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परियोजनाओं के आसपास हो रहा है अवैध खनन
माधोटांडा/पीलीभीत।
Updated Sun, 31 May 2015 10:31 PM IST
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प्रशासन एवं सिंचाई विभाग ने यदि शारदा नदी के दाएं किनारे पर हो रहे अवैध खनन को गंभीरता से नहीं लिया तो करोड़ों की लागत से बना मार्जिनल बांध व स्परों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
शारदा नदी के दांये किनारे पर 22 किमी लंबा शारदा डैम बना है। नदी की बाढ़ व कटान के खतरे से बचाने को नदी के दांये किनारे पर गभिया सहराई से लेकर नगरियाखुर्द तक मार्जिनल बांध एवं पत्थर के स्पर बनवाए गए थे। जिसके चलते नदी डैम की ओर बढ़ने के बजाए बांये किनारे पर कटान करते बढ़ गई थी। स्थानीय ग्रामीणों ने मौका देख दांये किनारे पर नदी के भीतरी हिस्से में सैकड़ों एकड़ भूमि पर खेती करनी शुरू कर दी।
बताते हैं कि अब यहां नदी की खाली भूमि में रेत खनन शुरू कर दिया गया है। पिछले दो वर्षों में गहरे गड्ढे होने से नदी का रूख पुन: दांयी ओर हो गया है। स्थिति यह आ गई है कि गत वर्ष बाढ़ ने स्परों को क्षतिग्रस्त करने के साथ ही करीब 70 किसानों की जमीनें भी काट ली। नदी की धार भी नगरियाखुर्द में मार्जिनल बांध तक आ पहुंची थी।
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अवैध खनन से जिम्मेदार बेखबर
क्षेत्र के नलडेंगा, गोरखडिब्बी में कुछ किसानों ने लालचवश ठेकेदारों को छोटे पत्थरों व रेत की बिक्री कर दी थी। ठेकेदारों ने भी मौका का फायदा उठाते हुए जेसीबी मशीन से खनन शुरू करा दिया गया। नौतला झील पर बने पुल के दोनों ओर भी बड़े पैमाने पर खनन कर बड़े बड़े गड्ढे कर दिए गए हैं। ऐसे में एक बार फिर नगरियाखुर्द में बना मार्जनल बांध खतरे में पड़ सकता है।
बांध व डैम को भी भारी खतरा
कंजिया सिंहपुर, नलडेंगा, नगरियाखुर्द तक शारदा नदी शारदा डैम के काफी नजदीकी क्षेत्र में बहती है। यदि स्पर क्षतिग्रस्त हुए, तो मार्जिनल बांध के साथ शारदा डैम के अस्तित्व को भारी खतरा पैदा हो सकता है।
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रेत खनन की जानकारी नहीं है। किसी भी परियोजना के निकट खनन नहीं होने दिया जाएगा। यदि खनन पाया जाता है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- मिन्हाज अहमद, अधिशासी अभियंता
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शारदा नदी के दांये किनारे पर 22 किमी लंबा शारदा डैम बना है। नदी की बाढ़ व कटान के खतरे से बचाने को नदी के दांये किनारे पर गभिया सहराई से लेकर नगरियाखुर्द तक मार्जिनल बांध एवं पत्थर के स्पर बनवाए गए थे। जिसके चलते नदी डैम की ओर बढ़ने के बजाए बांये किनारे पर कटान करते बढ़ गई थी। स्थानीय ग्रामीणों ने मौका देख दांये किनारे पर नदी के भीतरी हिस्से में सैकड़ों एकड़ भूमि पर खेती करनी शुरू कर दी।
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बताते हैं कि अब यहां नदी की खाली भूमि में रेत खनन शुरू कर दिया गया है। पिछले दो वर्षों में गहरे गड्ढे होने से नदी का रूख पुन: दांयी ओर हो गया है। स्थिति यह आ गई है कि गत वर्ष बाढ़ ने स्परों को क्षतिग्रस्त करने के साथ ही करीब 70 किसानों की जमीनें भी काट ली। नदी की धार भी नगरियाखुर्द में मार्जिनल बांध तक आ पहुंची थी।
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अवैध खनन से जिम्मेदार बेखबर
क्षेत्र के नलडेंगा, गोरखडिब्बी में कुछ किसानों ने लालचवश ठेकेदारों को छोटे पत्थरों व रेत की बिक्री कर दी थी। ठेकेदारों ने भी मौका का फायदा उठाते हुए जेसीबी मशीन से खनन शुरू करा दिया गया। नौतला झील पर बने पुल के दोनों ओर भी बड़े पैमाने पर खनन कर बड़े बड़े गड्ढे कर दिए गए हैं। ऐसे में एक बार फिर नगरियाखुर्द में बना मार्जनल बांध खतरे में पड़ सकता है।
बांध व डैम को भी भारी खतरा
कंजिया सिंहपुर, नलडेंगा, नगरियाखुर्द तक शारदा नदी शारदा डैम के काफी नजदीकी क्षेत्र में बहती है। यदि स्पर क्षतिग्रस्त हुए, तो मार्जिनल बांध के साथ शारदा डैम के अस्तित्व को भारी खतरा पैदा हो सकता है।
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रेत खनन की जानकारी नहीं है। किसी भी परियोजना के निकट खनन नहीं होने दिया जाएगा। यदि खनन पाया जाता है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- मिन्हाज अहमद, अधिशासी अभियंता