करोड़ों खर्च करने के बाद भी खुले में शौच से मुक्ति नहीं
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत एक साल के दौरान शौचालय निर्माण के लिए अनुदान पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद जिले के आधे से ज्यादा गांव खुले में शौच से मुक्त नहीं हो सके। आलम यह है कि बीडीओ, पंचायत विभाग के अधिकारी और कर्मचारी टीमों के साथ सुबह गांव-गांव जाकर ग्रामीणों को स्वच्छता के प्रति जागरूक कर रहे हैं। उसके बाद भी स्वच्छता मिशन की दौड़ में जिला पिछड़ा हुआ है। खास बात यह है कि जिन पंचायतों को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जा चुका है, वहां भी खुले में शौच की समस्या बनी हुई है। यह बात अलग है कि सरकारी दस्तावेज उन पंचायतों को खुले में शौच न होने की श्रेणी में होने की गवाही दे रहे हैं। 721 ग्राम पंचायतों में से सिर्फ 52 ग्राम पंचायतें हीं खुले में शौच से मुक्त हो सकी है।
शौचालय निर्माण के लिए करीब 30 करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं। लाखों रुपये स्वच्छाग्रहियों को प्रशिक्षण देने, स्वच्छता के प्रति सीएलटीएस टीम को रोजाना प्रशिक्षण देने, बाहरी जिलों से आने वाले मास्टर ट्रेनरों और ग्रामीण क्षेत्रों में टीमों को ले जाने वाले वाहनों पर विभाग खर्च कर चुका है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र खुले में शौच से मुक्त नहीं हो रहें। अनुमानित तौर पर देखा जाए तो पिछले एक साल में 1282 राजस्व गांवों में से विभाग सिर्फ 251 राजस्व गांव ही ओडीएफ करा सका है, ऐसे में लक्ष्य के मुताबिक जिला कैसे ओडीएफ होगा इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
300 गांव का लक्ष्य भी पूरा नहीं कर सका पंचायत विभाग
निर्मल भारत और स्वच्छ भारत अभियान के तहत जिले में शौचालयों की स्थिति बड़ी दयनीय है। जिले में 721 ग्राम पंचायतें और 1282 राजस्व गांव हैं। फिर भी लगभग एक लाख 56 हजार परिवार शौचालय विहीन हैं। सरकार की मंशा के विपरीत गांवों को जल्द ओडीएफ कर सकें इसके लिए सीडीओ डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने पंचायत विभाग को दिसंबर तक 300 गांवों को ओडीएफ करने का लक्ष्य दिया था, पंचायत विभाग इस लक्ष्य को भी पूरा नहीं कर सका है। दिसंबर तक लगभग 251 गांव ही ओडीएफ हो सकें। जबकि विभाग की ओर से लगातार गांव में टीमें भेजी जा रही हैं।
लोगों में जागरूकता की कमी
खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए पंचायत विभाग की ओर से 50 से अधिक टीमें गांव-गांव जाकर ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए मेहनत कर रही हैं, लेकिन धरातल पर ये प्रयास नाकाफी साबित हो रहा है। जागरूकता की कमी के कारण ग्रामीणों को खुले में शौच जाने का सिलसिला बरकरार है। जिले के हालात यह हैं कि प्रशासन के लाख प्रयास के बावजूद जिले के आधी से ज्यादा ग्राम पंचायतें और राजस्व गांव शौच से मुक्त नहीं हो सके हैं। अधिकारियों की लापरवाही कहें या ग्रामीणों में जागरूकता की कमी जिसके चलते खुले में शौच पर पूर्णता प्रतिबंध नहीं लग पा रहा।
ओडीएफ को लेकर पंचायत विभाग लगातार गांवों की मानीटरिंग कर रहा हैं। जिन गांव में शौचालय नहीं बने हैं, वहां टीमें भेजकर ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा हैं। जल्द ही लक्ष्य भी पूरा करने का प्रयास जारी है।
प्रमोद कुमार यादव , डीपीआरओ