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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Pilibhit News Eight people from two families died in an accident on the highway in Varanasi

दर्दनाक: शाम तक पहुंचना था घर... सुबह ही पहुंच गई आठ लोगों की मौत की खबर, मरने वालों में चार एक ही गांव के

Thu, 05 Oct 2023 10:02 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, पीलीभीत
अमर उजाला नेटवर्क, पीलीभीत Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 05 Oct 2023 10:02 AM IST
सार

वाराणसी में वाराणसी-जौनपुर हाईवे पर हुए हादसे में पीलीभीत के दो परिवारों के आठ लोगों की जान चली गई। पांच साल का मासूम बच्चा ही हादसे में जिंदा बचा है। हादसे के बाद परिवार में कोहराम मच गया है। पर हादसा हो गया। 

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Pilibhit News Eight people from two families died in an accident on the highway in Varanasi
बनारस में हुए हादसे में मरने वालों की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अस्थि विसर्जन कर लौट रहे आठ लोगों को शाम तक पीलीभीत के रुद्रपुर गांव पहुंचना था लेकिन सुबह सात बजे पूरनपुर कोतवाली से फोन पर हादसे में उनकी जान जाने की खबर पहुंच गई। एक झटके में दो परिवार उजड़ गए। घर में चीख-पुकार मच गई। आस-पड़ोस के लोग पहुंचे तो उन्हें घटना की खबर मिली।
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हादसे में जान गंवाने वालों में दो सगे भाई और उनकी पत्नियों के अलावा रिश्तेदार और कार चालक था। रुद्रपुर के महेंद्र पाल सिंह की मां मेढना देवी का पिछले साल अप्रैल में निधन हो गया था जबकि गांव रूद्रपुर के ही विपिन के पिता सत्यपान का निधन करीब डेढ़ दशक पहले हो गया था। 
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महेंद्र ने अपनी मां और विपिन ने अपने पिता की अस्थि को विसर्जन करने की योजना बनाई। रविवार को महेंद्र पाल अपनी पत्नी चंद्रकली, भाई दामोदर प्रसाद, उसकी पत्नी निर्मला देवी और पांच वर्षीय पुत्र शांती स्वरूप के साथ कार से निकले थे। उनके साथ विपिन कुमार उनकी मां गंगादेवी भी गईं थीं। 

कार में विपिन का रिश्तेदार गांव धरमंगदपुर निवासी राजेंद्र यादव भी था। कार गांव पिपरिया दुलई निवासी अमन कश्यप (22) की थी जो स्वयं उसे चला रहा था। अस्थि विसर्जन करने के बाद सभी ने बुधवार शाम तक घर पहुंचने की बात अपने परिजनों को फोन पर बताई थी। 

वाराणसी की फूलपुर कोतवाली से पूरनपुर कोतवाल को हादसे की खबर मिली तो उन्होंने परिवारों को सूचना दी तो वहां कोहराम मच गया। एसडीएम कलीनगर आशुतोष गुप्ता ने रुद्रपुर और धरमंगदपुर गांव में मृतकों के परिजनों से मिलकर ढांढस बंधाया व हर संभव मदद का आश्वासन दिया।एसडीएम राजेश कुमार शुक्ला ने गांव मुजफ्फरनगर दामोदर प्रसाद के घर पहुंचकर परिजनों का ढांढस बधाया।

हादसे में इनकी गई जान

हादसे में महेंद्र पाल सिंह (48), उनकी पत्नी चंद्रकली (46), महेंद्र के भाई दामोदर प्रसाद (36), दामोदर की पत्नी निर्मला देवी (34), गांव रूदपुर निवासी विपिन कुमार (30), विपिन की मां गंगादेवी (48) और विपिन के रिश्तेदार राजेंद्र यादव (55), कार चालक अमन कश्यप (22) की मौत हो गई। दामोदर का पांच वर्षीय पुत्र शांतिस्वरूप गंभीर रूप से घायल हो गया।

