{"_id":"5e8df2418ebc3e72f126ca2d","slug":"lokdaun-pilibhit-news-bly402095249","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना लॉकडाउन में 300 शादियां टलीं... कारोबार को भारी नुकसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना लॉकडाउन में 300 शादियां टलीं... कारोबार को भारी नुकसान
विज्ञापन
टनकपुर हाईवे पर स्थित डिग्री कॉलेज चौराहा के पास बरातघर पर पसरा सन्नटा
- फोटो : PILIBHIT
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीलीभीत। अगर कोरोना नहीं होता तो आने वाली 14 अप्रैल से मांगलिक कार्यों जैसे शादी विवाह की शुरूआत होनी थी। मगर, कोरोना के लॉकडाउन में 14 अप्रैल से 29 मई तक चलने वाली 300 शादियां टल गईं हैं। एक अनुमान के अनुसार आने वाले डेढ़ महीने में सराफा, बर्तन, किराना, कैटर्स, मिठाई कारीगर, रिसोर्ट, बरातघर, बैंडबाजा वाले और पंडितों का 50 करोड़ से ज्यादा का रोजगार छिन गया। अब इन सबको अपनी पुरानी जमा पूंजी से काम चलाना होगा। 14 अप्रैल से 29 मई तक होने वाली शादियां भविष्य में कब होंगी, इसका भी अभी कोई अता-पता नहीं है।
हर साल सर्दी और गर्मी की सीजन में शादी बरातों में सराफा, बर्तन, कपड़ा, हलवाई, मिठाई, किराना, बैंडबाजे वालों और पंडितों का करोड़ों का कारोबार होता है। इस बार 14 अप्रैल से मांगलिक कार्य शुरू होने थे। इनको 29 मई तक चलना था। मगर, कोरोना के लॉकडाउन में शहर के 15 से ज्यादा बरातघरों में होने वाली 300 से ज्यादा शादियां स्थगित हो गईं। बरातघरों में अप्रैल और मई में होने वाली शादियों की बुकिंग कैंसिल हो चुकी है। बरातघर मलिक, हलवाई- कैटर्स, सराफा कारोबारी, किराना, पंडित, बैंड बाजे वाले, घोड़ी और लाइट कारोबारी मायूस हैं। अब इन लोगों को अपनी पुरानी जमा पूंजी से घर चलाने की नौबत आ गई है।
15 बरातघरों में तीन महीने में 300 शादी-ब्याह होने थे। लॉकडाउन से बुकिंग कैंसिल हो चुकी हैं। बरातघरों में मेंटिनेंस और लेबर खर्च देना पड़ेगा। पूरा सीजन माहौल सामान्य होने में बीत जाएगा। लॉकडाउन ने कारोबार की पूरी तरह से कमर तोड़ दी है।
विज्ञापन
- कार्तिक भसीन, बरातघर मलिक
शादी पार्टी का सीजन था। बरातों की कई माह पहले से बुकिंग हो चुकी थी। अभी 15,16,17 और 20 अप्रैल की बुकिंग कैंसिल हुई है। आगे भी कैंसिल होने की संभावना है। सारा कारोबार चौपट हो गया है। अब पुरानी जमा पूंजी से परिवार का खर्च चलाना पड़ेगा।
- अरविंद सिंह, लाइट वाले
शहर में 200 बैंड पार्टियां हैं। एक बैंड पार्टी में 20 मास्टर और चार हेल्पर के अलावा ट्रॉली वाले होते हैं। बड़े बैंड संचालकों ने नवंबर से ही बैंड बुक कर लिए थे। अब ज्यादतर बुकिंग कैंसिल हैं। बैंड मास्टरों और लेबर को घर बैठे भुगतान करना पड़ेगा। दिहाड़ी मजदूर भी बेरोजगार हो गए।
- हनीफ, बैंड कारोबारी
बरातों की बुकिंग कई माह पहले कर ली थी। कोरोना फैलने के बाद सब लॉकडाउन है। शादी बरातें ही कैंसिल हैं तो हम क्या करेंगे। एक शादी में 10 से 12 हजार रुपये मिलते हैं। उम्मीद थी कि सीजन अच्छा बीतेगा। कोरोना ने सब कुछ बर्बाद कर दिया।
- राकेश, खाना कारीगर
शादी के सीजन में पूरी तैयारी थी। नए तरीके का कुछ करने के लिए मोटी रकम लगाई थी। लॉकडाउन होने से सब आर्डर कैंसिल हो चुके हैं। मजदूरों की पगार भी देनी पड़ रही है। अगर लॉकडाउन नहीं खुला तो परिवार चलाना मुश्किल होगा।
- विवेक आनंद, कैटर्स
शादी की बुकिंग के पहले पार्टियां नेट से डिजाइन दिखाकर डीकोर कैटरिंग काउंटर लगवाते हैं। इसमें सजावटी सामान खरीदना पड़ता है। स्टॉक में लाखों का इन्वेस्टमेंट था। बुकिंग कैंसिल होने से भारी नुकसान हो चुका है। श्रमिकों को मानदेय भी देना पड़ेगा।
- गौरव राठौर, डीकोर कैटरिंग काउंटर
मांगलिक कामों की शुरुआत 14 अप्रैल से 29 मई तक चलनी है। अब शादी-ब्याह कैंसिल हो चुके हैं। नवरात्रि में होने वाले अनुष्ठान भी नहीं हो पाए। मंदिर बंद हैं। हमारे जैसे पंडितों के अलावा हर किसी को अपने घर बैठने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं है।
- पंडित लक्की मिश्रा
