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वंचित वर्ग के बच्चों को कान्वेंट स्कूल की तर्ज पर पढ़ाकर बदली धारणा

Thu, 03 Sep 2020 02:00 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 03 Sep 2020 02:00 AM IST
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Rajya adhyapak Puruskaar
पीलीभीत। कुछ करने का जज्बा हो तो हर जगह संभावनाएं मौजूद रहती हैं। उच्च प्राथमिक विद्यालय कैंच के सहायक अध्यापक वैभव जसवार ने चार साल पहले जब इस विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी संभाली तो किसी ने सोचा भी नहीं था कि एक दिन पूरे स्कूल की ही तस्वीर बदल जाएगी। बच्चों को पढ़ाने के प्रति लगन और मेहनत को देखते हुए राज्य सरकार ने उन्हें राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए चयनित किया है।
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बीएससी बीएड तक शिक्षा प्राप्त वैभव जसवार की नियुक्ति 2010 में प्राथमिक विद्यालय बहरूआ में हुई थी। वैभव राज्य संदर्भ समूह के सदस्य भी हैं। इसके बाद वह कई विद्यालय में कार्यरत रहे। वर्ष 2016 में बेसिक शिक्षा विभाग ने इन्हें उच्च प्राथमिक विद्यालय कैंच ब्लॉक मरौरी सहायक अध्यापक के तौर पर भेजा। जब यहां उन्होंने स्कूल का चार्ज संभाला, तब विद्यालय में 52 बच्चे पंजीकृत थे। स्कूल में अधिकांश वंचित वर्ग के बच्चे पढ़ते थे। तमाम बच्चे क्लास बीच में ही छोड़कर घर चले जाते थे। वैभव ने सबसे पहले बच्चों के माता-पिता से उनके घर जाकर बात की और उन्हें स्कूल में पूरे समय बने रहने के लिए सहमत किया। उसके बाद स्कूल में अपने निजी धन से आईसीटी (इंफॉर्मेशन कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी) का प्रोजेक्ट लगाया। अधिकांश बच्चे यहां वंचित वर्ग से थे। पूरी लगन और मेहनत से पढ़ाई कराकर इन बचें का शैक्षिक स्तर कान्वेंट स्कूल के बच्चों के बराबर कर दिया। संसाधनों की कमी आड़े आई तो वैैैभव जसवार ने समाज सेवियों से मदद लेकर स्कूल में अत्याधुनिक लैब की स्थापना की। स्कूल की बाल पेंटिंग अत्याधुनिक तरीके से कराकर बच्चों को पढ़ाई के प्रति प्रेरित किया। इसका नतीजा यह रहा कि स्कूल को वर्ष 2018 में उत्कृष्ट स्कूल का पुरस्कार मिला। पढ़ाने के प्रति लगन देखकर वर्ष 2017 में उन्हें उर्जा संरक्षण, वर्ष 2018 में आईसीटी स्मार्ट क्लास लगाने के लिए बेस्ट टीचर के रूप में भी पुरस्कृत किया जा चुका है। अब उन्हें 2019 के राज्य अध्यापक के पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। सहायक अध्यापक वैभव जसवार का कहना है कि प्राइमरी या जूनियर स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई के प्रति आम धारणा अच्छी नहीं हैं। यह धारणा सबको साथ लेकर ही बदली जा सकती है।
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