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कहीं दाल में पानी तो कहीं पानी में दाल
पीलीभीत।
Updated Tue, 25 Jul 2017 07:14 PM IST
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कहीं दाल में पानी तो कहीं पानी में दाल
- फोटो : कहीं दाल में पानी तो कहीं पानी में दाल
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मिड डे मील का हाल
परिषदीय स्कूलों में बच्चों को गुणवत्ता परक शिक्षा के साथ शुद्ध मध्याह्न भोजन खिलाने की योजना चलाई जा रही है। जिले में इन योजनाओं पर हर माह लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जिम्मेदारों की हीला हवाली के चलते इन योजनाओं का लाभ नौनिहालों तक नहीं पहुंच पा रहा है। अमर उजाला टीम ने मंगलवार को जिले के परिषदीय स्कूलों में मध्याह्न भोजन की असलियत जानने को लाइव कवरेज की तो कहीं मेन्यू के मुताबिक बनी दाल में पानी ही पानी नजर आया तो कहीं मेन्यू के विपरीत ही मिड डे मील बना पाया गया। खास बात यह रही कि मंगलवार को मेन्यू के अनुसार सब्जीयुक्त दाल व चावल बनना थे, लेकिन किसी भी स्कूल में मेन्यू के अनुसार भोजन बनता नहीं मिला।
92 बच्चों के लिए महज दो किलो दाल
प्रा. वि. सैदपुर/समय: 10.40 बजे
टनकपुर हाईवे से सटे प्राथमिक विद्यालय सैदपुर में स्कूल के बाहर आंगन में मध्याह्न भोजन खाते मिले। स्कूल में मौजूद शिक्षिका मंजरी सक्सेना ने बताया कि मंगलवार को पंजीकृत 108 बच्चों के सापेक्ष 92 बच्चे आए। रसोइया लीलावती ने बताया कि बच्चों के लिए छह किलो चावल व दो किलो अरहर की दाल बनाई गई है।
जानकारी देने से कतराया स्टाफ
प्रा.वि. पिपरिया अगरू/समय:11.00 बजे
प्राथमिक विद्यालय पिपरिया अगरू में जब टीम पहुंची तो यहां बच्चे खाना खाकर हैंडपंप पर पानी पीने के लिए खड़े दिखे। मौजूद स्टाफ से जब जानकारी की गई तो वह जानकारी देने से कतराते दिखे। प्रधानाध्यापिका सय्यदा के स्कूल में होने की जानकारी दी गई जबकि उन्होंने कॉल कर खुद बताया कि वह संकुल भमौरा में पुस्तकें लेने गई हुई हैं।
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बच्चों की संख्या का ही पता नहीं
उ.प्रा. वि. दिलावरपुर/11.10
पूरनपुर ब्लाक के उच्च प्राथमिक विद्यालय में बच्चों की बिना संख्या जाने ही मिड डे मील तैयार होता मिला। शिक्षक राजीव कुमार से जब इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने बच्चों की संख्या की जानकारी न होने की बात कही। रसोइया गंगादेवी ने बताया कि बच्चों के लिए दाल व चावल बनाया जा रहा है। जबकि मेन्यू में सब्जीयुक्त दाल व चावल बनाया जाना था।
नौनिहालों की सेहत से खिलवाड़
प्रा.वि. गिधौर/समय: 9.42 बजे
प्राथमिक विद्यालय गिधौर में मंगलवार को मेन्यू के अनुसार भोजन बनता नहीं मिला। खास बात यह रही कि यहां प्रधानाध्यापिका मालती गौतम के मुताबिक 97 बच्चों के लिए मात्र दो किलोग्राम दाल बनाई गई। ऐसे में बर्तन में बनी दाल देखकर अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा था कि दाल में पानी हैं या पानी में दाल।
दाल की जगह बना दी आलू-तुरई
प्रा.वि. व उ.प्रा.वि. तकिया हुलकरी/समय: 10.20 बजे
प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय तकिया हुलकारी एक ही कैंपस में हैं। दोनों विद्यालयों का मिड डे मील संयुक्त रूप से बनाया जाता है। प्रधानाध्यापक अफसार अहमद व रजनी सक्सेना ने बताया कि मंगलवार को 86 बच्चे उपस्थित हुए। यहां मेन्यू के विपरीत दाल की जगह आलू तुरई की सब्जी व चावल बच्चों को खाने के लिए दिए गए।
नौनिहालों के सेहत से ही हो रहा खिलवाड़
प्रा.वि. पुन्नापुर/समय: 9.45 बजे
बरखेड़ा ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय पुन्नापुर में भी कमोवेश अन्य स्कूलों की तरह ही स्थिति पाई गई। यहां 35 बच्चों के लिए दाल व चावल बनाया गया। यहां बच्चों के स्वास्थ्य को नजरदांज कर लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाया जा रहा था। प्रधानाध्यापक अताउल्ला मुस्तफा ने बताया कि दो साल पहले गैस सिलेंडर चोरी हो गया था। तबसे लकड़ी के चूल्हे पर ही खाना बन रहा है।
