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जसराना पुलिस ने पकड़ा भगोड़ा हत्याभियुक्त

Wed, 19 Aug 2015 11:21 PM IST
बिलसंडा/पीलीभीत
बिलसंडा/पीलीभीत Updated Wed, 19 Aug 2015 11:21 PM IST
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Htyabhiyukt fugitive caught
फिरोजाबाद में प्रधानी के चुनाव को लेकर हुई एक युवक की हत्या में नामजद
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एक हत्याभियुक्त को पुलिस ने सात वर्ष बाद नगर में दबिश देकर गिरफ्तार किया है। इस हत्याकांड में पकड़े गए अभियुक्त का एक सगा भाई अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर है।
फिरोजाबाद के जसराना के थानाध्यक्ष अजय यादव ने बताया कि सात वर्ष पूर्व प्रधानी के चुनाव को लेकर थाना क्षेत्र के ही युवक शशी का दिनदहाड़े मर्डर हुआ था। इसमें आठ लोग नामजद थे। छह हत्याभियुक्तों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन आरोपी अनिल कुमार और उसका सगा भाई प्रदीप फरार थे। घटना को अंजाम देने के बाद अनिल बिलसंडा में आकर बस गया था। पहले वह कुछ वर्षों तक नगर के मोहल्ला हाथीखाना में रहा और डेढ़ वर्ष से वह नगर के ही मोहल्ला घस्सूगंज में किराए के मकान पर रहता था। मुखबिर की सूचना पर मंगलवार की रात जसराना पुलिस ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से दबिश देकर भगोड़ा अनिल कुमार को गिरफ्तार कर साथ ले गए।
मोहल्ले के लोगों को घटना की जानकारी सुबह हुई तो सन्न रह गए। उधर पुलिस का  कहना है कि पकड़े गए भगोड़ा अनिल के पिता रामराज और उसका एक भाई अभी भी जेल में हैं। दूसरा भाई प्रदीप पुलिस की पकड़ से दूर है। उसकी तलाश में पुलिस अभी भी जुटी हुई है।
पुलिस का दीवान बता लोगों पर गांठता था रौब
बिलसंडा। भगोड़ा अनिल कुमार ने यहां खुद को पुलिस का दीवान बता रखा था। उसकी जिन लोगों से नजदीकियां थीं, उन्हें उसने एक मर्डर में फंस जाने की बात कहते हुए नौकरी से बर्खास्त होना भी बता रखी थी, लेकिन लोगों ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया। पर आज जब जसराना पुलिस पकड़कर ले गई और मामले का खुलासा हुआ तो वे लोग चकित रह गए जिन लोगों के साथ उसका रोज का उठना बैठना था।
उसने अपने दोनों बच्चे और पत्नी को जसराना के गांव रेहर में छोड़ रखा था और सैफई की रहने वाली कथा वाचक प्रीति को बतौर पत्नी बनाकर यहां साथ रखता था। एक पखवाड़ा पूर्व प्रीति ने नगर के इसी मोहल्ले में लोगों को कथा का रसपान भी कराया था। बताते हैं कि कथा वाचक प्रीति की कमाई से ही वह खर्च चलाता था। लोगों का यह भी कहना है कि उसके पास जो रिवाल्वर थी वह जेल में बंद उसके भाई के नाम थी और रायफल कथा वाचक प्रीति के नाम थी।
वह दोनों असलाहों को साथ लेकर घूमता था, लेकिन स्थानीय थाना पुलिस ने कभी भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। यही वजह रही कि वह भगोड़ा होने के बावजूद ऐश की जिंदगी जी रहा था। भगोड़ा अनिल गांव चांदपुर के कोटेदार पिंकू यादव के सानिध्य में जब आया तो सबसे पहले कथा का आयोजन चांदपुर में ही किया गया। जहां पर प्रीति ने खुद को साध्वी बताते हुए लोगों को कथा का रसपान कराया। बताते हैं कि यहीं से उसकी कथा वाचकी का धंधा चल निकला। इसके बाद उसने क्षेत्र के कई गांवों में भी कथा के कार्यक्रम किए।
उधर हत्थे चढ़ जाने के बाद अनिल को पुलिस रात मेें ही अपने साथ ले गई, जबकि प्रीति को कुछ लोगों ने बुधवार की सुबह घर से निकलते देखा था। वह देर सायं तक घर नहीं लौट सकी थी। वह कहां गई, इसका किसी को कुछ पता नहीं है।
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