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साइबर क्राइम से बचने के लिए स्मार्ट फोन की तहर खुद भी स्मार्ट बनिए
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पुलिस की पाठशाला में मौजूद पुलिस अफसर, प्रधानाचार्य।
- फोटो : PILIBHIT
पूरनपुर। साइबर क्राइम से बचना है तो स्मार्ट फोन की तरह खुद भी स्मार्ट बनना है। साइबर क्राइम में अपराधी बगैर स्वीकृति के कुछ नहीं कर सकते। जागरूकता है तो बचाव भी संभव है। फोन का इस्तेमाल सतर्कता से करें। प्राइवेसी अपनाएं। यूटीआई नंबर बताने से कभी आप के खाते में रुपये नहीं आ सकते। रुपये आपके खाते से दूसरे के खाते में जरूर जा सकते हैं।
यह जानकारी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में बृहस्पतिवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम में साइबर क्राइम ब्रांच की टीम ने विद्यार्थियों को दी। ब्रांच के जनपद प्रभारी इंस्पेक्टर अजय यादव ने कहा कि साइबर क्राइम तभी होता है, जब हम जागरूक नहीं होते हैं। अनुज ने कहा कि कंप्यूटर और डिवाइस से कनेक्टविटी से होने वाले अपराध को साइबर क्राइम कहते हैं। अपराधी सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेट फार्म से जानकारियां हासिल कर लेते हैं। इसके बाद दोस्ती बनाते हैं। निजी जानकारी साझा करने पर ठगी करते हैं।
कई बार शारीरिक, सामाजिक उत्पीड़न करने लगते हैं। वित्तीय अपराध में किसी भी क्यूआर कोड और यूपीआई पिन का उपयोग सिर्फ भुगतान के लिए होता है। इंस्पेक्टर क्राइम उत्तम सिंह, एसआई सलोनी त्यागी, साइबर क्राइम ब्रांच के अंकुर ने भी उपयोगी जानकारी दी। प्रधानाचार्य संजय मिश्र, कॉलेज प्रबंध समिति के अध्यक्ष संजय गुप्ता ने आभार व्यक्त किया। संचालन शिक्षक राजीव मोहन अग्रवाल ने किया। शिक्षक बलराम वर्मा, श्रीपाल का सहयोग रहा।
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जानकारी करीबियों को दूंगी
साइबर क्राइम नाम तो सुना है। साइबर क्राइम और उससे बचाव की जानकारी मिली। इसे करीबियों और अन्य लोगों को दूंगी। -आशा शर्मा
मोबाइल मेें प्रइवेसी जरूरी
मोबाइल में प्राइवेसी कितनी जरूरी है। इसकी जानकारी मिली है। स्वयं प्राइवेसी रखने के साथ लोगों को इसके लिए जागरूक करूंगी। -रिजवाना।
कई उपाय सीखने को मिले
मल्टीमीडिया मोबाइल चलाने से साइबर क्राइम का शिकार होने की जानकारी मिली है। बचने के उपाय भी बताए गए। -सेजल वर्मा।
जागरूकता बहुत जरूरी
जागरूकता के बिना धोखाधड़ी का शिकार हो सकते हैं। इसकी जानकारी कार्यक्रम में मिली। फ्रॉड से बचने का तरीका भी बताया गया। -आरब वर्मा
क्राइम से बचाव से के तरीके सीखे
साइबर क्राइम से कैसे बचा जाए और साइबर क्राइम में कैसे लोग फंस जाते है। इसकी विस्तार से जानकारी हुई है। -अक्षत मिश्रा
ठगी से बचना जरूरी
मोबाइल चलाने पर भी ठगी का शिकार हो सकते हैं। इसकी जानकारी के साथ बचाव के तरीके पता चले हैं। -संदीप त्रिवेदी।
साइबर क्राइम से बचाव के तरीके
- सोशल मीडिया एकाउंट के यूजर आईडी और पासवर्ड किसी से शेयर न करें।
- सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर निजी जानकारी व फोटो पोस्ट करने में सावधानी बरतें।
- सोशल मीडिया एकाउंट की सिक्योरिटी के लिए दो स्टेप वेरिफिकेशन का प्रयोग करें
- अपना बैंक एकाउंट क्रेडिट-डेबिट कार्ड नबंर, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड मोबाइल में सेव न करें।
- इंटरनेट बैंकिंग सोशल नेटवर्किंग साइट का प्रयोग करने के बाद लॉगआउट करना न भूलें।
- कस्टूमर केयर से संपर्क करने को एथेंटिक बेवसाइट पर जाकर ही कांटेक्ट नंबर शेयर करें
- ओएलएक्स साइट आदि पर विज्ञापन की सही जानकारी प्राप्त करें।
- बैंक से संबंधित कोई जानकारी जैसे ओटीपी, डेबिट क्रेडिट कार्ड नंबर मांगने पर न दें।
- केवाईसी के नाम पर ऐनी डेस्क, टीम विवर, क्यूक स्पोट आदि एप डाउन लोड न करें।
- क्यूआर कोड और यूपीआई पिन का उपयोग सिर्फ भुगतान के लिए होता है, धन प्राप्ति को नहीं।
- अनचाहे मैसेज लिंक को ओपन न करें और न ही ओटीपी शेयर करें।
- एसएमएस अलर्ट ऑन हो, ताकि हर ट्रांजेक्शन का अपडेट मिलता रहे।
- रजिस्ट्रर्ड ई-मेल लॉगिन करें और इसका पासवर्ड किसी से शेयर न करें।
