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Pilibhit News: लाइलाज है रेबीज... झाड़-फूंक नहीं सिर्फ एआरवी ही बचा सकती है जान
Thu, 28 Sep 2023 12:31 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Thu, 28 Sep 2023 12:31 AM IST
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जिला चिकित्सालय का इंजेक्शन कक्ष । संवाद
पीलीभीत। जिले में जहां सड़कों पर छुट्टा पशु मुसीबत बने हुए हैं, उससे भी ज्यादा घातक आवारा कुत्ते साबित हो रहे हैं। पांच हजार से अधिक कुत्ते सड़कों पर घूम रहे हैं। इन्हें पकड़ने का प्रशासन के पास कोई पुख्ता इंतजाम भी नहीं है। ये कुत्ते लोगों को लगातार शिकार बना रहे हैं। हाल यह है कि इस साल अब तक 10 हजार से अधिक लोगों को कुत्ते काट चुके हैं।
कुत्ते के काट लेने पर गांव-देहात के ज्यादातर लोग अब भी एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाने के बजाय घरेलू उपचार या झाड़-फूंक कराने पर विश्वास रखते हैं, जबकि यह बेहद घातक होता है। रेबीज लाइलाज बीमारी है। अगर हो गई तो दुनिया की कोई ताकत नहीं बचा सकती। ऐसे में रेबीज न हो, इसके लिए वैक्सीन लगवाना बेहद जरूरी है। कुत्ता, बिल्ली, बंदर, चमगादड़, लोमड़ी और सियार आदि के काटने से रेबीज हो सकती है।
सड़कों पर घूमने वाले कुत्तों को लेकर शासन की तरफ से दिशा निर्देश तो जारी हुए, लेकिन नगर पालिका की ओर से कुछ नहीं किया गया। सड़कों पर घूमने वाले कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई कार्ययोजना तक तैयार नहीं की गई। यही कारण है कि दिनोंदिन शहर से लेकर गांवों तक कुत्तों की संख्या में इजाफा हो रहा है और उनके हमले बढ़ रहे हैं। कुत्ते के काटने पर रेबीज से बचाव का एकमात्र उपाय टीका ही है।
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टीका न लगे तो जान भी जा सकती है। आंकड़ों की मानें तो इस समय पांच हजार से अधिक कुत्ते सड़कों पर घूम रहे हैं। ये कब, किस पर हमला कर दें, कुछ नहीं कहा जा सकता। ऐसे में जरूरत है सतर्कता बरतने की। कुत्ते के काटने पर सीधे अस्पताल जाएं और एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाएं।
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पशुपालन विभाग के पास हैं आठ हजार एआरवी डोज
सड़कों पर घूमने वाले कुत्तों के काटने से लोगों को जानलेवा बीमारी से बचाने के लिए पशु पालन विभाग के पास 8285 एंटी रैबीज के इंजेक्शन मौजूद हैं। इन्हें सभी 16 अस्पतालों को दिया गया है। अस्पताल में पालतू कुत्तों को तो ये वैक्सीन लोग लगवा लेते हैं, लेकिन सड़कों पर घूमने वाले कुत्तोंं को नहीं लग पाती हैं। कारण है कि कई बार संबंधित विभाग और प्रधानों को सूचना देने के बावजूद लोग ध्यान नहीं दे रहे हैं। पशुपालन विभाग की ओर से प्रधानों से भी कुत्तों को पकड़कर वैक्सीन लगवाने को कहा जा चुका है।
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10 हजार से अधिक लोगों ने लगवाई एआरवी
पिछले तीन वर्षों में कुत्ता काटने के मरीजों की संख्या देखें तो यह हजारों में है। वर्ष 2021 में 19,200, वर्ष 2022 में 17,412 और वर्ष 2023 में सितंबर माह तक 10,500 लोगों को कुत्तों के काटने पर एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई जा चुकी है।
वर्जन
कुत्ते के काटने पर सतर्कता बरतें। इसे हल्के में न लें। घर पर ड्रेसिंग न करें। पानी से हल्के से घाव को धो लें। 24 घंटे के अंदर एंटी रेबीज वैक्सीन जरूर लगवा लें। इसमें लापरवाही जान पर भारी पड़ सकती है। - डॉ. संजीव सक्सेना, प्रभारी प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
