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आखिर पिंजरे में कैद हो गया तेंदुआ
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,पीलीभीत
Updated Wed, 19 Sep 2018 06:48 PM IST
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सीमावर्ती इलाके में दो माह से आतंक का पर्याय बन चुका तेंदुआ आखिरकार कैद हो ही गया। सोमवार रात पिंजरे के बाहर बंधी बकरी को खाने के बाद एक्सपर्ट के निर्देशानुसार मंगलवार रात टीम ने बकरी को पिंजरे के अंदर बांध दिया। रात करीब तीन बजे पिंजरे में बंधी बकरी को खाने के लिए तेंदुआ जैसे ही आगे बढ़ा, पिंजरे में कैद हो गया। सूचना पर इलाके के ग्रामीण भारी संख्या में मौके पर पहुंच गए। तेंदुए को मुस्तफाबाद गेस्ट हाउस ले जाकर मेडिकल परीक्षण कराया गया। तेंदुए को छोड़ने को लेकर अधिकारी लखनऊ हेडक्वार्टर से संपर्क साधे हैं, लेकिन अभी कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है।
बराही रेंज के सीमावर्ती क्षेत्र बूंदीभूड़ व नौजल्हा समेत अन्य गांव में लंबे समय से तेंदुए की दहशत थी। उसे कैद करने को लेकर चार दिन पूर्व से काफी प्रयास किए जा रहे थे। अधिकारियों के निर्देश पर महाराजपुर व नौजल्हा से बूंदीभूड़ जाने वाले मार्ग पर दो पिंजरे लगाए गए थे। तेंदुए की सक्रियता की जांच करने को पिंजरे के पास कैमरे भी लगा दिए गए लेकिन सक्रियता के चलते तीन दिन से तेंदुआ टाइगर रिजर्व प्रशासन की हर रणनीति को फेल कर रहा था। तीन दिन से तेंदुआ रात को पिंजरे के समीप चहलकदमी कर बकरी को देखने के बाद वापस लौट रहा था। पिंजरे के समीप आकर वापस लौटने के बाद एक्सपर्ट के निर्देशानुसार बकरी को पिंजरे से बाहर बांध दिया गया। सोमवार रात तेंदुआ बाहर बंधी बकरी को निवाला बनाकर वहां से निकल गया। तेंदुए की सक्रियता के चलते एक्सपर्ट का मानना था कि बकरी खाने के बाद तेंदुआ पिंजरे के करीब दोबारा जरूर पहुंचेगा और बकरी पर हमला भी करेगा। इसके बाद मंगलवार को बकरी को पुन: पिंजरे के अंदर बांध दिया गया। टाइगर रिजर्व प्रशासन की यह रणनीति सफल हो गई। मंगलवार/बुधवार रात तीन बजे तेंदुआ पिंजरे में बंधी बकरी को खाने पहुंचा। जैसे ही वहां बंधी बकरी की ओर आगे बढ़ा पिंजरे में पहुंचते ही तेंदुआ कैद हो गया। अभियान में लगी टीम करीब साढ़े पांच बजे पिंजरे के समीप पहुंची। जानकारी होते ही अधिकारियों को सूचित किया गया। अधिकारियों के निर्देश पर पिंजरे में कैद तेंदुए को मुस्तफाबाद लाया गया। वहां उसका मेडिकल परीक्षण किया गया। पिंजरे में कैद हुए इस नर तेंदुए की उम्र करीब ढाई साल बताई जा रही है। तेंदुए को छोड़ने को लेकर अधिकारी लखनऊ मुख्यालय संपर्क साध रहे हैं। डिप्टी डायरेक्टर आदर्श कुमार ने बताया कि मेडिकल परीक्षण तेंदुआ फिट पाया गया है। उसे कहां छोड़ा जाएगा यह फिलहाल तय नहीं हो सका है। मुख्यालय के अधिकारियों से लगातार संपर्क किया जा रहा है। निर्देश मिलने के बाद ही बता पाना संभव होगा। इस दौरान एसडीओ प्रवीण खरे, रेंजर चंद्रभाल, डब्ल्यूटीआई टीम में पीसी पांडेय, वायोलाजिस्ट डॉ. दक्ष गंगवार, डिप्टी रेंजर गिरीश कुमार समेत अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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बराही रेंज के सीमावर्ती क्षेत्र बूंदीभूड़ व नौजल्हा समेत अन्य गांव में लंबे समय से तेंदुए की दहशत थी। उसे कैद करने को लेकर चार दिन पूर्व से काफी प्रयास किए जा रहे थे। अधिकारियों के निर्देश पर महाराजपुर व नौजल्हा से बूंदीभूड़ जाने वाले मार्ग पर दो पिंजरे लगाए गए थे। तेंदुए की सक्रियता की जांच करने को पिंजरे के पास कैमरे भी लगा दिए गए लेकिन सक्रियता के चलते तीन दिन से तेंदुआ टाइगर रिजर्व प्रशासन की हर रणनीति को फेल कर रहा था। तीन दिन से तेंदुआ रात को पिंजरे के समीप चहलकदमी कर बकरी को देखने के बाद वापस लौट रहा था। पिंजरे के समीप आकर वापस लौटने के बाद एक्सपर्ट के निर्देशानुसार बकरी को पिंजरे से बाहर बांध दिया गया। सोमवार रात तेंदुआ बाहर बंधी बकरी को निवाला बनाकर वहां से निकल गया। तेंदुए की सक्रियता के चलते एक्सपर्ट का मानना था कि बकरी खाने के बाद तेंदुआ पिंजरे के करीब दोबारा जरूर पहुंचेगा और बकरी पर हमला भी करेगा। इसके बाद मंगलवार को बकरी को पुन: पिंजरे के अंदर बांध दिया गया। टाइगर रिजर्व प्रशासन की यह रणनीति सफल हो गई। मंगलवार/बुधवार रात तीन बजे तेंदुआ पिंजरे में बंधी बकरी को खाने पहुंचा। जैसे ही वहां बंधी बकरी की ओर आगे बढ़ा पिंजरे में पहुंचते ही तेंदुआ कैद हो गया। अभियान में लगी टीम करीब साढ़े पांच बजे पिंजरे के समीप पहुंची। जानकारी होते ही अधिकारियों को सूचित किया गया। अधिकारियों के निर्देश पर पिंजरे में कैद तेंदुए को मुस्तफाबाद लाया गया। वहां उसका मेडिकल परीक्षण किया गया। पिंजरे में कैद हुए इस नर तेंदुए की उम्र करीब ढाई साल बताई जा रही है। तेंदुए को छोड़ने को लेकर अधिकारी लखनऊ मुख्यालय संपर्क साध रहे हैं। डिप्टी डायरेक्टर आदर्श कुमार ने बताया कि मेडिकल परीक्षण तेंदुआ फिट पाया गया है। उसे कहां छोड़ा जाएगा यह फिलहाल तय नहीं हो सका है। मुख्यालय के अधिकारियों से लगातार संपर्क किया जा रहा है। निर्देश मिलने के बाद ही बता पाना संभव होगा। इस दौरान एसडीओ प्रवीण खरे, रेंजर चंद्रभाल, डब्ल्यूटीआई टीम में पीसी पांडेय, वायोलाजिस्ट डॉ. दक्ष गंगवार, डिप्टी रेंजर गिरीश कुमार समेत अन्य सदस्य मौजूद रहे।
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