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परिषदीय स्कूलों में बच्चों को गुणवत्ता परक शिक्षा के साथ शुद्ध मध्याह्न भोजन खिलाने की योजना चलाई जा रही है। जिले में इन योजनाओं पर हर माह लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जिम्मेदारों की हीला हवाली के चलते इन योजनाओं का लाभ नौनिहालों तक नहीं पहुंच पा रहा है। अमर उजाला टीम ने मंगलवार को जिले के परिषदीय स्कूलों में मध्याह्न भोजन की असलियत जानने को लाइव कवरेज की तो कहीं मेन्यू के मुताबिक बनी दाल में पानी ही पानी नजर आया तो कहीं मेन्यू के विपरीत ही मिड डे मील बना पाया गया। खास बात यह रही कि मंगलवार को मेन्यू के अनुसार सब्जीयुक्त दाल व चावल बनना थे, लेकिन किसी भी स्कूल में मेन्यू के अनुसार भोजन बनता नहीं मिला।
92 बच्चों के लिए महज दो किलो दाल
प्रा. वि. सैदपुर/समय: 10.40 बजे
टनकपुर हाईवे से सटे प्राथमिक विद्यालय सैदपुर में स्कूल के बाहर आंगन में मध्याह्न भोजन खाते मिले। स्कूल में मौजूद शिक्षिका मंजरी सक्सेना ने बताया कि मंगलवार को पंजीकृत 108 बच्चों के सापेक्ष 92 बच्चे आए। रसोइया लीलावती ने बताया कि बच्चों के लिए छह किलो चावल व दो किलो अरहर की दाल बनाई गई है।
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जानकारी देने से कतराया स्टाफ
प्रा.वि. पिपरिया अगरू/समय:11.00 बजे
प्राथमिक विद्यालय पिपरिया अगरू में जब टीम पहुंची तो यहां बच्चे खाना खाकर हैंडपंप पर पानी पीने के लिए खड़े दिखे। मौजूद स्टाफ से जब जानकारी की गई तो वह जानकारी देने से कतराते दिखे। प्रधानाध्यापिका सय्यदा के स्कूल में होने की जानकारी दी गई जबकि उन्होंने कॉल कर खुद बताया कि वह संकुल भमौरा में पुस्तकें लेने गई हुई हैं।
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बच्चों की संख्या का ही पता नहीं
उ.प्रा. वि. दिलावरपुर/11.10
पूरनपुर ब्लाक के उच्च प्राथमिक विद्यालय में बच्चों की बिना संख्या जाने ही मिड डे मील तैयार होता मिला। शिक्षक राजीव कुमार से जब इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने बच्चों की संख्या की जानकारी न होने की बात कही। रसोइया गंगादेवी ने बताया कि बच्चों के लिए दाल व चावल बनाया जा रहा है। जबकि मेन्यू में सब्जीयुक्त दाल व चावल बनाया जाना था।
नौनिहालों की सेहत से खिलवाड़
प्रा.वि. गिधौर/समय: 9.42 बजे
प्राथमिक विद्यालय गिधौर में मंगलवार को मेन्यू के अनुसार भोजन बनता नहीं मिला। खास बात यह रही कि यहां प्रधानाध्यापिका मालती गौतम के मुताबिक 97 बच्चों के लिए मात्र दो किलोग्राम दाल बनाई गई। ऐसे में बर्तन में बनी दाल देखकर अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा था कि दाल में पानी हैं या पानी में दाल।
दाल की जगह बना दी आलू-तुरई
प्रा.वि. व उ.प्रा.वि. तकिया हुलकरी/समय: 10.20 बजे
प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय तकिया हुलकारी एक ही कैंपस में हैं। दोनों विद्यालयों का मिड डे मील संयुक्त रूप से बनाया जाता है। प्रधानाध्यापक अफसार अहमद व रजनी सक्सेना ने बताया कि मंगलवार को 86 बच्चे उपस्थित हुए। यहां मेन्यू के विपरीत दाल की जगह आलू तुरई की सब्जी व चावल बच्चों को खाने के लिए दिए गए।
नौनिहालों के सेहत से ही हो रहा खिलवाड़
प्रा.वि. पुन्नापुर/समय: 9.45 बजे
बरखेड़ा ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय पुन्नापुर में भी कमोवेश अन्य स्कूलों की तरह ही स्थिति पाई गई। यहां 35 बच्चों के लिए दाल व चावल बनाया गया। यहां बच्चों के स्वास्थ्य को नजरदांज कर लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाया जा रहा था। प्रधानाध्यापक अताउल्ला मुस्तफा ने बताया कि दो साल पहले गैस सिलेंडर चोरी हो गया था। तबसे लकड़ी के चूल्हे पर ही खाना बन रहा है।