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क्वारंटीन सेंटर में प्रसव कराने की नहीं, नवजातों की मौत की हुई जांच
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पीलीभीत। सील अस्पताल में बनाए गए क्वारंटीन सेंटर में प्रसव कराने की जांच के बजाय सीएमएस ने दो नवजातों की मौत की वजह तलाश कर अपनी जांच रिपोर्ट सीएमओ कार्यालय भेज दी। रिपोर्ट में बताया गया कि ऑपरेशन की मदद जन्में दोनों नवजात अविकसित थे और उनका वजन काफी कम था। कोरोना संक्रमण फैलने से रोकने को बने नियमों की अवहेलना करने और अस्पताल में सामान्य कार्य न होने देने के आदेश का इस रिपोर्ट में कोई जिक्र नहीं किया गया। इस तरह स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले को रफा-दफा करने में लग गया है।
शासन ने चीनी मिल रोड स्थित एक अस्पताल अनियमितताओं के चलते सात महीने पहले सील कर दिया था। अब इस अस्पताल को कोरोना के संदिग्ध मरीजों को क्वारंटीन करने के लिए शासकीय अस्पताल में रूप में खोलने की अनुमति दी गई थी। यह अनुमति मिलने के बाद अब तक यहां न तो सरकारी अस्पताल के डॉक्टर कभी आए, न ही मेडिकल स्टाफ। लॉकडाउन के एक महीने से ज्यादा समय में कोई क्वारंटीन भी नहीं किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने संचालन की अनुमति देने के बाद अस्पताल में यह देखने की जहमत नहीं उठाई कि उसमें किस तरह से प्राइवेट मरीज भर्ती कर उनकी डिलीवरी की जा रही है। जब दो नवजातों की मौत का बृहस्पतिवार को खुलासा हुआ तो पता चला कि इस कोविड अस्पताल में तो मोटी फीस लेकर नियम विरुद्ध तरीके से चिकित्सीय कार्य किए जा रहे थे।
कोरोना संक्रमण खत्म होने के बाद ही कर सकते थे सामान्य चिकित्सकीय कार्य
इस निजी अस्पताल का रजिस्ट्रेशन डॉक्टर की डिग्री फर्जी मिलने के बाद निरस्त हो गया था। उसके बाद अस्पताल संचालक ने डॉयरेक्टर बदलवाकर दोबारा अस्पताल खुलवाने के आदेश करा लिए। मगर जो आदेश जारी हुआ था, उसमें स्पष्ट था कि कोरोना संक्रमण काल खत्म होने के बाद ही अस्पताल के संचालन की अनुमति सीएमओ द्वारा नियमानुसार दी जाएगी। इसके बावजूद गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी समेत अन्य गंभीर मरीजों के आपरेशन भी किए जा रहे थे। कोरोना संक्रमण काल अभी शिखर पर होने के बावजूद अस्पताल के वार्ड में बड़े पैमाने पर मरीजों की भर्ती शुरू कर दी गई थी। सभी बातें स्पष्ट होने के बावजूद इस बात की जांच नहीं की गई कि क्वारंटीन सेंटर बने इस अस्पताल में अन्य चिकित्सकीय कार्य कैसे शुरू हो गए।
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निजी अस्पताल में गर्भवती महिला की डिलीवरी में नवजातों का वजन बेहद कम था। दोनों बच्चे पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए थे। इसलिए दोनों मौत हो गई। मुझे जांच के दौरान नवजातों की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट नहीं मिली। - डॉ. अनीता चौरसिया, सीएमएस महिला अस्पताल
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस को जांच दी गई थी। जांच रिपोर्ट मेरे ऑफिस को प्राप्त हो गई है। उसका अध्ययन करने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
ट्विटर के जरिये मुख्यमंत्री तक शिकायत भेजी
शहर के चीनी मिल रोड स्थित निजी अस्पताल में लॉकडाउन में भी गर्भवती महिला का ऑपरेशन करने के बाद दो नवजातों की मौत का मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच गया है। कुछ लोगों ने ट़्वीट के जरिये मुख्यमंत्री तक शिकायत भेजी है। सील अस्पताल को कोरोना संदिग्धों को क्वारंटीन करने के लिए शासकीय अस्पताल के रूप में खोलने के बाद बिना रजिस्ट्रेशन मरीजों का इलाज करने के मामले की दूसरे दिन भी पूरे शहर में चर्चा रही। मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद मामले की शासन स्तर से जांच और कार्रवाई होने के कयास लगाए जा रहे हैं।
