सिर्फ नाम की पाठशाला: दिन में गोशाला, रात में मधुशाला, शिक्षक बोले- रोजाना पड़ी मिलतीं हैं बोतलें
प्रधानाध्यापक का कहना है कि इस बारे में ग्राम प्रधान को अवगत दिया गया है, लेकिन ग्राम प्रधान का तर्क है कि बाउंड्री का निर्माण प्रस्तावित है, लेकिन बजट न मिलने के कारण अभी यह कार्य लटका पड़ा है।
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शहर से सटे गांव ललपुरिया साहब सिंह में एक ऐसी पाठशाला है, जो दिन में गोशाला बनी रहती है और रात में मधुशाला बन जाती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं गांव के प्राथमिक विद्यालय की। इसके एक हिस्से की बाउंड्रीवॉल टूटी हुई है। इस कारण स्कूल परिसर सुबह से मवेशियों का चारागाह बन जाता है और रात होते ही लोग यहां मदिरापान करते हैं। प्रधानाध्यापक का कहना है कि इस बारे में ग्राम प्रधान को अवगत दिया गया है, लेकिन ग्राम प्रधान का तर्क है कि बाउंड्री का निर्माण प्रस्तावित है, लेकिन बजट न मिलने के कारण अभी यह कार्य लटका पड़ा है।
परिसर में पड़ी रहती हैं बोतलें
यह विद्यालय शराबियों का अड्डा बन गया है। बाउंड्री न होने के कारण रात होते ही विद्यालय में पहुंचकर असामाजिक तत्व यहां शराब पीने लगते हैं। शिक्षकों की मानें तो रोजाना यहां शराब की बोतलें पड़ी मिलती हैं, जिन्हें रोज हटवाया जाता है।
बजट का हवाला देकर रोका बाउंड्री का निर्माण
शिक्षकों के मुताबिक तो बाउंड्री के निर्माण के लिए प्रधान से कहा गया, पत्राचार भी किया गया। जून माह में बजट भी जारी हो गया, लेकिन प्रधान 30 फीसदी बजट ही मिलने का हवाला देकर काम शुरू नहीं करवा रहे हैं। समस्या जस की तस बनी हुई है। परिसर क्षेत्र में उगी घास को भी साफ नहीं कराया जा रहा है।
बाउंड्री न होने से विद्यालय असुरक्षित है। मवेशी परेशान करते हैं। कई बार चोरी भी हो चुकी है। बाउंड्री के निर्माण के लिए ग्राम प्रधान को अवगत कराया गया है। -सोनाली, प्रधानाध्यापक
बाउंड्री के निर्माण का प्रस्ताव कार्ययोजना में शामिल है। बजट जारी न होने से कार्य नहीं कराया जा सका है। -गंगाराम, प्रधान