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मां कोरोना संक्रमित होगी तो बाल कल्याण समिति संभालेगी दुधमुंहों को
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पीलीभीत। कोई महिला सर्दी, जुकाम और बुखार से पीड़ित है ...या यूं कहें कि उसमें कोरोना संक्रमण जैसे लक्षण नजर आ रहे हैं तो चिकित्सकों ने क्व़ारंटीन रहते हुए लंबे उपचार की सलाह दी है। मगर, गोद में दुधमुंहा बच्चा है और उसकी देखभाल करने वाला परिवार में कोई दूसरा नहीं है तो अब बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) उन बच्चों की देखभाल करेगी।
राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. शुचिता चतुर्वेदी ने इस बारे में निर्देश जारी किए हैं। उसमें कहा गया है कि अगर कोरोना संक्रमित कोई महिला जिलाधिकारी के माध्यम से मांग करती है कि कोरोना इलाज के दौरान बच्चे की देखभाल की व्यवस्था की जाए। उसके परिवार में ऐसा कोई नहीं है, जो उसके बच्चे की देखभाल कर सके। महिला की इस मांग पर जिलाधिकारी बाल कल्याण समिति को इस बारे में आदेश दे सकते हैं। इसके बाद बाल कल्याण समिति बच्चे की समुचित देखभाल के लिए उसे शिशु गृह या किसी सामाजिक संस्था को सौंप सकती है।
तीन साल तक बच्चा जाएगा सेंटर
बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष जीनत जहां ने बताया कि अगर कोई महिला कोरोना संक्रमित है। वह महिला मदद मांगती है, तो उसके तीन साल उम्र तक के बच्चे की देखभाल बाल कल्याण समिति कर सकती है। उसे बाल कल्याण सेंटर भेजा जाएगा, जो शाहजहांपुर और लखीमपुर में है। तीन साल से 10 साल तक के बच्चों के लिए खुला आश्रय गृह मौजूद है। उसमें बच्चे दिन भर रखे जाते हैं। शाम को उन्हें घर भेज दिया जाता है।
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राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. शुचिता चतुर्वेदी ने इस बारे में निर्देश जारी किए हैं। उसमें कहा गया है कि अगर कोरोना संक्रमित कोई महिला जिलाधिकारी के माध्यम से मांग करती है कि कोरोना इलाज के दौरान बच्चे की देखभाल की व्यवस्था की जाए। उसके परिवार में ऐसा कोई नहीं है, जो उसके बच्चे की देखभाल कर सके। महिला की इस मांग पर जिलाधिकारी बाल कल्याण समिति को इस बारे में आदेश दे सकते हैं। इसके बाद बाल कल्याण समिति बच्चे की समुचित देखभाल के लिए उसे शिशु गृह या किसी सामाजिक संस्था को सौंप सकती है।
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तीन साल तक बच्चा जाएगा सेंटर
बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष जीनत जहां ने बताया कि अगर कोई महिला कोरोना संक्रमित है। वह महिला मदद मांगती है, तो उसके तीन साल उम्र तक के बच्चे की देखभाल बाल कल्याण समिति कर सकती है। उसे बाल कल्याण सेंटर भेजा जाएगा, जो शाहजहांपुर और लखीमपुर में है। तीन साल से 10 साल तक के बच्चों के लिए खुला आश्रय गृह मौजूद है। उसमें बच्चे दिन भर रखे जाते हैं। शाम को उन्हें घर भेज दिया जाता है।
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