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Pilibhit News: झाड़-फूंक के भरोसे न रहें, कुत्ते के काटने पर तुरंत इलाज कराएं

Sat, 05 Sep 2026 01:26 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 05 Sep 2026 01:26 AM IST
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Do not rely on faith healing or traditional rituals; seek immediate medical treatment if bitten by a dog.
बीसलपुर के गांव श्यामपुर में रोती बिलखती मृतक के घर की महिलाएंसंवाद
बीसलपुर। कुत्ते के काटने के बाद समय पर उपचार नहीं कराना जानलेवा साबित हो सकता है। श्यामपुर गांव के 12 वर्षीय आदित्य की मौत के बाद यह मामला एक बार फिर लोगों के लिए चेतावनी बनकर सामने आया है।
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परिजनों के मुताबिक, कुत्ते के काटने के बाद छात्र का चिकित्सकीय उपचार कराने के बजाय झाड़-फूंक कराई जाती रही। उसे एंटी रेबीज टीका (एआरवी) भी नहीं लगवाया गया। करीब तीन माह बाद अचानक तबीयत बिगड़ने पर उसकी मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि कुत्ते या किसी अन्य संदिग्ध जानवर के काटने अथवा खरोंचने पर किसी तरह की देरी किए बिना स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। संवाद
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रेबीज के मामले में लापरवाही का कोई विकल्प नहीं
चिकित्सकों के अनुसार, रेबीज एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है। इसके संक्रमण से बचाव के लिए जानवर के काटने के बाद तत्काल प्राथमिक उपचार और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार पोस्ट-एक्सपोजर उपचार शुरू कराना जरूरी है। कुत्ते के काटने के बाद यह मान लेना कि घाव छोटा है या जानवर बाद में मर गया है। इलाज टालने का आधार नहीं हो सकता। समय पर उपचार मिलने पर संक्रमण से बचाव किया जा सकता है।
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चिकित्सकों का कहना है कि कुत्ता पालतू हो, छुट्टा मवेशी की तरह गांव में घूमने वाला जानवर नहीं बल्कि कोई भी संदिग्ध पशु हो, काटने या खरोंचने की स्थिति में उपचार जरूरी है।
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कुत्ते के काटने के बाद 15 मिनट तक धोना जरूरी
कुत्ते के काटने या खरोंचने के बाद सबसे पहला काम घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना है। इससे घाव में मौजूद संक्रमण के खतरे को कम करने में मदद मिलती है। घाव धोने के बाद चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आयोडीन युक्त एंटीसेप्टिक लगाया जा सकता है। इसके बाद घायल व्यक्ति को जल्द से जल्द अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ले जाना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई लोग कुत्ते के काटने के बाद घाव पर मिर्च, चूना, मिट्टी, तेल अथवा अन्य घरेलू पदार्थ लगाने लगते हैं। चिकित्सकों के मुताबिक ऐसा करना नुकसानदायक हो सकता है।

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एंटी रेबीज टीका लगवाना बेहद जरूरी
कुत्ते के काटने के बाद चिकित्सक जानवर के संपर्क और घाव की स्थिति का आकलन कर रेबीज से बचाव के लिए टीकाकरण की सलाह देते हैं। त्वचा के पार गहरे काटने अथवा गंभीर संपर्क के मामलों में वैक्सीन के साथ रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन की भी जरूरत पड़ सकती है। इसलिए कुत्ते के काटने के बाद अपने स्तर से उपचार तय करने के बजाय चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है। सीएचसी बीसलपुर के अधीक्षक डॉ. आलमगीर ने बताया कि कुत्ते के काटने पर झाड़-फूंक के बजाय तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना चाहिए। यह अंधविश्वास है और इससे उपचार में देरी हो सकती है।
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