{"_id":"5af335f7eda53a71a26dbd34af4efb85","slug":"bnjria-village-drowned-in-the-inundation-of-tears-hindi-news-1","type":"story","status":"publish","title_hn":"आंसुओं के सैलाब में डूब गया बंजरिया गांव ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
आंसुओं के सैलाब में डूब गया बंजरिया गांव
पूरनपुर/पीलीभीत।
Updated Tue, 14 Jul 2015 12:04 AM IST
विज्ञापन
अच्छी बारिश होने के बावजूद लोग अपने खेतों में धान की पौध लगाने नहीं गए।
विज्ञापन
मजदूरी पेशा वाले मजदूरी को नहीं गए। गांववासियों के चेहरे पर उदास खामोशी
नजर आ रही थी। पूरे गांव में मातमी सन्नाटा छाया रहा। बीच-बीच में महिलाओं
की चीत्कार इसे तोड़ रही थी। अधिकांश घरों में चूल्हे नहीं जले। यह हाल
रहा गांव बंजरिया का। ऐसा होता भी क्यों न। सोनीपत (हरियाणा) में एक हादसे
में मरे पांच युवकों में चार इसी गांव के थे। सोमवार को एसडीएम ज्ञानेंद्र
कुमार ने गांव पहुंचकर पीड़ित परिवारों का हाल जाना और उन्हें ढांढस
बंधाया।
क्षेत्र में रोजगार के साधन न होने से तहसील क्षेत्र के तमाम लोग अन्य शहरों में काम करने जाते हैं। इसमें से हरियाणा मजदूरी करने को जाने वालों की संख्या सर्वाधिक है। करीब तीन हजार आबादी और 17 सौ वोटर वाले गांव बंजरिया से तीस मई को गांव के 26 वर्षीय अमित, उसका छोटा भाई 18 वर्षीय देवसरन मिश्रा, 22 वर्षीय अशोक भारती, 22 वर्षीय रोहित वाल्मीकि, उसका छोटा भाई सूरज वाल्मीकि और अशोक भारती का सगा मौसा बरखेड़ा थाना के गांव भैसइया निवासी 30 वर्षीय धर्मपाल भारती रवाना हुए थे।
हरियाणा में खरखौदा के गांव निजामपुर में सभी मजदूरी पर धान की रोपाई कर रहे थे। रविवार को बारिश के चलते दोपहर को उक्त सभी लोग निजामपुर निवासी संदीप के खेतों में बने दो मंजिला कोठरे में बैठे थे। इस दौरान कोठरे का लिंटर ढहने से सभी छह मजदूर सहित सात लोग दब गए। हादसे में अमित, देवशरन, अशोक, रोहित, धर्मपाल सहित छह की मौके पर ही मौत हो गई थी। जबकि सूरज घायल हो गया था। रविवार शाम सूचना मिलते ही परिवार के लोग हरियाणा रवाना हो गए थे।
सोमवार को भी मृतकों के शव गांव नहीं पहुंच सके थे, लेकिन उनकी खबर पूरे गांव को मालूम हो चुकी थी। इलाके में कोहराम मच गया। घरों के चूल्हे दूसरे दिन भी नहीं जले। गांव के तीन स्थानों पर वृक्षों के नीचे बैठे लोग युवकों के स्वभाव आदि की चर्चा करने में जुटे थे। एसडीएम ज्ञानेंद्र कुमार ने राजस्व टीम के साथ गांव में पीड़ितों के घर पहुंचकर घटना और परिवार की स्थिति आदि की जानकारी ली और लोगों से दुख की घड़ी में हिम्मत से काम लेने को कहा।
क्षेत्र में रोजगार के साधन न होने से तहसील क्षेत्र के तमाम लोग अन्य शहरों में काम करने जाते हैं। इसमें से हरियाणा मजदूरी करने को जाने वालों की संख्या सर्वाधिक है। करीब तीन हजार आबादी और 17 सौ वोटर वाले गांव बंजरिया से तीस मई को गांव के 26 वर्षीय अमित, उसका छोटा भाई 18 वर्षीय देवसरन मिश्रा, 22 वर्षीय अशोक भारती, 22 वर्षीय रोहित वाल्मीकि, उसका छोटा भाई सूरज वाल्मीकि और अशोक भारती का सगा मौसा बरखेड़ा थाना के गांव भैसइया निवासी 30 वर्षीय धर्मपाल भारती रवाना हुए थे।
हरियाणा में खरखौदा के गांव निजामपुर में सभी मजदूरी पर धान की रोपाई कर रहे थे। रविवार को बारिश के चलते दोपहर को उक्त सभी लोग निजामपुर निवासी संदीप के खेतों में बने दो मंजिला कोठरे में बैठे थे। इस दौरान कोठरे का लिंटर ढहने से सभी छह मजदूर सहित सात लोग दब गए। हादसे में अमित, देवशरन, अशोक, रोहित, धर्मपाल सहित छह की मौके पर ही मौत हो गई थी। जबकि सूरज घायल हो गया था। रविवार शाम सूचना मिलते ही परिवार के लोग हरियाणा रवाना हो गए थे।
सोमवार को भी मृतकों के शव गांव नहीं पहुंच सके थे, लेकिन उनकी खबर पूरे गांव को मालूम हो चुकी थी। इलाके में कोहराम मच गया। घरों के चूल्हे दूसरे दिन भी नहीं जले। गांव के तीन स्थानों पर वृक्षों के नीचे बैठे लोग युवकों के स्वभाव आदि की चर्चा करने में जुटे थे। एसडीएम ज्ञानेंद्र कुमार ने राजस्व टीम के साथ गांव में पीड़ितों के घर पहुंचकर घटना और परिवार की स्थिति आदि की जानकारी ली और लोगों से दुख की घड़ी में हिम्मत से काम लेने को कहा।