निजी अस्पताल में दो नवजातों की मौत के मामले में सीएमओ से रिपोर्ट मांगी गई थी, वह अभी मिली नहीं है। पता चला है कि वह महिला जिला अस्पताल में भी इलाज के लिए आई थी। उसकी भी जांच करा रहे हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद मामले में उचित कार्रवाई होगी। - वैभव श्रीवास्तव, डीएम
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शासन ने चीनी मिल रोड स्थित एक अस्पताल अनियमितताओं के चलते सात महीने पहले सील कर दिया था। अब इस अस्पताल को कोरोना के संदिग्ध मरीजों को क्वारंटीन करने के लिए शासकीय अस्पताल में रूप में खोलने की अनुमति दी गई थी। यह अनुमति मिलने के बाद अब तक यहां न तो सरकारी अस्पताल के डॉक्टर कभी आए, न ही मेडिकल स्टाफ। लॉकडाउन के एक महीने से ज्यादा समय में कोई क्वारंटीन भी नहीं किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने संचालन की अनुमति देने के बाद अस्पताल में यह देखने की जहमत नहीं उठाई कि उसमें किस तरह से प्राइवेट मरीज भर्ती कर उनकी डिलीवरी की जा रही है। जब दो नवजातों की मौत का बृहस्पतिवार को खुलासा हुआ तो पता चला कि इस कोविड अस्पताल में तो मोटी फीस लेकर नियम विरुद्ध तरीके से चिकित्सीय कार्य किए जा रहे थे।
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कोरोना संक्रमण खत्म होने के बाद ही कर सकते थे सामान्य चिकित्सकीय कार्य
इस निजी अस्पताल का रजिस्ट्रेशन डॉक्टर की डिग्री फर्जी मिलने के बाद निरस्त हो गया था। उसके बाद अस्पताल संचालक ने डॉयरेक्टर बदलवाकर दोबारा अस्पताल खुलवाने के आदेश करा लिए। मगर जो आदेश जारी हुआ था, उसमें स्पष्ट था कि कोरोना संक्रमण काल खत्म होने के बाद ही अस्पताल के संचालन की अनुमति सीएमओ द्वारा नियमानुसार दी जाएगी। इसके बावजूद गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी समेत अन्य गंभीर मरीजों के आपरेशन भी किए जा रहे थे। कोरोना संक्रमण काल अभी शिखर पर होने के बावजूद अस्पताल के वार्ड में बड़े पैमाने पर मरीजों की भर्ती शुरू कर दी गई थी। सभी बातें स्पष्ट होने के बावजूद इस बात की जांच नहीं की गई कि क्वारंटीन सेंटर बने इस अस्पताल में अन्य चिकित्सकीय कार्य कैसे शुरू हो गए।
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निजी अस्पताल में गर्भवती महिला की डिलीवरी में नवजातों का वजन बेहद कम था। दोनों बच्चे पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए थे। इसलिए दोनों मौत हो गई। मुझे जांच के दौरान नवजातों की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट नहीं मिली। - डॉ. अनीता चौरसिया, सीएमएस महिला अस्पताल
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस को जांच दी गई थी। जांच रिपोर्ट मेरे ऑफिस को प्राप्त हो गई है। उसका अध्ययन करने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
ट्विटर के जरिये मुख्यमंत्री तक शिकायत भेजी
शहर के चीनी मिल रोड स्थित निजी अस्पताल में लॉकडाउन में भी गर्भवती महिला का ऑपरेशन करने के बाद दो नवजातों की मौत का मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच गया है। कुछ लोगों ने ट़्वीट के जरिये मुख्यमंत्री तक शिकायत भेजी है। सील अस्पताल को कोरोना संदिग्धों को क्वारंटीन करने के लिए शासकीय अस्पताल के रूप में खोलने के बाद बिना रजिस्ट्रेशन मरीजों का इलाज करने के मामले की दूसरे दिन भी पूरे शहर में चर्चा रही। मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचने के बाद मामले की शासन स्तर से जांच और कार्रवाई होने के कयास लगाए जा रहे हैं।
निजी अस्पताल में दो नवजातों की मौत के मामले में सीएमओ से रिपोर्ट मांगी गई थी, वह अभी मिली नहीं है। पता चला है कि वह महिला जिला अस्पताल में भी इलाज के लिए आई थी। उसकी भी जांच करा रहे हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद मामले में उचित कार्रवाई होगी। - वैभव श्रीवास्तव, डीएम