{"_id":"5efa349c8ebc3e42d83488d4","slug":"disease-terror-pilibhit-news-bly411014773","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना के साथ ही बढ़ा डेंगू और मलेरिया बुखार फैलने का खतरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना के साथ ही बढ़ा डेंगू और मलेरिया बुखार फैलने का खतरा
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पीलीभीत। मानसून की शुरुआत के साथ ही कोरोना महामारी के कहर के बीच अन्य मौसमी बीमारियां फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मरीजों के बीच मानसूनी बारिश में डेंगू, मलेरिया बुखार और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से एक साथ लड़ना स्वास्थ्य विभाग के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि उसने कोरोना के साथ ही डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से निपटने की तैयारी कर ली है। इन बीमारियों पर समय रहते नियंत्रण पा लिया जाएगा।
पिछले चार माह से जनपद ही नहीं, पूरा देश कोरोना महामारी की जंग लड़ रहा है। अब तक पीलीभीत में 132 कोरोना संक्रमित केस मिल चुके हैं। इधर, अब बरसात का मौसम भी शुरू हो चुका है। हर साल बरसात का मौसम स्वास्थ्य विभाग के लिए चिकनगुनिया, डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियां लेकर आता है। मगर, इस बार कोरोना से लड़ाई पहले ही चल रही है। इसलिए, इस बार स्वास्थ्य विभाग के सामने दोहरी चुनौती है। पहली कोरोना से निपटने की, दूसरी मौसमी बीमारियों से निपटने की। बरसात के मौसम में कोरोना के अलावा अन्य मच्छर जनित बीमारियों जैसे डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया से निपटना आसान नहीं होगा। पिछले साल डेंगू से 36 लोगों की मौत हो गई थी। यह अलग बात है कि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में डेंगू से मौत का आंकड़ा शून्य दर्ज है क्योंकि पिछले साल स्वास्थ्य विभाग डेंगू पर काबू पाने के बजाय उससे हुई मौतों को नकारने में जुटा रहा था।
पिछले साल डेंगू-मलेरिया बुखार ने बरपाया था कहर
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल डेंगू के 81 केस पाए गए थे। मगर, इससे एक भी मौत नहीं हुई थी। जबकि जनपद में 36 मौतें डेंगू से होने की बात निकली थी। इनमें कई मरीज निजी अस्पतालों में भर्ती थे तो कुछ की घर पर ही मौत हुई थी। अकेले काला मंदिर मोहल्ले में एक साथ 10 से अधिक लोगों की जान गई थी। फजीहत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने घर-घर जाकर डेंगू के मच्छरों के लार्वा की खोजबीन भी की थी। कई घरों में लार्वा भी पाया गया था। वहीं, दूसरी ओर पिछले वर्ष मलेरिया के भी 668 केस पाए गए थे। पिछले साल हालांकि चिकनगुनिया का एक भी केस सामने नहीं आया था। मगर, इससे तीन साल पहले चिकनगुनिया केस भी पाए गए थे। इधर, मानसूनी बारिश शुरू होते ही अब एक बार फिर इन बीमारियों के पैर पसारने का खतरा है। सवाल यह है कि जब देश में कोरोना नहीं था तो तब स्वास्थ्य विभाग डेंगू की रोकथाम में नाकाम रहा, इधर जब एक तरफ कोरोना महामारी तेजी से बढ़ रही है तो ऐसे में स्वास्थ्य विभाग डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से एक साथ कैसे निपट पाएगा।
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एक जुलाई से चलेगा संचारी रोग नियंत्रण अभियान
कोरोना महामारी के बीच स्वास्थ्य विभाग को इन मौसमी बीमारियों की भी चिंता सताने लगी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मौसमी बीमारियों से लड़ने के लिए वह पूरी तरह तैयार हैं। नोडल अधिकारी (संक्रामक रोग) डॉ. अश्वनी गुप्ता ने बताया कि डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की रोकथाम की तैयारी शुरू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग ने कोविड-19 के इस दौर में लोगों को मौसमी बीमारियों से सचेत रहने के लिए अभी से अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग एक जुलाई से संचारी रोग नियंत्रण अभियान शुरू करने जा रहा है। इसमें पंचायत, शिक्षा, पशु पालन, बाल पुष्टाहार समेत दस विभागों का सहयोग लिया जाएगा। इसके अलावा प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र पर हेल्प डेस्क स्थापित की गई है।
डेंगू, मलेरिया और चिकुगुनिया के लक्षणों में ये हैं अंतर
डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया में लापरवाही जान जोखिम में डालने जैसा है। नोडल अधिकारी डॉ. अश्वनी गुप्ता ने बताया कि डेंगू में बुखार के साथ हाथ-पैर, सिर और आंखों के पीछे दर्द होता है। इसके साथ ही मरीज को भूख कम लगती है। ठंड के साथ बुखार काफी तेज आता है। प्लेटलेट्स कम होने की वजह से मरीज को कमजोरी भी लगती है। चिकनगुनिया के लक्षण भी डेंगू से मिलते जुलते हैं, मगर इसमें प्लेटलेट्स काउंट कम नहीं होते हैं। तेज बुखार के साथ जोड़ों में दर्द चिकनगुनिया का सामान्य लक्षण है। मलेरिया होने पर मरीज को सर्दी लगने लगती है और शरीर थर-थर कांपने लगता है। इस बीमारी से घबराहट और बेचैनी होने लगती है। इन बीमारियों का उपचार तुरंत जरूरी है। लापरवाही कभी भी भारी पड़ सकती है।
