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पीलीभीत में कभी आसान नहीं रही साइकिल की राह

Wed, 09 Feb 2022 01:00 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 09 Feb 2022 01:00 AM IST
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Cycle path has never been easier in Pilibhit
पीलीभीत। पिछले विधानसभा चुुनाव में भाजपा के सामने करारी हार झेलने के बाद सपा इस बार मजबूती से चुनावी रण में खड़ी है। जिले में भी सपा कांटे की टक्कर देती दिख रही है, लेकिन जिले में कभी भी सपा की राह आसान नहीं रही। 1992 में गठन के बाद सपा तीन बार सूबे की गद्दी पर बैठ चुकी हैं, लेकिन जिले की चारों सीटें एक साथ उसकी झोली में कभी नहीं गईं। बीसलपुर सीट हर बार उसके लिए लोहे के चने चबाने जैसा साबित हुई।
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1992 में गठन के बाद सपा 1993 के विधानसभा चुुनाव में उतरी और प्रदेश में सरकार बनाने में भी कामयाब रही। लेकिन पीलीभीत में पार्टी का खाता नहीं खुला। बीसलपुर सीट पर पार्टी ने प्रत्याशी ही नहीं उतारा। 1996 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने पीलीभीत और बीसलपुर में चुुनाव नहीं लड़ा। बरखेड़ा में पार्टी के प्रत्याशी सन्नू लाल को हार मिली, लेकिन पूरनपुर से गोपाल कृष्ण ने जीत दर्ज कर पार्टी का खाता खोल दिया। 2002 के चुनाव में सपा ने चारों सीटों पर प्रत्याशी उतारे। पीलीभीत सदर से पहली बार रियाज अहमद को टिकट दिया जो बाद में सदर सीट पर सपा के सबसे मजबूत प्रत्याशी बनकर उभरे और उन्होंने सदर सीट पर हार का सिलसिला तोड़ा। बरखेड़ा में पीतमराम ने भी जीत दर्ज की, लेकिन पार्टी एक बार फिर बीसलपुर पर हार गई। पूरनपुर में जीत दर्ज करने वाले गोपाल कृष्ण को भी हार का मुंह देखना पड़ा। 2007 में मायावती की सोशल इंजीनियरिंग के सामने सपा नहीं टिक सकी। जिले में सदर सीट को छोड़कर बाकी तीनों सीटें हारनी पड़ी। उस वक्त बरखेड़ा से पीतमराम जो कि विधायक थे उनको भी हार मिली। बीसलपुर में जीत की उम्मीद से सत्यपाल को टिकट दिया, लेकिन नतीजा फिर पहले जैसा रहा और हार मिली।
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2012 के चुनाव में सपा ने वापसी की और बसपा को हराकर प्रदेश में पूर्ण बहुत से सरकार बनाई। इस बार पार्टी पीलीभीत सदर, पूरनपुर और बरखेड़ा में जीत हासिल करने में कामयाब रही, लेकिन बीसलपुर में पहुंचकर सपा की साइकिल ठहर गई। यहां पार्टी ने फिर नया उम्मीदवार संजीव कनौजिया को उतारा था, लेकिन वह भी हार का सिलसिला नहीं रोक पाए। पिछले चुनाव सपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन के साथ लड़ा। सदर, पूरनपुर और बरखेड़ा में प्रत्याशी उतारे, लेकिन पार्टी को जीती हुई इन तीनों सीटों को गवाना पड़ा। इस बार सपा ने पूरनपुर से पीतमराम की पुत्रवधु आरती महेंद्र, बीसलपुर से दिव्या गंगवार, बरखेड़ा से हेमराज वर्मा और सदर सीट पर डॉ. शैलेंद्र गंगवार को मैदान में उतारा है।
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वर्ष 1993
सीट प्रत्याशी हार/जीत
पीलीभीत - हारून अहमद - हार
बरखेड़ा - धमेंद्र कुमार - हार
पुरनपुर-विनोद कुमार - हार
बीसलपुर-----प्रत्याशी नहीं उतारा
1996
बरखेड़ा- सन्नू लाल- हार
पूरनपुर- गोपाल कृष्ण- जीत
नोट- पीलीभीत और बीसलपुर में प्रत्याशी नहीं उतारे
2002
पीलीभीत- रियाज अहमद-जीत
बरखेड़ा-पीतमराम-जीत
बीसलपुर-राम सरन वर्मा-हार
पुरनपुर- गोपाल कृष्ण-हार
2007
पीलीभीत- रियाज अहमद -जीत
बरखेड़ा- पीतमराम- हार
बीसलपुर-सत्यपाल- हार
पूरनपुर- कुंवर जीवेश प्रसाद- हार
2012
पीलीभीत- रियाज अहमद -जीत
पूरनपुर-पीतम राम -जीत
बरखेड़ा-हेमराज वर्मा-जीत
बीसलपुर- संजीव कनौजिया-हार
2017
पीलीभीत- रियाज अहमद- हार
पूरनपुर- पीतमराम - हार
बरखेड़ा-हेमराज वर्मा -हार
नोट-कांग्रेस के साथ गठबंधन कर बीसलपुर से अनीस अहमद खां का चुनाव लड़वाया।
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