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Pilibhit News: हाईकोर्ट ने वरिष्ठ सहायक विमल वर्मा के निलंबन पर लगाई रोक
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पीलीभीत। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में अवैध ट्रांजेक्शन के माध्यम से हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में निलंबित किए गए वरिष्ठ सहायक विमल वर्मा के निलंबन आदेश पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। साथ ही विमल वर्मा से उनके मूल पद पर कार्य करवाने और प्रत्येक माह नियमित रूप से वेतन भुगतान करने का आदेश दिया।
गौरतलब है कि वेतन संबंधी पटल संभाल रहे इल्हाम शम्सी पर करोड़ों रुपये के सरकारी धन के गबन का आरोप है। इस प्रकरण में वरिष्ठ सहायक विमल वर्मा को 16 मार्च को निलंबित किया गया था। निलंबन के खिलाफ विमल ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका दाखिल की। याचिका पर न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने सुनवाई की। विमल के अधिवक्ता आनंद तिवारी ने पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता का वेतन बिल बनाने, ऑनलाइन डेटा फीड करने या ट्रेजरी भुगतान की प्रक्रिया से दूर-दूर तक कोई वैधानिक संबंध नहीं था। उसे द्वेषवश और विभाग के बड़े जिम्मेदारों को बचाने के लिए ''''बलि का बकरा'''' बनाया गया।
सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति पाडिया ने संयुक्त शिक्षा निदेशक बरेली मंडल के हस्ताक्षर से 16 मार्च को जारी निलंबन आदेश को पूरी तरह स्थगित कर दिया। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद अब जिला विद्यालय निरीक्षक और विभागीय वित्त व लेखाधिकारी की भूमिका सीधे तौर पर संदेह के घेरे में आ गई है।
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नियमों के मुताबिक, वित्तीय नियंत्रण और लॉगिन ओटीपी में जो मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी पंजीकृत थे। वे कथित तौर पर स्वयं डीआईओएस अधिकारी के थे। ऐसे में लॉगिन के लिए आवश्यक 'वन टाइम पासवर्ड' अधिकारी के पास ही जाता था। डिजिटल सुरक्षा और वित्तीय संचरण की पूरी जिम्मेदारी नियंत्रणकर्ता अधिकारी की होती है। संवाद
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इल्हाम की तीसरी पत्नी की जमानत मंजूर
पीलीभीत। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के चर्चित घोटाले में जेल गई मुख्य आरोपी इल्हाम शम्सी की तीसरी पत्नी अजरा खान की जमानत मंजूर हो गई। इससे उसकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
गौरतलब है कि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में ट्रेजरी के माध्यम से हुए करोड़ों रुपये के चर्चित घोटाले में विवेचना के दौरान सामने आई सात महिलाओं को एक मई 2026 को कोर्ट में पेश किया था। वहां से सभी को जेल भेजा गया था। जिला एवं सत्र न्यायालय में दाखिल जमानत याचिका पर सुनवाई की गई। प्रकरण की गंभीरता और तथ्यों पर विचार करने के बाद इस मामले की आरोपी अजरा खान की जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है। संवाद
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गौरतलब है कि वेतन संबंधी पटल संभाल रहे इल्हाम शम्सी पर करोड़ों रुपये के सरकारी धन के गबन का आरोप है। इस प्रकरण में वरिष्ठ सहायक विमल वर्मा को 16 मार्च को निलंबित किया गया था। निलंबन के खिलाफ विमल ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका दाखिल की। याचिका पर न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने सुनवाई की। विमल के अधिवक्ता आनंद तिवारी ने पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता का वेतन बिल बनाने, ऑनलाइन डेटा फीड करने या ट्रेजरी भुगतान की प्रक्रिया से दूर-दूर तक कोई वैधानिक संबंध नहीं था। उसे द्वेषवश और विभाग के बड़े जिम्मेदारों को बचाने के लिए ''''बलि का बकरा'''' बनाया गया।
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सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति पाडिया ने संयुक्त शिक्षा निदेशक बरेली मंडल के हस्ताक्षर से 16 मार्च को जारी निलंबन आदेश को पूरी तरह स्थगित कर दिया। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद अब जिला विद्यालय निरीक्षक और विभागीय वित्त व लेखाधिकारी की भूमिका सीधे तौर पर संदेह के घेरे में आ गई है।
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नियमों के मुताबिक, वित्तीय नियंत्रण और लॉगिन ओटीपी में जो मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी पंजीकृत थे। वे कथित तौर पर स्वयं डीआईओएस अधिकारी के थे। ऐसे में लॉगिन के लिए आवश्यक 'वन टाइम पासवर्ड' अधिकारी के पास ही जाता था। डिजिटल सुरक्षा और वित्तीय संचरण की पूरी जिम्मेदारी नियंत्रणकर्ता अधिकारी की होती है। संवाद
इल्हाम की तीसरी पत्नी की जमानत मंजूर
पीलीभीत। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के चर्चित घोटाले में जेल गई मुख्य आरोपी इल्हाम शम्सी की तीसरी पत्नी अजरा खान की जमानत मंजूर हो गई। इससे उसकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
गौरतलब है कि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में ट्रेजरी के माध्यम से हुए करोड़ों रुपये के चर्चित घोटाले में विवेचना के दौरान सामने आई सात महिलाओं को एक मई 2026 को कोर्ट में पेश किया था। वहां से सभी को जेल भेजा गया था। जिला एवं सत्र न्यायालय में दाखिल जमानत याचिका पर सुनवाई की गई। प्रकरण की गंभीरता और तथ्यों पर विचार करने के बाद इस मामले की आरोपी अजरा खान की जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है। संवाद