कोरोना के साथ मौसमी बीमारियों की रोकथाम को लेकर योजना तैयार की जा चुकी है। एक जुलाई से संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया जाएगा। इसमें 10 अन्य विभागों का भी सहयोग लिया जाएगा। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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पिछले चार माह से जनपद ही नहीं, पूरा देश कोरोना महामारी की जंग लड़ रहा है। अब तक पीलीभीत में 132 कोरोना संक्रमित केस मिल चुके हैं। इधर, अब बरसात का मौसम भी शुरू हो चुका है। हर साल बरसात का मौसम स्वास्थ्य विभाग के लिए चिकनगुनिया, डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियां लेकर आता है। मगर, इस बार कोरोना से लड़ाई पहले ही चल रही है। इसलिए, इस बार स्वास्थ्य विभाग के सामने दोहरी चुनौती है। पहली कोरोना से निपटने की, दूसरी मौसमी बीमारियों से निपटने की। बरसात के मौसम में कोरोना के अलावा अन्य मच्छर जनित बीमारियों जैसे डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया से निपटना आसान नहीं होगा। पिछले साल डेंगू से 36 लोगों की मौत हो गई थी। यह अलग बात है कि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में डेंगू से मौत का आंकड़ा शून्य दर्ज है क्योंकि पिछले साल स्वास्थ्य विभाग डेंगू पर काबू पाने के बजाय उससे हुई मौतों को नकारने में जुटा रहा था।
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पिछले साल डेंगू-मलेरिया बुखार ने बरपाया था कहर
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल डेंगू के 81 केस पाए गए थे। मगर, इससे एक भी मौत नहीं हुई थी। जबकि जनपद में 36 मौतें डेंगू से होने की बात निकली थी। इनमें कई मरीज निजी अस्पतालों में भर्ती थे तो कुछ की घर पर ही मौत हुई थी। अकेले काला मंदिर मोहल्ले में एक साथ 10 से अधिक लोगों की जान गई थी। फजीहत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने घर-घर जाकर डेंगू के मच्छरों के लार्वा की खोजबीन भी की थी। कई घरों में लार्वा भी पाया गया था। वहीं, दूसरी ओर पिछले वर्ष मलेरिया के भी 668 केस पाए गए थे। पिछले साल हालांकि चिकनगुनिया का एक भी केस सामने नहीं आया था। मगर, इससे तीन साल पहले चिकनगुनिया केस भी पाए गए थे। इधर, मानसूनी बारिश शुरू होते ही अब एक बार फिर इन बीमारियों के पैर पसारने का खतरा है। सवाल यह है कि जब देश में कोरोना नहीं था तो तब स्वास्थ्य विभाग डेंगू की रोकथाम में नाकाम रहा, इधर जब एक तरफ कोरोना महामारी तेजी से बढ़ रही है तो ऐसे में स्वास्थ्य विभाग डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से एक साथ कैसे निपट पाएगा।
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एक जुलाई से चलेगा संचारी रोग नियंत्रण अभियान
कोरोना महामारी के बीच स्वास्थ्य विभाग को इन मौसमी बीमारियों की भी चिंता सताने लगी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मौसमी बीमारियों से लड़ने के लिए वह पूरी तरह तैयार हैं। नोडल अधिकारी (संक्रामक रोग) डॉ. अश्वनी गुप्ता ने बताया कि डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की रोकथाम की तैयारी शुरू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग ने कोविड-19 के इस दौर में लोगों को मौसमी बीमारियों से सचेत रहने के लिए अभी से अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग एक जुलाई से संचारी रोग नियंत्रण अभियान शुरू करने जा रहा है। इसमें पंचायत, शिक्षा, पशु पालन, बाल पुष्टाहार समेत दस विभागों का सहयोग लिया जाएगा। इसके अलावा प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र पर हेल्प डेस्क स्थापित की गई है।
डेंगू, मलेरिया और चिकुगुनिया के लक्षणों में ये हैं अंतर
डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया में लापरवाही जान जोखिम में डालने जैसा है। नोडल अधिकारी डॉ. अश्वनी गुप्ता ने बताया कि डेंगू में बुखार के साथ हाथ-पैर, सिर और आंखों के पीछे दर्द होता है। इसके साथ ही मरीज को भूख कम लगती है। ठंड के साथ बुखार काफी तेज आता है। प्लेटलेट्स कम होने की वजह से मरीज को कमजोरी भी लगती है। चिकनगुनिया के लक्षण भी डेंगू से मिलते जुलते हैं, मगर इसमें प्लेटलेट्स काउंट कम नहीं होते हैं। तेज बुखार के साथ जोड़ों में दर्द चिकनगुनिया का सामान्य लक्षण है। मलेरिया होने पर मरीज को सर्दी लगने लगती है और शरीर थर-थर कांपने लगता है। इस बीमारी से घबराहट और बेचैनी होने लगती है। इन बीमारियों का उपचार तुरंत जरूरी है। लापरवाही कभी भी भारी पड़ सकती है।
कोरोना के साथ मौसमी बीमारियों की रोकथाम को लेकर योजना तैयार की जा चुकी है। एक जुलाई से संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया जाएगा। इसमें 10 अन्य विभागों का भी सहयोग लिया जाएगा। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