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Pilibhit News: जेब गर्म हुई... फिर भी बच्चों को गर्म कपड़े नसीब नहीं
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प्राथमिक विद्यालय सैदपुर में बगैर स्वेटर पहने कक्षा में बैठे बच्चे। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। ठंड शुरू हो गई है, लोगों ने गर्म कपड़े पहनना शुरू कर दिए हैं। निजी स्कूलों में बच्चे स्वेटर, कोट, पैरों में गर्म मौजे और जूते पहनकर जा रहे हैं लेकिन सरकारी स्कूलों में अब भी सैकड़ों बच्चे बगैर स्वेटर और जूते-मोजे के ही स्कूल पहुंच रहे हैं। इनमें अधिकतर बच्चे ऐसे हैं, जिनके अभिभावकों को सरकार ने यूनिफार्म खरीदने के लिए राशि दी पर उन्होंने इसे दूसरे कामों पर खर्च कर दी। बृहस्पतिवार को प्राइमरी विद्यालय सैदपुर, पिपरिया अगरू, दियूनीकेसरपुर का हाल देखा, इन विद्यालयों में 20 प्रतिशत बच्चे बगैर स्वेटर और जूते-मोजे के मिले।
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12:55 बजे, प्राइमरी विद्यालय सैदपुर
विद्यालय में कुल 143 बच्चे पंजीकृत हैं, मौके पर उपस्थिति सिर्फ 70 की थी। कक्षाओं में बच्चे फर्श पर बिछी दरी पर बैठकर पढ़ रहे थे। कुछ बच्चे बिना स्वेटर के थे। कक्षा एक की छात्रा अनुष्का, सृष्टि और गौरी यूनिफार्म नहीं पहने थीं। पूछने पर बताया कि एक ही जोड़ी यूनिफार्म है, आज धुलने डाल दी थी इसलिए पहनकर नहीं आ सके। कक्षा चार का छात्र विजय भी बगैर यूनिफार्म पढ़ता मिला। बच्चों की कम संख्या पर प्रधानाचार्य प्रीति सिंह का कहना है कि गुरुतेग बहादुर शहीदी दिवस पर बृहस्पतिवार को अवकाश था, जिसे सरकार ने 28 नवंबर का कर दिया। अधिकतर बच्चे अवकाश समझकर नहीं आए। उन्होंने बताया विद्यालय के 143 में से 112 बच्चों के लिए आई राशि डीबीटी के माध्यम से उनके अभिभावकों के खातों में भेज दी गई है।
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दिन में 1:13 बजे- प्राथमिक विद्यालय पिपरिया अगरु
टनकपुर हाईवे पर स्थित प्राथमिक विद्यालय पिपरिया अगरु में दोपहर में भी बच्चे ठंड में ठिठुर रहे थे। कक्षा के बाहर बिछी दरी पर बैठकर पढ़ाई हो रही थी। कक्षाओं के बाहर चप्पलों को देखकर पता चल रहा था कि अधिकतर बच्चे जूते-मोजे पहनकर नहीं आए हैं। कक्षाओं में अधिकतर बच्चे यूनिफार्म में तो थे लेकिन स्वेटर नहीं पहने थे। प्रधानाचार्य सैदा का कहना है कि स्कूल में 199 पंजीकृत बच्चों में 39 उपस्थित हैं। सभी बच्चों के अभिभावकों के खातों में राशि जा चुकी है। करीब बीस अभिभावकों ने यूनिफार्म नहीं बनवाई है, उन्हें बुलाकर समझाया गया है।
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1:55 बजे- प्राथमिक विद्यालय दियूनी केसरपुर
प्राइमरी विद्यालय दियूनी केसरपुर में कुछ बच्चे परिसर में बाहर बिछी दरी पर बैठकर पढ़ाई करते मिले। प्रधानाचार्य दीपिका मित्तल स्कूल के काम से मुख्यालय गईं थीं। कक्षा एक में दो और कक्षा चार में एक बच्चा बिना यूनिफार्म के मिला। स्कूल में 103 बच्चे पंजीकृत हैं। डीबीटी के माध्यम से करीब 80 बच्चों का पैसा पहुंच उनके अभिभावकों के खाते में पहुंच गया है। सिर्फ 23 बच्चों के अभिभावकों के खाते में पैसा नहीं पहुंचा है। बावजूद इसके खातों में पैसा पहुंचने के बाद भी कई अभिभावकों ने यूनिफार्म और जूते नहीं खरीदे हैं। बच्चे चप्पलों में ही स्कूल आ रहे हैं। दीपिका ने बताया कि उनके पास अभिभावकों को बुलाकर समझाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। अभिभावक बच्चों के हिस्से की राशि दूसरे कामों में खर्च कर दे रहे हैं।
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2.27 लाख में सिर्फ 11 हजार बच्चों के अभिभावकों के खातों में नहीं पहुंची रकम
