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भड़के डॉक्टरों ने किया प्रदर्शन, देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

Sun, 03 Apr 2022 01:01 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 03 Apr 2022 01:01 AM IST
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Furious doctors protested, warned of nationwide agitation
पीलीभीत। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने गुरुवार प्रदर्शन कर दौसा (राजस्थान) की घटना पर आक्रोश जताया। सभी ने एक स्वर में डॉ. अर्चना शर्मा को आत्महत्या के लिए मजबूर करने वालों को सजा देने की मांग बुलंद की। चेतावनी भी दी कि अगर न्याय नहीं मिला तो देशव्यापी आंदोलन में पीलीभीत की बड़ी भागीदारी रहेगी।
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारी और अध्यक्ष डॉ. पीयूष अग्रवाल के नेतृत्व में कलक्ट्रेट पहुंचे। आईएमए के सचिव डॉ. रोहित सिंह के अलावा डॉ. पीडी सिंह, डॉ. सौरभ अग्रवाल, डॉ. नीरज गुप्ता. डॉ. भरत कंचन, डॉ. राकेश गुप्ता, डॉ शोभित सेठ, डॉ. नीलम अग्रवाल, डॉ. सतीश गंगवार, डॉ. विपिन साहनी, डॉ. भगवान दास, डॉ. एसके मित्रा, डॉ. उपेंद्र नाथ मिश्र, डॉ. रश्मि प्रकाश आदि थे।
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आईएमए के अध्यक्ष ने बताया कि उनकी ओर से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर अजेंद्र सिंह को सौंपा गया। इसी घटना को लेकर पीलीभीत नर्सिंग होम एसोसिएशन के सदस्यों और पदाधिकारियों ने डॉ. भारत सेठी के नेतृत्व में पुलिस अधीक्षक से भेंट की। डॉ. भारत अग्रवाल ने कहा कि दौसा की घटना से सभी डॉक्टर दुखी हैं।
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जैकब मैथ्यू बनाम स्टेट ऑफ पंजाब में दी गई सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन किया जाए। किसी डॉक्टर के खिलाफ तब तक रिपोर्ट दर्ज न की जाए, जब तक विधिक रूप से उसका परीक्षण न हो जाए। अगर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुरूप राजस्थान सरकार और वहां के प्रशासन ने काम किया होता तो डॉ. अर्चना शर्मा आत्महत्या के लिए मजबूर नहीं होतीं।
- डॉ. पीयूष अग्रवाल, अध्यक्ष आईएमए
डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग होने से कई बार मरीजों की मौत हो जाती है। इसमें डॉक्टर का क्या कुसूर। दौसा में बिना किसी जांच के डॉक्टर अर्चना शर्मा पर आरोप लगाते हुए 302 का मुकदमा दर्ज कर दिया गया। जब डॉ. अर्चना को न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या के लिए मजबूर हो गईं। सभी डॉक्टर उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर करने वालों के लिए सजा चाहते हैं।
- डॉ. भारत सेठी, अध्यक्ष, पीलीभीत नर्सिंग एसोसिएशन
यह हैं प्रमुख मांग
सरकार सुरक्षा का माहौल दे। आईएमए के साथ संवाद करते हुए डॉक्टरों की समस्याओं का समाधान करे, ताकि इस तरह की घटनाएं आगे न होने पाएं।
डॉक्टरों के सवाल
1. डॉक्टरों के विरुद्ध किसी भी आरोप पर अपराध दर्ज करने से पहले सुप्रीम कोर्ट की ओर से 2005 में जैकब मैथ्यू बनाम स्टेट ऑफ पंजाब में दिए गए फैसले की गाइडल लाइन पर अमल क्यों नहीं किया गया।

2. कोई डॉक्टर मरीज की जान बचाने के लिए काम करता है। फिर बिना किसी जांच पड़ताल के सिर्फ आरोप लगने पर खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने का औचित्य क्या है।
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