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बिछड़ कर करवा चौथ पर एक हुए आशा और सुभाष
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Wed, 19 Oct 2016 11:11 PM IST
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करवा चौथ पर एक हुए आशा और सुभाष
- फोटो : पीलीभ्ाीत/उत्ततर प्रदेश्ा
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आओ प्यार के साथ करें शुरुआत, जिंदगी को नया मोड़ दें, तुम हमारी कसम तोड़ दो, हम तुम्हारी कसम तोड़ दें। ये पंक्तियां करवा चौथ के मौके पर परिवार परामर्श केंद्र में सुनवाई के दौरान खफा चल रहे सुभाष और आशा की सुलह पर सभी की जुबां पर रहीं। सुहागिनों के सबसे बड़े पर्व करवा चौथ पर एक बेहद खूबसूरत नजीर देखने को मिली। जहां महीनों से पारिवारिक कलह के चलते एक दूसरे से खफा होकर जुदा चल रहे सुभाष और आशा जब आमने-सामने हुए तो चंद लम्हों में ही दोनों के गिले शिकवे दूर हो गए। खास बात यह थी कि आशा आपसी झगड़े के बावजूद पति की दीर्घायु के लिए करवा चौथ का व्रत रखकर पहुंची। इधर सुुभाष भी पत्नी से मिलने को आतुर था। कुछ जज्बाती बातें की गईं तो दोनों पिघल गए और चंद मिनटों में ही एक नई शुरूआत को हंसते हुए हामी भर दी।
जहानाबाद थाना क्षेत्र के सैजना गांव निवासी सुभाष (19) की शादी दस मार्च 2016 को भूड़ा मगरासा की रहने वाली आशा से हुई थी। शादी के कुछ दिन तो सब ठीक चलता रहा, लेकिन बाद में दोनों की बीच पारिवारिक कलह ने दूरियां बढ़ा दीं। रिश्तों के बीच दरार हुई और दोनों अलग हो गए। शादी के मात्र तीन महीने बाद ही पत्नी मायके आकर रहने लगी। परिवारीजनों के प्रयास से भी सुलह न हुई, तो मामला परिवार परामर्श केंद्र पहुंच गया। जहां एक दूसरे को लेकर दोनों ने तमाम शिकायतें कीं। तीन बार काउंसलिंग पर आने पर भी कोई नतीजा न निकलने पर काउंसलर भी रिश्ते को बचाने के लिए सोंच में पड़ गए थे। बुधवार को करवा चौथ के दिन सुनवाई के लिए 47 जोड़े आए। इसमें नवदंपति सुभाष और आशा का भी मामला सुना जाना था। जैसी शिकायतें थीं और दोनों में एक दूसरे के प्रति गुस्सा भरा था। ऐसा लग ही नहीं रहा था कि यूं एक मिनट में मिलन हो ही जाएगा। अनबन के बीच वाद पुलिस तक पहुंच चुका था। एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाए जा रहे थे। इन सबके बाद भी आशा अपने कर्तव्य को नहीं भूूली। वह तमाम वाद-विवादों के बावजूद पति की दीर्घाय्रु की कामाना करते हुए करवा चौथ का व्रत रखकर पहुंची थी। अब इसे आशा के करवाचौथ व्रत की कृपा कहें, या संयोग कि चंद मिनटों में ही दोनों ने
एक दूसरे के संग जिंदगी फिर से शुरु करने का फैसला कर लिया। काउंसलर मंसूर अहमद शमसी, एचसीपी ब्रहमा देवी, उर्मिला देवी, प्रीति के पूछने पर दोनों ने साथ रहने के लिए हामी भरी और सुलहनामा पर हस्ताक्षर कर दिए। उनकी आंखों में दुबारा मिलने की खुशी भी साफ झलकती दिखाई दी। एचसीपी ब्रह्मादेवी ने बताया कि कुल 47 मामलों को सुनवाई के लिए बुलाया गया था। सिर्फ आशा ही एक व्रत रखकर आई थी। दोनों के बीच सुलह हो गई है।
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फोटो देख कर खोलूंगी व्रत
वैसे तो दोनों के बीच सुलह हो गई, लेकिन घर आशा अपनी ससुराल दीपावली पर्व के बाद जाएगी। उसने कहा कि पति अगर उसके घर आकर व्रत खुलवाएगा, तो ठीक। वरना उसकी फोटो को देख कर चांद की पूजा कर अपना पत्नी होने का धर्म निभाएंगी। ये उसकी पहली करवा चौथ है, जिसको पूरे विधि -विधान से पूरा करेगी। इधर पति सुभाष का कहना है कि वह सब कुछ भुलाकर एक नई जिंदगी की शुरुआत करेगा। जब आशा कहेगी, उसको ससुराल लाने के लिए पहुंचेगा।
निगाहों में कर लिया गलती का अहसास
करीब सात से आठ मिनट एक साथ बैठे सुभाष और आशा ने चंद सेकेंड के लिए ही सही लेकिन एक दूसरे की निगाहों में देखा। होठों पर मुस्कान और पुरानी बातों को भुला बैठे। एक दूसरे की निगाहों में देखते वक्त ऐसा लगा मानों दोनों निगाहों ही निगाहों में अपनी अपनी गलतियों का अहसास कर रहे हो और अपनी इच्छा को जाहिर कर दिया। सभागार कक्ष से बाहर निकलने के बाद भी दोनों में काफी देर बातचीत होती रही। इसके अलावा तीन अन्य मामलों में भी सुलह हुई।