जनपद में बेसिक स्कूलों में 2.27 लाख बच्चे पंजीकृत हैं। बीएसए अमित कुमार सिंह ने बताया कि वर्तमान में 11 हजार बच्चों के अभिभावकों के खातों में राशि पहुंचना शेष हैं। जिनके खातों में पैसा पहुंच गया है। ऐसे अभिभावकों को बच्चों की यूनिफॉर्म, स्वेटर और जूतों को खरीदवाने के लिए लगातार विभागीय स्तर से प्रयास किए जा रहे हैं। शिक्षकों को भी जरूरी निर्देश दिए गए हैं।
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12:55 बजे, प्राइमरी विद्यालय सैदपुर
विद्यालय में कुल 143 बच्चे पंजीकृत हैं, मौके पर उपस्थिति सिर्फ 70 की थी। कक्षाओं में बच्चे फर्श पर बिछी दरी पर बैठकर पढ़ रहे थे। कुछ बच्चे बिना स्वेटर के थे। कक्षा एक की छात्रा अनुष्का, सृष्टि और गौरी यूनिफार्म नहीं पहने थीं। पूछने पर बताया कि एक ही जोड़ी यूनिफार्म है, आज धुलने डाल दी थी इसलिए पहनकर नहीं आ सके। कक्षा चार का छात्र विजय भी बगैर यूनिफार्म पढ़ता मिला। बच्चों की कम संख्या पर प्रधानाचार्य प्रीति सिंह का कहना है कि गुरुतेग बहादुर शहीदी दिवस पर बृहस्पतिवार को अवकाश था, जिसे सरकार ने 28 नवंबर का कर दिया। अधिकतर बच्चे अवकाश समझकर नहीं आए। उन्होंने बताया विद्यालय के 143 में से 112 बच्चों के लिए आई राशि डीबीटी के माध्यम से उनके अभिभावकों के खातों में भेज दी गई है।
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दिन में 1:13 बजे- प्राथमिक विद्यालय पिपरिया अगरु
टनकपुर हाईवे पर स्थित प्राथमिक विद्यालय पिपरिया अगरु में दोपहर में भी बच्चे ठंड में ठिठुर रहे थे। कक्षा के बाहर बिछी दरी पर बैठकर पढ़ाई हो रही थी। कक्षाओं के बाहर चप्पलों को देखकर पता चल रहा था कि अधिकतर बच्चे जूते-मोजे पहनकर नहीं आए हैं। कक्षाओं में अधिकतर बच्चे यूनिफार्म में तो थे लेकिन स्वेटर नहीं पहने थे। प्रधानाचार्य सैदा का कहना है कि स्कूल में 199 पंजीकृत बच्चों में 39 उपस्थित हैं। सभी बच्चों के अभिभावकों के खातों में राशि जा चुकी है। करीब बीस अभिभावकों ने यूनिफार्म नहीं बनवाई है, उन्हें बुलाकर समझाया गया है।
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1:55 बजे- प्राथमिक विद्यालय दियूनी केसरपुर
प्राइमरी विद्यालय दियूनी केसरपुर में कुछ बच्चे परिसर में बाहर बिछी दरी पर बैठकर पढ़ाई करते मिले। प्रधानाचार्य दीपिका मित्तल स्कूल के काम से मुख्यालय गईं थीं। कक्षा एक में दो और कक्षा चार में एक बच्चा बिना यूनिफार्म के मिला। स्कूल में 103 बच्चे पंजीकृत हैं। डीबीटी के माध्यम से करीब 80 बच्चों का पैसा पहुंच उनके अभिभावकों के खाते में पहुंच गया है। सिर्फ 23 बच्चों के अभिभावकों के खाते में पैसा नहीं पहुंचा है। बावजूद इसके खातों में पैसा पहुंचने के बाद भी कई अभिभावकों ने यूनिफार्म और जूते नहीं खरीदे हैं। बच्चे चप्पलों में ही स्कूल आ रहे हैं। दीपिका ने बताया कि उनके पास अभिभावकों को बुलाकर समझाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। अभिभावक बच्चों के हिस्से की राशि दूसरे कामों में खर्च कर दे रहे हैं।
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2.27 लाख में सिर्फ 11 हजार बच्चों के अभिभावकों के खातों में नहीं पहुंची रकम
जनपद में बेसिक स्कूलों में 2.27 लाख बच्चे पंजीकृत हैं। बीएसए अमित कुमार सिंह ने बताया कि वर्तमान में 11 हजार बच्चों के अभिभावकों के खातों में राशि पहुंचना शेष हैं। जिनके खातों में पैसा पहुंच गया है। ऐसे अभिभावकों को बच्चों की यूनिफॉर्म, स्वेटर और जूतों को खरीदवाने के लिए लगातार विभागीय स्तर से प्रयास किए जा रहे हैं। शिक्षकों को भी जरूरी निर्देश दिए गए हैं।