सड़कों पर घूम रहे कुत्तों को पकड़ने के लिए अभी कोई कार्ययोजना तो नहीं बनी है, लेकिन अगली बोर्ड बैठक में इसे लेकर प्रस्ताव रखा जाएगा। सदन में चर्चा के बाद उस पर अमल किया जाएगा। - देवेंद्र सिंह, प्रभारी ईओ
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कुत्ते के काट लेने पर गांव-देहात के ज्यादातर लोग अब भी एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाने के बजाय घरेलू उपचार या झाड़-फूंक कराने पर विश्वास रखते हैं, जबकि यह बेहद घातक होता है। रेबीज लाइलाज बीमारी है। अगर हो गई तो दुनिया की कोई ताकत नहीं बचा सकती। ऐसे में रेबीज न हो, इसके लिए वैक्सीन लगवाना बेहद जरूरी है। कुत्ता, बिल्ली, बंदर, चमगादड़, लोमड़ी और सियार आदि के काटने से रेबीज हो सकती है।
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सड़कों पर घूमने वाले कुत्तों को लेकर शासन की तरफ से दिशा निर्देश तो जारी हुए, लेकिन नगर पालिका की ओर से कुछ नहीं किया गया। सड़कों पर घूमने वाले कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई कार्ययोजना तक तैयार नहीं की गई। यही कारण है कि दिनोंदिन शहर से लेकर गांवों तक कुत्तों की संख्या में इजाफा हो रहा है और उनके हमले बढ़ रहे हैं। कुत्ते के काटने पर रेबीज से बचाव का एकमात्र उपाय टीका ही है।
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टीका न लगे तो जान भी जा सकती है। आंकड़ों की मानें तो इस समय पांच हजार से अधिक कुत्ते सड़कों पर घूम रहे हैं। ये कब, किस पर हमला कर दें, कुछ नहीं कहा जा सकता। ऐसे में जरूरत है सतर्कता बरतने की। कुत्ते के काटने पर सीधे अस्पताल जाएं और एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाएं।
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पशुपालन विभाग के पास हैं आठ हजार एआरवी डोज
सड़कों पर घूमने वाले कुत्तों के काटने से लोगों को जानलेवा बीमारी से बचाने के लिए पशु पालन विभाग के पास 8285 एंटी रैबीज के इंजेक्शन मौजूद हैं। इन्हें सभी 16 अस्पतालों को दिया गया है। अस्पताल में पालतू कुत्तों को तो ये वैक्सीन लोग लगवा लेते हैं, लेकिन सड़कों पर घूमने वाले कुत्तोंं को नहीं लग पाती हैं। कारण है कि कई बार संबंधित विभाग और प्रधानों को सूचना देने के बावजूद लोग ध्यान नहीं दे रहे हैं। पशुपालन विभाग की ओर से प्रधानों से भी कुत्तों को पकड़कर वैक्सीन लगवाने को कहा जा चुका है।
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10 हजार से अधिक लोगों ने लगवाई एआरवी
पिछले तीन वर्षों में कुत्ता काटने के मरीजों की संख्या देखें तो यह हजारों में है। वर्ष 2021 में 19,200, वर्ष 2022 में 17,412 और वर्ष 2023 में सितंबर माह तक 10,500 लोगों को कुत्तों के काटने पर एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई जा चुकी है।
वर्जन
कुत्ते के काटने पर सतर्कता बरतें। इसे हल्के में न लें। घर पर ड्रेसिंग न करें। पानी से हल्के से घाव को धो लें। 24 घंटे के अंदर एंटी रेबीज वैक्सीन जरूर लगवा लें। इसमें लापरवाही जान पर भारी पड़ सकती है। - डॉ. संजीव सक्सेना, प्रभारी प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
सड़कों पर घूम रहे कुत्तों को पकड़ने के लिए अभी कोई कार्ययोजना तो नहीं बनी है, लेकिन अगली बोर्ड बैठक में इसे लेकर प्रस्ताव रखा जाएगा। सदन में चर्चा के बाद उस पर अमल किया जाएगा। - देवेंद्र सिंह, प्रभारी ईओ