15 अप्रैल से मई तक की बुकिंग कैंसिल हो चुकी है। सीजन में नए कैमरों खरीदकर लाए थे। सोचा था कि शादी बरातों में लागत निकाल लेंगे। मगर, कोरोना के लॉकडाउन होने से सब कारोबार ठप हो चुका है। परिवार का खर्च उठाना भी मंहगा पड़ रहा है।
- मिंटू सिंह, फोटोग्राफर
शादी ब्याह वाली पार्टियां हलवाई से खाने के सामन की सूची तैयार कराकर दो महीने पहले ही आर्डर देती हैं। मगर, जब शादी ही कैंसिल हैं तो आर्डर किस बात का। अभी तो जरूरत का सामान ही बिक रहा है। शादी बरातें कैंसिल होने से लाखों का नुकसान हो गया।
- विजय बाबू, किराना दुकानदार
विज्ञापन
हर साल सर्दी और गर्मी की सीजन में शादी बरातों में सराफा, बर्तन, कपड़ा, हलवाई, मिठाई, किराना, बैंडबाजे वालों और पंडितों का करोड़ों का कारोबार होता है। इस बार 14 अप्रैल से मांगलिक कार्य शुरू होने थे। इनको 29 मई तक चलना था। मगर, कोरोना के लॉकडाउन में शहर के 15 से ज्यादा बरातघरों में होने वाली 300 से ज्यादा शादियां स्थगित हो गईं। बरातघरों में अप्रैल और मई में होने वाली शादियों की बुकिंग कैंसिल हो चुकी है। बरातघर मलिक, हलवाई- कैटर्स, सराफा कारोबारी, किराना, पंडित, बैंड बाजे वाले, घोड़ी और लाइट कारोबारी मायूस हैं। अब इन लोगों को अपनी पुरानी जमा पूंजी से घर चलाने की नौबत आ गई है।
विज्ञापन
15 बरातघरों में तीन महीने में 300 शादी-ब्याह होने थे। लॉकडाउन से बुकिंग कैंसिल हो चुकी हैं। बरातघरों में मेंटिनेंस और लेबर खर्च देना पड़ेगा। पूरा सीजन माहौल सामान्य होने में बीत जाएगा। लॉकडाउन ने कारोबार की पूरी तरह से कमर तोड़ दी है।
विज्ञापन
- कार्तिक भसीन, बरातघर मलिक
शादी पार्टी का सीजन था। बरातों की कई माह पहले से बुकिंग हो चुकी थी। अभी 15,16,17 और 20 अप्रैल की बुकिंग कैंसिल हुई है। आगे भी कैंसिल होने की संभावना है। सारा कारोबार चौपट हो गया है। अब पुरानी जमा पूंजी से परिवार का खर्च चलाना पड़ेगा।
- अरविंद सिंह, लाइट वाले
शहर में 200 बैंड पार्टियां हैं। एक बैंड पार्टी में 20 मास्टर और चार हेल्पर के अलावा ट्रॉली वाले होते हैं। बड़े बैंड संचालकों ने नवंबर से ही बैंड बुक कर लिए थे। अब ज्यादतर बुकिंग कैंसिल हैं। बैंड मास्टरों और लेबर को घर बैठे भुगतान करना पड़ेगा। दिहाड़ी मजदूर भी बेरोजगार हो गए।
- हनीफ, बैंड कारोबारी
बरातों की बुकिंग कई माह पहले कर ली थी। कोरोना फैलने के बाद सब लॉकडाउन है। शादी बरातें ही कैंसिल हैं तो हम क्या करेंगे। एक शादी में 10 से 12 हजार रुपये मिलते हैं। उम्मीद थी कि सीजन अच्छा बीतेगा। कोरोना ने सब कुछ बर्बाद कर दिया।
- राकेश, खाना कारीगर
शादी के सीजन में पूरी तैयारी थी। नए तरीके का कुछ करने के लिए मोटी रकम लगाई थी। लॉकडाउन होने से सब आर्डर कैंसिल हो चुके हैं। मजदूरों की पगार भी देनी पड़ रही है। अगर लॉकडाउन नहीं खुला तो परिवार चलाना मुश्किल होगा।
- विवेक आनंद, कैटर्स
शादी की बुकिंग के पहले पार्टियां नेट से डिजाइन दिखाकर डीकोर कैटरिंग काउंटर लगवाते हैं। इसमें सजावटी सामान खरीदना पड़ता है। स्टॉक में लाखों का इन्वेस्टमेंट था। बुकिंग कैंसिल होने से भारी नुकसान हो चुका है। श्रमिकों को मानदेय भी देना पड़ेगा।
- गौरव राठौर, डीकोर कैटरिंग काउंटर
मांगलिक कामों की शुरुआत 14 अप्रैल से 29 मई तक चलनी है। अब शादी-ब्याह कैंसिल हो चुके हैं। नवरात्रि में होने वाले अनुष्ठान भी नहीं हो पाए। मंदिर बंद हैं। हमारे जैसे पंडितों के अलावा हर किसी को अपने घर बैठने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं है।
- पंडित लक्की मिश्रा
15 अप्रैल से मई तक की बुकिंग कैंसिल हो चुकी है। सीजन में नए कैमरों खरीदकर लाए थे। सोचा था कि शादी बरातों में लागत निकाल लेंगे। मगर, कोरोना के लॉकडाउन होने से सब कारोबार ठप हो चुका है। परिवार का खर्च उठाना भी मंहगा पड़ रहा है।
- मिंटू सिंह, फोटोग्राफर
शादी ब्याह वाली पार्टियां हलवाई से खाने के सामन की सूची तैयार कराकर दो महीने पहले ही आर्डर देती हैं। मगर, जब शादी ही कैंसिल हैं तो आर्डर किस बात का। अभी तो जरूरत का सामान ही बिक रहा है। शादी बरातें कैंसिल होने से लाखों का नुकसान हो गया।
- विजय बाबू, किराना दुकानदार