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Pilibhit News: बाघों के दीदार की होड़ में खतरा, जंगल मार्ग पर टूट रहे नियम

Wed, 29 Apr 2026 12:22 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 29 Apr 2026 12:22 AM IST
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Danger in the race to see tigers, rules being broken on the forest route
लालपुल के निकट झाड़ियों में बैठे बाघ के पास खड़ा ट्रक। स्रोत सोशलमीडिया - फोटो : टूंडला के राजा का ताल में जन आक्रोश रैली निकालते भाजपाइ्र संगठन
पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में बाघों की बढ़ती संख्या संरक्षण की बड़ी सफलता है, लेकिन यही सफलता अब इंसानी लापरवाही से खतरे में घिरती दिख रही है। पूरनपुर-खटीमा जंगल मार्ग पर शावकों के साथ बाघिन और अन्य बाघ लगातार नजर आ रहे हैं, फिर भी लोग रोमांच के लालच में सुरक्षा नियमों को दरकिनार कर उसके बेहद करीब पहुंच रहे हैं। सोमवार की घटना ने नियमों की धज्जियां उड़ा दी। इससे वन्यजीव प्रेमी और फोटोग्राफर ने चिंता जताई। इससे आमजन के लिए खतरे के साथ ही बाघों के स्वाभाविक व्यवहार को भी प्रभावित करना बताया।
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) आज देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाघ संरक्षण के एक सफल मॉडल के रूप में उभरा है। यहां का संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र, पर्याप्त जल स्रोत और भोजन की उपलब्धता बाघों के लिए आदर्श वातावरण तैयार करती है। यही वजह है कि यहां बाघों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है और रिजर्व को कई प्रतिष्ठित सम्मान भी प्राप्त हुए हैं। बढ़ती बाघ संख्या के साथ पर्यटन भी तेजी से बढ़ा है। सैलानी जंगल में बाघों के दीदार के लिए दूर-दूर से पहुंच रहे हैं। वहीं, जंगल मार्ग पर बाघों की मौजूदगी का आकर्षण अब चुनौती में बदलता जा रहा है।
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पीटीआर से गुजरने वाले प्रमुख मार्ग माधोटांडा-पीलीभीत, पूरनपुर-खटीमा और असम हाईवे पर वैसे तो विभाग नियमों का पालन कराने पर जोर दे रहा है, लेकिन पूरनपुर-खटीमा मार्ग पर बाघों की बढ़ती सक्रियता के बीच नियमों की अनदेखी साफ दिखाई दे रही है। पूरनपुर-खटीमा मार्ग के महोफ रेंज क्षेत्र में मुस्तफाबाद से लालपुल तक अक्सर बाघों की मौजूदगी बनी रहती है। खासकर एक बाघिन अपने दो शावकों के साथ इस क्षेत्र में सक्रिय है, जो इसे बेहद संवेदनशील बनाता है। इसके बावजूद, बाघ दिखते ही सड़क पर जैसे रोमांच की भीड़ उमड़ पड़ती है।
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नियमों की अनदेखी से बढ़ीं चिंताएं
सोमवार दोपहर सड़क किनारे बैठे बाघ को देखने के लिए नियमों की अनदेखी ने चिंताएं बढ़ा दी। वाहनों की लंबी कतार लग गई। हर कोई पास से देखने की हौड़ में दिखा। ट्रक चालक ने बाघ के पास जाकर तेज हॉर्न बजाया तो कार सवार तेज आवाज में संगीत सुनने और बाइक चालक भी बिना किसी डर या जिम्मेदारी के उसी मार्ग पर चलते रहे। इस पूरी घटना को चंडीगढ़ के एक वन्यजीव फोटोग्राफर ने देख कैद किया। संवाद
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विभाग ने गंभीरता नहीं बरती तो बढ़ जाएगी चुनौती
वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि जंगल क्षेत्र में बाघों की असमय कहीं भी मौजूदगी हो सकती है। जंगल मार्ग भी इसमें शामिल हैं। ऐसे में लोगों को स्वयं जागरूक होने की जरूरत है। बाघ समेत वन्यजीवों की मौजूदगी देख जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। शोर शराबा, हॉर्न आदि बिल्कुल नहीं बजाने चाहिए और वन्यजीव के जंगल मार्ग से हटने पर वहां से गुजरना चाहिए। नकारात्मक गतिविधियां बाघों के स्वभाव पर बुरा असर डालती हैं। वहीं, इसपर विभाग को भी गंभीरता होने की जरूरत है। क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने के साथ ही कैमरे आदि लगाकर वाहनोंं पर नजर बढ़ाने पर जोर देना चाहिए। नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई भी अमल में लानी होगी
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रोमांच नहीं, जिम्मेदारी जरूरी: आहूजा
चंडीगढ़ के वन्यजीव फोटोग्राफर हरमीत आहूजा ने पूरनपुर-खटीमा मार्ग पर देखी गई स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया है। उनका कहना है कि पीटीआर प्रशासन बाघ समेत वन्यजीवों के संरक्षण में बेहतर प्रयास कर रहा है, लेकिन आमजन को भी जागरूक होने की जरूरत है। आहूजा के मुताबिक इस तरह का व्यवधान बाघ के व्यवहार पर नकारात्मक असर डाल सकता है और उसे अधिक आक्रामक बना सकता है। उन्होंने वन विभाग से मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

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जंगल मार्ग पर टीम की नियमित ड्यूटी लगाई जा रही है। वाहनों की गति नियंत्रण पर जोर दिया जाता है। सोमवार को सूचना मिलने पर टीम मौके पर पहुंची थी। वाहन सवार यात्रियों को हिदायत देकर वहां से हटाया गया। क्षेत्र में लगातार गंभीरता बरती जा रही है। - सहेंद्र यादव, रेंजर महोफ

लालपुल के निकट झाड़ियों में बैठे बाघ के पास खड़ा ट्रक। स्रोत सोशलमीडिया

लालपुल के निकट झाड़ियों में बैठे बाघ के पास खड़ा ट्रक। स्रोत सोशलमीडिया- फोटो : टूंडला के राजा का ताल में जन आक्रोश रैली निकालते भाजपाइ्र संगठन

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