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Pilibhit News: जगह-जगह निजी अस्पताल... कागजों पर सिर्फ 108 दर्ज

Mon, 18 Nov 2024 12:04 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 18 Nov 2024 12:04 AM IST
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Private hospitals everywhere... only 108 registered on paper
पीलीभीत। जिले में निजी अस्पतालों की भरमार है तो जांच केंद्र और पैथोलाॅजी अलग से संचालित हो रहीं हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में इनकी संख्या सिर्फ 108 है। कई अस्पतालों में आग से बचाव के मानक भी पूरे नहीं है। कई अन्य व्यवस्थाएं भी नहीं है। बावजूद इसके स्वास्थ्य और अग्निशमन विभाग के जिम्मेदार बेपरवाह बन हुए हैं।
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हादसों के बाद जागने वाले स्वास्थ्य और अग्निशमन विभाग के जिम्मेदार झांसी की घटना के बाद से अस्पतालों की जांच में जुटे हैं। निरीक्षण में कमियां मिल रही हैं। निर्देश और नोटिस जारी किए जा रहे हैं। कागजी खानापूर्ति में जुटे दोनों विभागों के बयानों में काफी विरोधाभास है।
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सीएमओ के अनुसार जिले में सिर्फ 108 निजी अस्पताल संचालित हैं। इनमें पैथोलॉजी भी शामिल हैं। यह और बात है कि अगर पड़ताल की जाए तो अकेले शहर में ही यह आंकड़ा पूरा हो जाएगा।
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पूरनपुर, बीसलपुर, अमरिया, कलीनगर, जहानाबाद और अन्य स्थानों पर संचालित कई ऐसे निजी अस्पताल हैं जो इस सूची में नहीं हैं। यही नहीं पैथोलाॅजी की संख्या भी इनसे अलग है।
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छोटे क्लीनिकों का संचालन, झोलाछाप भी कर रहे इलाज
बड़े अस्पतालों के अलावा जिले में छोटे क्लीनिकों को खोलकर भी इलाज किया जा रहा है तो झोलाछाप अलग से अपनी दुकानें चला रहे हैं। एक कमरे में संचालित होने वाले क्लीनिक मानकों पर कहीं से खरे नजर नहीं आते। बावजूद इसके विभाग इन सबसे आंखें फेर कर बैठा है। गलत इलाज या कोई अन्य हादसा होने पर ही जांच की खानापूर्ति की जाती है। शनिवार को अमरिया सीएचसी अधीक्षक ने जांच में कमियां मिलने पर तीन अस्पताल संचालकों को नोटिस दिया और अवध अस्पताल को सील किया था। यह कार्रवाई जिले में बगैर पंजीकरण संचालित अस्पतालों की पोल खोलने के लिए काफी है।


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एनओसी और बचाव इंतजामाें को लेकर सजग नहीं अग्निशमन विभाग
जिले में मनमाने तरीके से संचालित निजी अस्पतालों में आग से बचाव के इंतजाम को लेकर अग्निशमन विभाग सजग नहीं है। हाल यह है कि पंजीकृत के सापेक्ष आधे निजी अस्पतालों के पास ही फायर एनओसी है। फायर उपकरण भी पूरे नहीं हैं। मुख्य अग्निशमन अधिकारी अनुराग सिंह का इस बारे में अपना ही तर्क है। उनका कहना है कि नए अस्पतालों के पास एनओसी जरूरी है। पुराने अस्पताल इसमें शामिल नहीं हैं।
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