : सीएमओ
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आलोक कुमार ने माना है कि रमजान और बोर्ड परीक्षा के टीकाकरण अभियान पर असर पड़ा है। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि हर वर्ग समाज व समुदाय में आस्था एक अलग स्थान रखती है। स्वास्थ्य सेवा एक आपातकालीन सेवा है। इसमें दवाएं, टीका आदि से परहेज नहीं करना चाहिए। सभी बच्चों को जागरूकता के साथ परिवार के बच्चों को एमआर टीका लगवाना चाहिए।