- एटीएम पिन और इंटरनेट बैंकिंग का पासवर्ड शेयर न करें। इसे बदलते रहें
- ऑनलाइन शापिंग में लेनदेन की लिमिट कम रखें।
- कैशबैक ऑफर या डिस्काउंट आदि के लिए कूपन कोड जैसे लालच में न फंसेें।
- साइबर क्राइम होने पर 1930 पर कॉल करें।
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यह जानकारी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में बृहस्पतिवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम में साइबर क्राइम ब्रांच की टीम ने विद्यार्थियों को दी। ब्रांच के जनपद प्रभारी इंस्पेक्टर अजय यादव ने कहा कि साइबर क्राइम तभी होता है, जब हम जागरूक नहीं होते हैं। अनुज ने कहा कि कंप्यूटर और डिवाइस से कनेक्टविटी से होने वाले अपराध को साइबर क्राइम कहते हैं। अपराधी सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेट फार्म से जानकारियां हासिल कर लेते हैं। इसके बाद दोस्ती बनाते हैं। निजी जानकारी साझा करने पर ठगी करते हैं।
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कई बार शारीरिक, सामाजिक उत्पीड़न करने लगते हैं। वित्तीय अपराध में किसी भी क्यूआर कोड और यूपीआई पिन का उपयोग सिर्फ भुगतान के लिए होता है। इंस्पेक्टर क्राइम उत्तम सिंह, एसआई सलोनी त्यागी, साइबर क्राइम ब्रांच के अंकुर ने भी उपयोगी जानकारी दी। प्रधानाचार्य संजय मिश्र, कॉलेज प्रबंध समिति के अध्यक्ष संजय गुप्ता ने आभार व्यक्त किया। संचालन शिक्षक राजीव मोहन अग्रवाल ने किया। शिक्षक बलराम वर्मा, श्रीपाल का सहयोग रहा।
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जानकारी करीबियों को दूंगी
साइबर क्राइम नाम तो सुना है। साइबर क्राइम और उससे बचाव की जानकारी मिली। इसे करीबियों और अन्य लोगों को दूंगी। -आशा शर्मा
मोबाइल मेें प्रइवेसी जरूरी
मोबाइल में प्राइवेसी कितनी जरूरी है। इसकी जानकारी मिली है। स्वयं प्राइवेसी रखने के साथ लोगों को इसके लिए जागरूक करूंगी। -रिजवाना।
कई उपाय सीखने को मिले
मल्टीमीडिया मोबाइल चलाने से साइबर क्राइम का शिकार होने की जानकारी मिली है। बचने के उपाय भी बताए गए। -सेजल वर्मा।
जागरूकता बहुत जरूरी
जागरूकता के बिना धोखाधड़ी का शिकार हो सकते हैं। इसकी जानकारी कार्यक्रम में मिली। फ्रॉड से बचने का तरीका भी बताया गया। -आरब वर्मा
क्राइम से बचाव से के तरीके सीखे
साइबर क्राइम से कैसे बचा जाए और साइबर क्राइम में कैसे लोग फंस जाते है। इसकी विस्तार से जानकारी हुई है। -अक्षत मिश्रा
ठगी से बचना जरूरी
मोबाइल चलाने पर भी ठगी का शिकार हो सकते हैं। इसकी जानकारी के साथ बचाव के तरीके पता चले हैं। -संदीप त्रिवेदी।
साइबर क्राइम से बचाव के तरीके
- सोशल मीडिया एकाउंट के यूजर आईडी और पासवर्ड किसी से शेयर न करें।
- सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर निजी जानकारी व फोटो पोस्ट करने में सावधानी बरतें।
- सोशल मीडिया एकाउंट की सिक्योरिटी के लिए दो स्टेप वेरिफिकेशन का प्रयोग करें
- अपना बैंक एकाउंट क्रेडिट-डेबिट कार्ड नबंर, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड मोबाइल में सेव न करें।
- इंटरनेट बैंकिंग सोशल नेटवर्किंग साइट का प्रयोग करने के बाद लॉगआउट करना न भूलें।
- कस्टूमर केयर से संपर्क करने को एथेंटिक बेवसाइट पर जाकर ही कांटेक्ट नंबर शेयर करें
- ओएलएक्स साइट आदि पर विज्ञापन की सही जानकारी प्राप्त करें।
- बैंक से संबंधित कोई जानकारी जैसे ओटीपी, डेबिट क्रेडिट कार्ड नंबर मांगने पर न दें।
- केवाईसी के नाम पर ऐनी डेस्क, टीम विवर, क्यूक स्पोट आदि एप डाउन लोड न करें।
- क्यूआर कोड और यूपीआई पिन का उपयोग सिर्फ भुगतान के लिए होता है, धन प्राप्ति को नहीं।
- अनचाहे मैसेज लिंक को ओपन न करें और न ही ओटीपी शेयर करें।
- एसएमएस अलर्ट ऑन हो, ताकि हर ट्रांजेक्शन का अपडेट मिलता रहे।
- रजिस्ट्रर्ड ई-मेल लॉगिन करें और इसका पासवर्ड किसी से शेयर न करें।
- एटीएम पिन और इंटरनेट बैंकिंग का पासवर्ड शेयर न करें। इसे बदलते रहें
- ऑनलाइन शापिंग में लेनदेन की लिमिट कम रखें।
- कैशबैक ऑफर या डिस्काउंट आदि के लिए कूपन कोड जैसे लालच में न फंसेें।
- साइबर क्राइम होने पर 1930 पर कॉल करें।