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Pilibhit News: पूरनपुर की रामलीला के लिए हबीब कुरैशी और श्रीराम खंडेलवाल ने दान की थी जमीन

Thu, 03 Oct 2024 02:24 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 03 Oct 2024 02:24 AM IST
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Habib Qureshi and Shriram Khandelwal had donated land for the Ramlila of Puranpur
पूरनपुर रामलीला मेला मैदान पर बनाया गया नाटक घर।संवाद
पूरनपुर। पूरनपुर का रामलीला मेला जिले मेें सबसे पहले लगने वाला ऐतिहासिक मेला है। शुरू में मेले में नाटक मंचन नगर के पूर्वी हिस्से में खाली पड़े प्लाट में चारपाई डालकर होता था, जिसमें नगर के कुछ युवक रंगकर्मी का रोल अदा करते थे।
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वर्ष 1842 में नगर के प्रमुख व्यापारी स्वर्गीय लाला जय जयराम के बाबा चौधरी नारायन दास खंडेलवाल ने नगर में रामलीला महोत्सव की आधारशिला रखी थी। उस समय मेला प्रबंधन के पास अपना मैदान नहीं था। शुरुआती दौर में मेला के नाटक का मंचन चारपाई डालकर होता था। मेला में स्वर्गीय नारायनलाल खंडेलवाल, शिवदर्शन लाल, डोरीलाल, ठाकुर कंधई सिंह राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघन आदि की भूमिका निभाते थे। लोगों में धार्मिक आस्था और मनोरंजन के साधन कम होने के कारण मेला में भीड़ लगती थी।
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श्री खंडेलवाल ने लोगों में मेला के प्रति रुचि को देखते हुए 1850 में कार्यकारिणी का गठन कर डोरीलाल, शिवदर्शन लाल और जय जयराम के अग्रज भगवानदास को कमेटी में शामिल किया गया था। वर्ष 1901 में मेला की बागडोर भगवानदास ने संभाली। 1935 में माधोटांडा रजवाड़े परिवार के कुंवर भारत सिंह के पिता कुंवर मिलाप सिंह मेला कमेटी के अध्यक्ष बने।
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इसके बाद माधोटांडा के चंद्रभान सिंह, और 1950 में सतीश खंडेलवाल, ललुआ उर्फ लाल, यज्ञदत्त मिश्रा ने सहयोगियों के रूप में कुंवर चंद्रभान सिंह का साथ दिया। तब मेला में बाहर से खेल तमाशे और दुकानें आना शुरू हो गईं थीं। वर्ष 1952-53 में नगर के श्रीराम खंडेलवाल, हबीब कुरैशी ने अपनी साढ़े तीन एकड़ जमीन को मेला कमेटी को दान किया था।

वर्ष 1955 में नगर में पालिका का चुनाव हुआ। इसमें पूर्व विधायक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आचार्य मोहन लाल हार गए थे। चूंकि चंद्रभान सिंह मोहन लाल आचार्य गुट के थे और विधायक गोपाल कृष्ण सक्सेना के पिता पूर्व विधायक हरनरायन लाल, पूर्व विधायक हरिश्चंद्र खंडेलवाल हरीबाबू दूसरे गुट के थे। परिणाम स्वरूप रामलीला मेला की कमान हरीबाबू, हरनारायन लाल के हाथ आ गई थी। तब मेला में लगने वाले खेल, तमाशों से आय होने लगी। वर्ष 1956 में रामलीला मेला की आय से नाटकघर कक्ष बनवाया गया था। जिसका निर्माण तीन साल में पूरा हो पाया था।

1969 में हरनरायन लाल विधायक बने तब मेला की कमान उनके परिवार के हाथ चली गई। 1970 में हरनरायन लाल के भाई हृदय नरायन लाल सक्सेना अध्यक्ष बने। 1976 में इमरजेंसी के दौरान हरनरायन लाल सक्सेना आदि लोग जेल गए। तब पूर्व विधायक मोहन लाल आचार्य अध्यक्ष और गजेंद्र मिश्रा मेला कमेटी के प्रबंधक, भजन सिंह भदौरिया महामंत्री बने। वर्ष 1989 में मेला कमेटी के चुनाव में नगर के तीन हजार लोगों को सदस्य बनाया गया। इसके बाद फकीरचंद पांडेय, सुनील सक्सेना दो साल विशेष मेला मैनेजर रहे।

पूर्व विधायक हरनरायन लाल के निधन के बाद उनके पुत्र पूर्व विधायक गोपाल कृष्ण सक्सेना को संरक्षक बनाया गया। अप्रैल 2003 में हृदय नरायन लाल सक्सेना की जगह उनके पुत्र संजय सक्सेना को अध्यक्ष चुना गया। संजय सक्सेना 2013 तक अध्यक्ष रहे। इसके बाद कुलदीप सक्सेना दो साल अध्यक्ष रहे। उनके बाद अरुण मिश्रा मेला कमेटी के अध्यक्ष दो साल तक रहे।


कमेटियों में विवाद पर 2018 में तहसीलदार बने कंट्रोलर

पूरनपुर। मेला कमेटी के विवाद पर मामला एसडीएम कोर्ट चला गया। एसडीएम ने सुनवाई के बाद दोनोंं कमेटियों को अमान्य बता दिया। साथ ही चुनाव कराने के आदेश किए। चुनाव न होने तक 2018 में तहसीलदार को मेला का कंट्रोलर नियुक्त कर दिया गया। एसडीम के आदेश के विरुद्ध एक पक्ष के लोग हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट में मामला पेंडिंग होने के चलते तब से तहसीलदार कंट्रोलर के तौर पर मेला का संचालन करा रहे हैं।


30 साल का अतिक्रमण 2018 में हटवाया गया था

पूरनपुर। रामलीला मेला मैदान में 250 दुकानदारों ने अतिक्रमण कर कब्जा कर लिया था। इससे मेला मैदान सिकुड़ गया था। सात अक्तूबर 2018 को अभियान चलाकर 30 सालों का अतिक्रमण तीन घंटे में प्रशासन ने हटवा दिया था। इसमेें पांच जेसीबी और सौ से अधिक कर्मचारी और मजदूर लगाए गए थे। एडीएम और एएसपी पूरे दिन नगर में ही डेरा जमाए रहे थे। संवाद



नाटक कंपनी के कलाकार करते हैं नाटक का मंचन

पूरनपुर। नगर की रामलीला मेला में सालों से नाटक कंपनी के कलाकार रामलीला मेला का मंचन करते हैं। रात में धार्मिक नाटकों का मंचन किया जाता है। करीब एक दशक पहले मेला में खूब खेल तमाशा, सर्कस आया करते थे। सभी वर्गों के लोगों की भीड़ लगती थी। अब मेला में पहले की अपेक्षा भीड़-भाड़ नहीं रहती। मध्यम वर्ग के घरों की महिलाएं तो मेला समापन के बाद खरीदारी के लिए मेले में पहुंचती हैं। संवाद

पूरनपुर रामलीला मेला मैदान पर बनाया गया नाटक घर।संवाद

पूरनपुर रामलीला मेला मैदान पर बनाया गया नाटक घर।संवाद

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