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डायग्नोस्टिक सेंटर पर पहुंचीं सीएमओ, अभिलेख खंगाले
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पीलीभीत। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में गर्भस्थ जीवित शिशु को मृत दर्शाने के मामले में डायग्नोस्टिक सेंटर संचालक और एबॉर्शन का दबाव बनाने वाली डॉक्टर पर संगीन आरोप लगने के बाद खुद गलती स्वीकारने पर भी कार्रवाई नहीं किए जाने का मामला सोमवार को अमर उजाला में प्रकाशित होने पर डीएम ने संज्ञान लिया। डीएम के निर्देश पर सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने जांच टीम संग डायग्नोस्टिक सेंटर पहुंचकर अभिलेखों व स्टाफ की जानकारी जुटाई।
बता दें, एक डायग्नोस्टिक सेंटर पर न्यूरिया निवासी नदीम ने 24 जुलाई को पत्नी नेहा परवीन का एक महिला डॉक्टर के कहने पर अल्ट्रासाउंड कराया था। यहां रिपोर्ट में जीवित गर्भस्थ शिशु को मृत दर्शाने के बाद नेहा की जान को खतरा बताकर तुरंत एबॉर्शन कराने के लिए दबाव बनाया जाने लगा था। शक होने पर नदीम ने अन्य दो सेंटरों पर जांच कराई तो रिपोर्ट में गर्भस्थ शिशु को स्वस्थ और सामान्य बताया गया। मामला डीएम के संज्ञान में आने पर जांच के नाम पर कई दिनों की टालमटोल के बाद महिला अस्पताल की डॉ. कमलेश मिश्रा, रेडियोलोजिस्ट डॉ. जगदीश और डॉ. राजेश भट्ट को जांच पैनल में शामिल कर शुक्रवार को साक्ष्यों सहित डायग्नोस्टिक सेंटर संचालिका, गांधी स्टेडियम रोड की एबॉॅर्शन का दबाव बनाने वाली महिला डॉक्टर और शिकायतकर्ता को तलब किया गया। सभी ने पैनल के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए। इसके बाद सत्ता पक्ष से जुड़े कुछ नेताओं की पैरवी के बाद दोनों डॉक्टरों को सिर्फ चेतावनी देकर मामला रफा-दफा करने की बात निकलकर सामने आई। इधर, डीएम के निर्देश पर सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने डॉ. राजेश भट्ट, डॉ. अश्वनी गुप्ता संग जांच के लिए डायग्नोस्टिक सेंटर पहुंचीं। यहां अल्ट्रासाउंड से संबंधित रजिस्टर और मौजूद स्टाफा की जानकारी ली। करीब सवा घंटे की जांच पड़ताल के बाद सीएमओ जांच टीम के साथ लौट गईं।
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बता दें, एक डायग्नोस्टिक सेंटर पर न्यूरिया निवासी नदीम ने 24 जुलाई को पत्नी नेहा परवीन का एक महिला डॉक्टर के कहने पर अल्ट्रासाउंड कराया था। यहां रिपोर्ट में जीवित गर्भस्थ शिशु को मृत दर्शाने के बाद नेहा की जान को खतरा बताकर तुरंत एबॉर्शन कराने के लिए दबाव बनाया जाने लगा था। शक होने पर नदीम ने अन्य दो सेंटरों पर जांच कराई तो रिपोर्ट में गर्भस्थ शिशु को स्वस्थ और सामान्य बताया गया। मामला डीएम के संज्ञान में आने पर जांच के नाम पर कई दिनों की टालमटोल के बाद महिला अस्पताल की डॉ. कमलेश मिश्रा, रेडियोलोजिस्ट डॉ. जगदीश और डॉ. राजेश भट्ट को जांच पैनल में शामिल कर शुक्रवार को साक्ष्यों सहित डायग्नोस्टिक सेंटर संचालिका, गांधी स्टेडियम रोड की एबॉॅर्शन का दबाव बनाने वाली महिला डॉक्टर और शिकायतकर्ता को तलब किया गया। सभी ने पैनल के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए। इसके बाद सत्ता पक्ष से जुड़े कुछ नेताओं की पैरवी के बाद दोनों डॉक्टरों को सिर्फ चेतावनी देकर मामला रफा-दफा करने की बात निकलकर सामने आई। इधर, डीएम के निर्देश पर सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने डॉ. राजेश भट्ट, डॉ. अश्वनी गुप्ता संग जांच के लिए डायग्नोस्टिक सेंटर पहुंचीं। यहां अल्ट्रासाउंड से संबंधित रजिस्टर और मौजूद स्टाफा की जानकारी ली। करीब सवा घंटे की जांच पड़ताल के बाद सीएमओ जांच टीम के साथ लौट गईं।
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