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मिक्स धुनों से गुम हुई संगीत की मिठास
पीलीभीत
Updated Sat, 30 Jan 2016 10:59 PM IST
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अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बांसुरी वादक पद्मश्री पंडित राजेंद्र प्रसन्ना ने कहा कि पहले शास्त्रीय संगीत पर आधारित धुनों पर गीत बनते थे जो चिरजयी होते थे, लेकिन अब मिक्स धुनों के चलन ने संगीत की मिठास ही खत्म कर दी है।
स्पिक मैके संस्था की ओर से आयोजित कार्यक्रम में प्रस्तुति देने के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि पीलीभीत बांसुरी निर्माण के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन उन्हें अफसोस है कि यहां की बांसुरी सिर्फ मनोरंजन का साधन बनकर रह गई है। उन्होंने शास्त्रीय संगीत में, विशेषकर बांसुरी, के प्रति लोगों के बढ़ते रुझान पर प्रसन्नता जताई। पंडित प्रसन्ना ने कहा कि आज देश में बड़ी संख्या में बांसुरी वादक हैं, जो देश विदेश में अपनी सांस्कृतिक विरासत को फैला रहे हैं। संगीत को एक साधना बताते हुए उन्होंने कहा कि इसमें रियाज (अभ्यास) सबसे अहम् पहलू है या यूं कहें कि रियाज ही सबसे बड़ा गुरु है। आज के संगीत में धूमधड़ाका और पश्चिमी वाद्य यंत्रों के प्रयोग के सवाल पर उन्होंने कहा कि धुन संगीत की आत्मा है, लेकिन आज मिक्स धुनों के कारण संगीत से मिठास गायब हो रही है। यही कारण है कि कुछ दिन चलने के बाद गाने न जाने कहां गुम हो जाते हैं।
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स्पिक मैके संस्था की ओर से आयोजित कार्यक्रम में प्रस्तुति देने के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि पीलीभीत बांसुरी निर्माण के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन उन्हें अफसोस है कि यहां की बांसुरी सिर्फ मनोरंजन का साधन बनकर रह गई है। उन्होंने शास्त्रीय संगीत में, विशेषकर बांसुरी, के प्रति लोगों के बढ़ते रुझान पर प्रसन्नता जताई। पंडित प्रसन्ना ने कहा कि आज देश में बड़ी संख्या में बांसुरी वादक हैं, जो देश विदेश में अपनी सांस्कृतिक विरासत को फैला रहे हैं। संगीत को एक साधना बताते हुए उन्होंने कहा कि इसमें रियाज (अभ्यास) सबसे अहम् पहलू है या यूं कहें कि रियाज ही सबसे बड़ा गुरु है। आज के संगीत में धूमधड़ाका और पश्चिमी वाद्य यंत्रों के प्रयोग के सवाल पर उन्होंने कहा कि धुन संगीत की आत्मा है, लेकिन आज मिक्स धुनों के कारण संगीत से मिठास गायब हो रही है। यही कारण है कि कुछ दिन चलने के बाद गाने न जाने कहां गुम हो जाते हैं।
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