दो भाइयों, भाभियों और मां-बेटे की मौत पर मचा कोहराम
महेंद्र और दामोदर तीन भाई थे। सबसे बड़े महेंद्र और छोटे दामोदर मां की अस्थि विसर्जन करने को गए थे। हादसे में दो भाइयों और उनकी पत्नियों की मौत की सूचना परिवार के लोग वाराणसी रवाना हो गए। गांव धरमंगदपुर निवासी और विपिन का रिश्तेदार राजेंद्र यादव घर का मुखिया था।

राजेंद्र के परिवार में दो पुत्र और एक पुत्री है। महेंद्र के परिवार में पुत्री प्रीती देवी की करीब पांच साल पहले गांव गजरौला खास में शादी हो चुकी है। अमित (20) और अजित (14) अविवाहित पुत्र हैं। दामोदर के तीन संतानों में रोशनी (17), पुत्र शिवम (5) और शांतिस्वरूप (5) हैं।

एक साल पहले अमन ने खरीदी थी कार
गांव पिपरिया दुलई निवासी अमन ने एक साल पहले अर्टिंगा कार खरीदी थी जिसे वह खुद किराये पर चलाता था। विपिन तीन भाई बहनों में मंझला था। उसके बड़े भाई उपेंद्र की शादी हो चुकी है। बहन अविवाहित है।

ननिहाल में आकर बसा महेंद्र पुलिस का था चौकीदार
महेंद्र पूरनपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव मुजफ्फरनगर के रहने वाहे थे। करीब दो दशक पहले वे अपनी ननिहाल गांव रुद्रपुर में आकर बस गए थे। साथ ही वे गांव के चौकीदार थे।

मरने वालों में छह लोग माधोटांडा के रुद्रपुर गांव के
सड़क हादसे में मृत आठ लोगों में छह रुद्रपुर के थे। दामोदर मुजफ्फरनगर में रहने लगे थे लेकिन भाई महेंद्र के अलावा परिवार के अन्य सदस्य रुद्रपुर में ही रहते हैं। विपिन यादव भी रुद्रपुर गांव के हैं।

टूट गए दामोदर और महेंद्र के परिवार
कार में सवार आठ लोगों में किसी ने यह सोचा नहीं होगा कि बुजुर्गों की अस्थियां विसर्जित करने के बाद वह घर तक नहीं पहुंच पाएंगे। हादसे के बाद मासूमों के सिर से पिता का साया उठ गया। दिल दहला देने वाली इस घटना ने सबको झकझोर दिया।

हादसे में मरे महेंद्र वर्मा और उनके भाई दामोदर प्रसाद की परिवार पूरी तरह से टूट गए। महेंद्र पाल और उनकी पत्नी चंद्रकली की मौत के बाद अब परिवार में दो पुत्र अमित, अजीत और एक विवाहित पुत्री प्रीति बची है। वहीं दामोदर और उनकी पत्नी निर्मला देवी की मौत के बाद परिवार में एक छोटी पुत्री रोशनी व दो पुत्र शांति स्वरूप और शिवम रह गए हैं। वहीं राजेंद्र की मौत के बाद उनके तीन पुत्र और एक विवाहित पुत्री के भी सिर से पिता का साया उठ गया। हादसे में मरने वाले सभी लोग छोटे किसान थे। मेहनत मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण कर रहे थे।

टनकपुर में रहता है विपिन, अस्थियां ले जाने के लिए आया था घर
सास-ससुर की मौत के बाद विपिन आठ साल से अपनी ससुराल टनकपुर में ही रह रहा था। अपने पिता की अस्थियां ले जाने के लिए वह शनिवार को ही गांव पहुंचा था। वह अपनी मां गंगा देवी को साथ लेकर गया था। हादसे ने विपिन की मौत के बाद उसकी पत्नी मीना देवी, पुत्री नैंसी और पुत्र रौनक बिलखने लगे। वहीं मां गंगा देवी की मौत से पवन, शिवम और शेखर के सिर से मां का साया भी हट गया।
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