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Pilibhit News: जलस्तर घटते ही शारदा पार जमीन होगी कब्जामुक्त
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कलीनगर। भारत-नेपाल सीमा से लगे नोमैंस लैंड और जीरो लाइन से भारतीय क्षेत्र के भीतर 15 किलोमीटर तक अतिक्रमित जमीनों को कब्जामुक्त कराने की तैयारी तेज कर दी गई है। शारदा नदी का जलस्तर कम होते ही जिला प्रशासन, एसएसबी और वन विभाग संयुक्त अभियान शुरू करेंगे। शासन की सख्ती के बाद अभियान की साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट उच्चाधिकारियों के साथ न्यायालय को भी भेजी जाएगी, ताकि कार्रवाई की नियमित निगरानी हो सके।
भारत-नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों में लंबे समय से सरकारी और वन भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायतें मिलती रही हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए शासन ने सभी अतिक्रमित भूमि को चिन्हित कर कब्जामुक्त कराने के निर्देश दिए हैं। हाल ही में प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मंडलायुक्त, डीआईजी, डीएम और एसपी ने सीमांत क्षेत्र में चिन्हित अतिक्रमणों की समीक्षा की थी। इसके बाद सोमवार को डीएम ज्ञानेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में एसएसबी, पीलीभीत टाइगर रिजर्व, राजस्व विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों ने रमनगरा, भूड़ा गोरखडिब्बी समेत अन्य क्षेत्रों की भूमि खाली कराकर वन विभाग को सौंपने की रणनीति पर चर्चा की। अधिकारियों ने जल्द कार्रवाई शुरू करने पर सहमति जताई। मंगलवार को एसडीएम कलीनगर, एसडीएम पूरनपुर, क्षेत्राधिकारी और एसएसबी कमांडेंट की बैठक में विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई। तय हुआ कि शारदा नदी का जलस्तर घटते ही सीमांकन कर कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। अभियान के दौरान प्रशासन, एसएसबी और वन विभाग की संयुक्त टीमें मौके पर मौजूद रहेंगी। अधिकारियों के अनुसार पूरी कार्रवाई की नियमित प्रगति रिपोर्ट शासन और न्यायालय को भेजी जाएगी, इससे अभियान की सतत निगरानी हो सके। शासन के निर्देशों के बाद सीमांत क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने को लेकर जिम्मेदार विभागों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र में अतिक्रमित भूमि को कब्जामुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन, एसएसबी और वन विभाग ने संयुक्त कार्ययोजना तैयार कर ली है। शारदा नदी का जलस्तर कम होते ही चिन्हित भूमि को कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। संवाद
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भारत-नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों में लंबे समय से सरकारी और वन भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायतें मिलती रही हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए शासन ने सभी अतिक्रमित भूमि को चिन्हित कर कब्जामुक्त कराने के निर्देश दिए हैं। हाल ही में प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मंडलायुक्त, डीआईजी, डीएम और एसपी ने सीमांत क्षेत्र में चिन्हित अतिक्रमणों की समीक्षा की थी। इसके बाद सोमवार को डीएम ज्ञानेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में एसएसबी, पीलीभीत टाइगर रिजर्व, राजस्व विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों ने रमनगरा, भूड़ा गोरखडिब्बी समेत अन्य क्षेत्रों की भूमि खाली कराकर वन विभाग को सौंपने की रणनीति पर चर्चा की। अधिकारियों ने जल्द कार्रवाई शुरू करने पर सहमति जताई। मंगलवार को एसडीएम कलीनगर, एसडीएम पूरनपुर, क्षेत्राधिकारी और एसएसबी कमांडेंट की बैठक में विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई। तय हुआ कि शारदा नदी का जलस्तर घटते ही सीमांकन कर कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। अभियान के दौरान प्रशासन, एसएसबी और वन विभाग की संयुक्त टीमें मौके पर मौजूद रहेंगी। अधिकारियों के अनुसार पूरी कार्रवाई की नियमित प्रगति रिपोर्ट शासन और न्यायालय को भेजी जाएगी, इससे अभियान की सतत निगरानी हो सके। शासन के निर्देशों के बाद सीमांत क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने को लेकर जिम्मेदार विभागों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र में अतिक्रमित भूमि को कब्जामुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन, एसएसबी और वन विभाग ने संयुक्त कार्ययोजना तैयार कर ली है। शारदा नदी का जलस्तर कम होते ही चिन्हित भूमि को कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। संवाद
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