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फर्जी पासपोर्ट मामले में फरार अधिवक्ता गिरफ्तार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,पीलीभीत
Updated Fri, 05 Jan 2018 07:42 PM IST
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खुद को पूरनपुर क्षेत्र का निवासी बताकर फर्जी अभिलेखों की मदद से दो पासपोर्ट बनवाए जाने के मामले में चार महीने से फरार चल रहे अधिवक्ता नरेंद्र सिंह महल को तीन जनवरी की रात एक बजे गिरफ्तार कर लिया गया। कनाडा से वापसी करते ही आरोपी अधिवक्ता को दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर धर दबोचा गया। शुक्रवार को एसपी समेत कई अधिकारियों ने आरोपी से पूछताछ की। जिसके बाद उसका चालान कर दिया गया है। साल 2015 में सुरजीत सिंह और परमजीत सिंह नाम से दो युवकों के पासपोर्ट फर्जी अभिलेखों के आधार पर बनवाए गए थे। इसमें दोनों को पूरनपुर कोतवाली क्षेत्र का निवासी बताया गया। मामले की जांच पड़ताल करने के बाद दोनों पासपोर्ट फर्जी पाए गए थे। इस नाम का कोई युवक बताए गए पते पर रहता ही नहीं था। लापरवाही सामने आने पर सितंबर 2017 में खाकी को फजीहत से बचाने के लिए अफसरों ने सत्यापन करने वाले दोनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था। वहीं पूरे मामले के तार नाभा जेल ब्रेक कांड से जुड़े होने की बात भी सामने आती रही, लेकिन अफसर इसको लेकर खुलकर बयान देने से बचते रहे। 16 सितंबर 2017 को तत्कालीन कोतवाल जयवीर सिंह की तरफ से सुरजीत निवासी शेरपुर मकरंदपुर और परमजीत सिंह निवासी गनेशगंज (पूूरनपुर) के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की गई। इस मामले में सुरजीत की गिरफ्तारी हो गई, लेकिन परमजीत का आज तक कोई पता नहीं लग सका। उधर, विवेचक एसआई जितेंद्र सिंह यादव ने जांच के दौरान पासपोर्ट की डिलीवरी में अहम भूमिका निभाने के आरोप में शेरपुर मकरंदपुर निवासी अर्जुन सिंह को जेल भेज दिया था। परे प्रकरण में नगर के गनेशगंज निवासी अधिवक्ता नरेंद्र सिंह महल का नाम सबसे ऊपर था। आरोप था कि फर्जी अभिलेख के लिए सेटिंग और पासपोर्ट बनवाने में अधिवक्ता की मुख्य भूमिका रही। लेकिन आठ अगस्त 2017 से आरोपी अधिवक्ता कनाडा गया हुआ था, जिस कारण उसकी धरपकड़ अधर में रही। इधर पुलिस ने अधिवक्ता पर शिकंजा कसने के लिए उसका लुक आउट नोटिस निकलवा दिया। नतीजतन चार माह बाद बाद भारत में वापसी करते ही तीन जनवरी की रात एक बजे दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उसको आईबी और एलआईयू की टीम ने धर दबोचा। इसकी सूचना मिलने पर मुख्यालय से पुलिस की एक टीम विवेचक जितेंद्र सिंह यादव के नेतृत्व में भेजी गई और उसको पीलीभीत ले आई। यहां एसपी कलानिधि नैथानी, सीओ अनुराग दर्शन, इंटेलीजेंस ब्यूरो आदि के अधिकारियों ने उससे पूछताछ की। कोतवाल नरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि सितंबर माह में फर्जी पासपोर्ट मामले में अधिवक्ता की तलाश थी, उसका शुक्रवार को चालान कर दिया है।
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