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काश! समय से पहुंच जाती पुलिस

Mon, 04 May 2015 11:02 PM IST
ख्ाुटार
ख्ाुटार Updated Mon, 04 May 2015 11:02 PM IST
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Alas! By the time police reach
काश! पुलिस समय से पहुंच जाती तो
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हो सकता है कि हादसे में घायल किसी युवक की जान बच जाती, लेकिन पुलिस को तो हादसे की जानकारी ही मीडिया के जरिए सुबह साढ़े चार बजे लगी। इसके बाद पुलिस पांच बजे मौके पर पहुंची।

मृतक आकाश वर्मा के भाई अंकित वर्मा और विशाल वर्मा के भाई अमित भी बारात में जलालाबाद गए थे। दोनों दूसरी कार में थे। अंकित ने बताया कि उनकी कार आगे निकल गई। रात में एक बजे से पहले तक उनकी भाई से बात होती रही। वह अपनी लोकेशन बताते रहे, लेकिन एक बजे के बाद भाई का फोन बंद हो गया।

भाई के साथ कार में सवार दूसरे लोगों के फोन लगाए तो भी बात नहीं हो सकी। उन्होंने समझा कि कार में स्टीरियो पर गाने बज रहे होने के कारण फोन की घंटी सुनाई नहीं दे रही होगी, लेकिन कार सवार किसी भी व्यक्ति का फोन नहीं उठ पाने का मतलब था कि उस समय हादसा हो चुका था।

सुबह साढे़ चार बजे मीडिया के लोगों को जानकारी मिली। मौके पर पहुंचने पर पुलिस नहीं मिली तो मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। इस पर पांच बजे पुलिस मौके पर पहुंची और कार से शव निकाले गए। यदि रात में हाइवे पर गश्त करने वाली पुलिस सक्रिय होती तो हो सकता है हादसे में कार सवार लोगों में कोई घायल रहा होता और इलाज की व्यवस्था होने पर उसकी जान बच जाती।
तमाशबीनों ने नहीं की पुलिस की मदद
खुटार। सुबह होते ही हादसे की खबर इलाके में फैल गई। आसपास के कई गांवों के लोग मौके पर आ पहुंचे। पुलिस ने लोगों से कार से शव निकलवाने में मदद की अपील की, लेकिन किसी ने भी हाथ नहीं लगाया। पुलिस की मदद की अपील सुनकर लोग घटना स्थल से दूर खिसक लिए। बाद में पुलिस ने सभी को मौके से भगाया।
मामा ने समझाया था रात में मत आना
पुवायां। हादसे में जान गवंाने वाले आकाश वर्मा के मामा मोहित कुमार पुवायां के मोहल्ला कसभरा में रहते हैं। आकाश बारात में जाते समय कुछ देर के लिए पुवायां में मामा के घर आए थे। दोस्तों के साथ चाय नाश्ता कर वह बारात के लिए चले तो मोहित ने उनसे सुबह वापस आने को कहा था। मोहित के अनुसार जलालाबाद क्षेत्र ठीक नहीं होने और ज्यादा रात होने के कारण उन्होंने आकाश से कहा था कि सुबह घर लौटें। आकाश ने रात में ही वापसी की बात कही तो मोहित ने उन्हें पुवायां आकर रुक जाने को कहा, लेकिन आकाश मामा के घर नहीं रुके और खुटार में दुर्घटना में जान गंवा बैठे।
पिता की बात मान लेते सौरभ तो बच जाती सभी की जान
खुटार। सौरभ के पिता जगदीश लेखपाल हैं। वह कुछ समय से बीमार चल रहे हैं। सोमवार सुबह उन्हें दवा लेने लखनऊ जाना था। रविवार को सौरभ ने दोस्त आशीष की बारात में कार ले जाने की बात कही तो पिता ने मना करते हुए कहा कि सुबह दवा लेने जाना है, लेकिन सौरभ रात में ही वापस आ जाने की कहते हुए कार लेकर चले गए। परिवार के लोग लाडले के वापस आने का इंतजार कर रहे थे लेकिन सुबह उनकी मौत की खबर से परिवार में कोहराम मच गया। मां मुल्लो देवी रो-रोकर कह रही थीं कि सौरभ पिता की बात मानकर कार नहीं ले जाते तो उनकी और दोस्तों की जान बच जाती। मुल्लो देवी के करुण क्रंदन से मौके पर मौजूद तमाम लोगों की आंखें नम हो उठीं।
एक किमी दूर खाई में पड़ा मिला हेल्पर फट्टूस प्रसाद
खुटार। कंटेनर का हेल्पर फट्टूस प्रसाद यादव घटना स्थल से एक किमी दूर खाईं में घायल पड़ा मिला। शव थाने भिजवाने के बाद पुलिस वापस लौट रही थी तो एक युवक को लहूलुहान खाईं में पड़ा देखकर उसे अस्पताल भिजवाया। गंभीर घायल होने के कारण वह कुछ बोल नहीं पा रहा था। हाथ पर लिखे नाम से उसके बारे में जानकारी हुई। उसने इशारे से अपने हेल्पर होने की बात बताई। फट्टूस प्रसाद ने इशारे से बताया कि कंटेनर में तीन लोग थे और सभी गंभीर घायल हुए हैं। समझा जाता है कि हादसे के बाद भागते समय फट्टूस प्रसाद बेहोश होकर खाईं में गिर पड़ा तो बाकी लोग उसे छोड़कर भग निकले।
बिखर गए छह परिवारों के सपने
खुटार। कंटेनर-कार की टक्कर में छह युवाओं की मौत से उनके परिवार गहरे सदमें में हैं। मां-बाप के इन नौजवानों से तमाम सपने थे जो एक झटके में बिखर एए हैं। मृतकों के परिवार वाले अब तक इस अनहोनी पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं।