जेल में दस महिला बंदियों ने रखा व्रत
इधर जेल की चाहर दीवारी में भी करवा चौथ की रौनक रही। जेल में बंद दस महिला बंदी रीनादेवी, रिंकीदेवी, पुष्पादेवी, बेलादेवी, सियारानी, ललिता, सुशीला, विमला, शशि, सोनी ने पति की दीघार्यु के लिए व्रत रखा। जेल प्रशासन की ओर से पर्व को लेकर पुख्ता व्यवस्था की गई। महिलाओं को व्रत और पूजन सामग्री मुहैया कराई गई। लेकिन पूजन के दौरान उनके पति सामने नहीं होंगे। हालांकि इनमें से कुछ के पति की जेल प्रशासन की ओर से थोड़ी देर के लिए बुधवार मुलाकात भी कराई गई।
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जहानाबाद थाना क्षेत्र के सैजना गांव निवासी सुभाष (19) की शादी दस मार्च 2016 को भूड़ा मगरासा की रहने वाली आशा से हुई थी। शादी के कुछ दिन तो सब ठीक चलता रहा, लेकिन बाद में दोनों की बीच पारिवारिक कलह ने दूरियां बढ़ा दीं। रिश्तों के बीच दरार हुई और दोनों अलग हो गए। शादी के मात्र तीन महीने बाद ही पत्नी मायके आकर रहने लगी। परिवारीजनों के प्रयास से भी सुलह न हुई, तो मामला परिवार परामर्श केंद्र पहुंच गया। जहां एक दूसरे को लेकर दोनों ने तमाम शिकायतें कीं। तीन बार काउंसलिंग पर आने पर भी कोई नतीजा न निकलने पर काउंसलर भी रिश्ते को बचाने के लिए सोंच में पड़ गए थे। बुधवार को करवा चौथ के दिन सुनवाई के लिए 47 जोड़े आए। इसमें नवदंपति सुभाष और आशा का भी मामला सुना जाना था। जैसी शिकायतें थीं और दोनों में एक दूसरे के प्रति गुस्सा भरा था। ऐसा लग ही नहीं रहा था कि यूं एक मिनट में मिलन हो ही जाएगा। अनबन के बीच वाद पुलिस तक पहुंच चुका था। एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाए जा रहे थे। इन सबके बाद भी आशा अपने कर्तव्य को नहीं भूूली। वह तमाम वाद-विवादों के बावजूद पति की दीर्घाय्रु की कामाना करते हुए करवा चौथ का व्रत रखकर पहुंची थी। अब इसे आशा के करवाचौथ व्रत की कृपा कहें, या संयोग कि चंद मिनटों में ही दोनों ने
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एक दूसरे के संग जिंदगी फिर से शुरु करने का फैसला कर लिया। काउंसलर मंसूर अहमद शमसी, एचसीपी ब्रहमा देवी, उर्मिला देवी, प्रीति के पूछने पर दोनों ने साथ रहने के लिए हामी भरी और सुलहनामा पर हस्ताक्षर कर दिए। उनकी आंखों में दुबारा मिलने की खुशी भी साफ झलकती दिखाई दी। एचसीपी ब्रह्मादेवी ने बताया कि कुल 47 मामलों को सुनवाई के लिए बुलाया गया था। सिर्फ आशा ही एक व्रत रखकर आई थी। दोनों के बीच सुलह हो गई है।
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फोटो देख कर खोलूंगी व्रत
वैसे तो दोनों के बीच सुलह हो गई, लेकिन घर आशा अपनी ससुराल दीपावली पर्व के बाद जाएगी। उसने कहा कि पति अगर उसके घर आकर व्रत खुलवाएगा, तो ठीक। वरना उसकी फोटो को देख कर चांद की पूजा कर अपना पत्नी होने का धर्म निभाएंगी। ये उसकी पहली करवा चौथ है, जिसको पूरे विधि -विधान से पूरा करेगी। इधर पति सुभाष का कहना है कि वह सब कुछ भुलाकर एक नई जिंदगी की शुरुआत करेगा। जब आशा कहेगी, उसको ससुराल लाने के लिए पहुंचेगा।
निगाहों में कर लिया गलती का अहसास
करीब सात से आठ मिनट एक साथ बैठे सुभाष और आशा ने चंद सेकेंड के लिए ही सही लेकिन एक दूसरे की निगाहों में देखा। होठों पर मुस्कान और पुरानी बातों को भुला बैठे। एक दूसरे की निगाहों में देखते वक्त ऐसा लगा मानों दोनों निगाहों ही निगाहों में अपनी अपनी गलतियों का अहसास कर रहे हो और अपनी इच्छा को जाहिर कर दिया। सभागार कक्ष से बाहर निकलने के बाद भी दोनों में काफी देर बातचीत होती रही। इसके अलावा तीन अन्य मामलों में भी सुलह हुई।
जेल में दस महिला बंदियों ने रखा व्रत
इधर जेल की चाहर दीवारी में भी करवा चौथ की रौनक रही। जेल में बंद दस महिला बंदी रीनादेवी, रिंकीदेवी, पुष्पादेवी, बेलादेवी, सियारानी, ललिता, सुशीला, विमला, शशि, सोनी ने पति की दीघार्यु के लिए व्रत रखा। जेल प्रशासन की ओर से पर्व को लेकर पुख्ता व्यवस्था की गई। महिलाओं को व्रत और पूजन सामग्री मुहैया कराई गई। लेकिन पूजन के दौरान उनके पति सामने नहीं होंगे। हालांकि इनमें से कुछ के पति की जेल प्रशासन की ओर से थोड़ी देर के लिए बुधवार मुलाकात भी कराई गई।