पूरनपुर के मोहल्ला साहूकारा निवासी प्रमोद वर्मा के दो पुत्र आकाश, अंकित और दो पुत्रियां सोनल और गुनगुन हैं। बड़े बेटे 22 वर्षीय आकाश बेहद मेहनती और लगनशील थे। वह सर्राफा व्यापार में पिता का हाथ बंटाते थे। प्रमोद जल्द से जल्द बेटे के सिर पर सेहरा देखना चाहते थे। दो मई को आकाश के लिए रिश्ता भी आया था।

लड़की वाले आकाश को पसंद भी कर गए थे, लेकिन सोमवार सुबह पुत्र की मौत की मनहूस खबर ने प्रमोद का बहू लाने का सपना चकानाचूर कर दिया। इसी मोहल्ले के रहने वाले और प्रमोद के खानदानी रामखिलावन को भी पुत्र विशाल से काफी उम्मीदें थी। विशाल बैंक में नौकरी करना चाहते थे। वह एमकॉम की पढ़ाई के साथ बैंक परीक्षा की तैयारी भी कर रहे थे। विशाल की मौत से मां विमला देवी, भाई अमित और शिवम बेहद गमगीन हैं।

कैलाश उर्फ पप्पू जेवर आदि बनाने का काम करते थे। उनके ऊपर पुत्र मनीष कुमार, अमन, अमितेष, अंकुर के पालन पोषण की जिम्मेदारी थी। उनकी मौत से पत्नी राजेश्वरी पर मानों पहाड़ ही टूट पड़ा है। दीपक भी जेवर बनाने का काम करते थे। उनकी मौत से पत्नी सुमन देवी, पुत्र 10 वर्षीय करन बेहद गमगीन हैं। पुत्री परी और पीहू को पिता की मौत की जानकारी नहीं दी गई है।

 जगदीश प्रसाद के पुत्र सौरभ ने इसी वर्ष इंटर की परीक्षा दी थी। उनकी मौत से पिता के अलावा मां मुल्लो देवी, भाई साहिल उर्फ हिमांशु, बहन कमलेश, मिलेश, पम्मी और रीना का रो रोकर बुरा हाल है। जीतू सर्राफा व्यापारी थे। उनकी मौत से पत्नी बबली बदहवास हैं। वह पांच वर्षीय इकलौती पुत्री शिवा को सीने से चिपकाए बैठी थीं।

उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा कि सात जन्मों तक साथ निभाने का वादा करने वाला उन्हें यूं बीच मंझधार में छोड़कर चला गया है। सभी परिवारों में मातमी माहौल है। लोग दुखी परिवारों को सांत्वना देने में जुटे हैं।
आशीष के घर छाया सन्नाटा
खुटार। सोमवार दोपहर तक आशीष की बारात जलालाबाद से वापस नहीं आई थी, लेकिन हादसे की सूचना घर और जलालाबाद पहुंच चुकी थी। आशीष के घर सन्नाटा पसरा हुआ है। यहां न तो ढोलक की थाप सुनाई दे रही है। और न महिलाओं की हंसी ठिठोली। आशीष की मां उषा देवी घर पर मिलीं। उन्होंने कहा कि उन्हें मृतक परिवारों से ज्यादा दुख पहुंचा है। जिंदगी भर का कलंक भी लग गया। सभी हमारे अपने हैं। मैं अपना दुख बयां नहीं कर सकती हूं। उन्होंने कहा कि रात में सभी को हाथ जोड़कर घर जाने से मना किया था, लेकिन होनी को कौन टाल सकता है।
परवरदिगार ऐसा दिन किसी को न दिखाए
परवरदिगार ऐसा दिन किसी को न दिखाए। पूरनपुर में इससे दुखद कभी कोई घटना नहीं हुई। दुख की घड़ी में सभी व्यापारी मृतक परिवारों के साथ हैं। हम लोग ऊपर वाले से प्रार्थना करते हैं कि परिवार के लोगों को दुख सहने की शक्ति प्रदान करे।
-मोहम्मद जाहिद खां अध्यक्ष व्यापार मंडल पूरनपुर
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मैंने सभी मृतकों के घर जाकर सांत्वना दी है। पूरे पूरनपुर के लिए आज बेहद दुख की घड़ी हैं। हम लोगों ने होनहार नौजवानों को खो दिया है। परिवार के लोगों को ईश्वर दुख सहने की शक्ति दे।
-अजय खंडेलवाल महामंत्री व्यापार मंडल पूरनपुर
सोमवार को दीपक की पुत्री का था जन्म दिन
खुटार। सोमवार को दीपक की पुत्री आठ वर्षीय परी का जन्म दिन था। रविवार को दीपक बारात जाने को तैयार हुए तो परी ने उन्हें बारात जाने से मना करते हुए बर्थ डे के लिए घर सजाने को कहा, लेकिन रात में लौट आने और सोमवार सुबह घर सजा कर धूमधाम से जन्म दिन मनाने का वायदा कर दीपक बारात में शामिल होने चले गए। सोमवार सुबह उनकी मौत की मनहूस खबर पत्नी सुमन को लगी तो वह बेसुध होकर गिर पड़ीं। जानकारी पाकर सुमन के मायके के लोग भी घर पहुंचे और परी को अपने साथ ले गए।
तो जल जाते शव
खुटार। कार के इंजन को देखकर लगता है कि हादसे के बाद इंजन में आग लग गई थी। गनीमत रही कि आग खुद ही बुझ गई। यदि आग पेट्रोल टैंक तक पहुंच जाती तो कार मृतकों की चिता बन जाती।
ट्रक में जमकर लूटपाट, दीपक की चेन-अंगूठी गायब
खुटार। हादसे की जानकारी पाकर पुलिस मौके पर पहुंची। तमाम ऐसे लोग मौके पर मौजूद थे जिनकी निगाहें मृतकों की जेबों जमी हुई थीं। पुलिस ने भी बेहद लापरवाही बरती और शव निकलवाने के बाद कार और ट्रक की सुरक्षा के लिए किसी को नहीं छोड़कर मौके से चली गई। इसके बाद भीड़ ने ट्रक की सॉफ्ट आदि लूट ली।

ट्रक से अन्य सामान भी निकाल लिया। कार के पास से मिले दो मोबाइल, कुछ रुपये, घड़ी आदि भी लोग उठा ले गए। दीपक की पत्नी सुमन का आरोप है कि पति शादी में जाते समय चेन और अंगूठी पहनकर गए थे। पोस्टमार्टम हाउस गए लोगों को उन्होंने बताया कि पति के जेवर गायब हैं। पुलिस भी इस बारे में कुछ नहीं बता रही है।
सूचना पर वर-वधू के घर
पर पसर गया सन्नाटा

पूरनपुर। बारात से लौटते समय हादसे में मारे गए नगर निवासी सभी छह लोगों की खबर जब वर-वधू के घर वालों को मिली तो वहां शादी की खुशियां काफूर हो गईं। अधिकांश कार्यक्रम सिर्फ रस्म अदायगी कर ही निपटाए गए।

मोहल्ला साहूकारा (लाइनपार) निवासी राजेंद्र के बड़े पुत्र आशीष की शादी शाहजहांपुर के जलालाबाद के गांव बडेरी निवासी विश्राम की पुत्री रीतू से तय हुई थी। रविवार को जश्न के साथ बारात रवाना हुई थी। आधी रात तक गांव बडेरी में जश्न का माहौल रहा। दूल्हा के रिश्तेदार मोहल्ला साहूकारा निवासी रवि वर्मा ने बताया कि हादसे की सूचना सोमवार को सुबह करीब साढ़े पांच बजे बारातियों को मिली तो जश्न का माहौल सन्नाटे में पसर गया।
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कई बाराती तो घटना स्थल को तुरंत रवाना हो गए। शादी की रस्मों की मात्र औपचारिकता कर विदाई की गई। सोमवार को अपराह्न 12 बजे दुल्हन विदा होकर घर आई। यहां भी नव वधू के आगमन का कोई उत्साह देखने को नहीं मिला। जिसकी उम्मीद सजो कर लोगों ने रखी थी। वजह मरने वाले युवकों में अधिकांश दूल्हे के दूर के रिश्तेदार ही थे।
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