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फर्जी अभिलेखों के सहारे महिला ने हथिया ली सरकारी नौकरी
Updated Sat, 12 Aug 2017 05:15 PM IST
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पीलीभीत। फर्जी टीसी के आधार पर एक महिला चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर पूरे 16 साल नौकरी कर सेवानिवृत हो गई। विभाग को इसकी भनक नहीं तक लगी। मामले की शिकायत बीएसए से की गई तो उन्होंने इसकी जांच खंड शिक्षा अधिकारी को सौंपी है।
मामला बेसिक शिक्षा विभाग का है। बीसलपुर के गांव अहिरबाड़ा निवासी ऊषा देवी की मृतक आश्रित के रूप में वर्ष 2000 में बेसिक शिक्षा विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर नियुक्ति की गई थी। आरोप है कि नियुक्ति के दौरान उक्त महिला ने जो टीसी संलग्न की, वह फर्जी है। मामले की शिकायत पुवांया निवासी रामकुमार ने बीएसए से की। बीएसए को सौंपे गए शिकायती पत्र में कहा गया कि ऊषा देवी ने नियुक्ति के दौरान अभिलेखों में जो टीसी संलग्न की, वह प्राइमरी स्कूल बिलसंडा प्रथम की, जबकि उक्त महिला मूल रूप से बरेली जिले के थाना भमोरा के गांव मोतीपुरा की रहने वाली है। टीसी में जन्मतिथि एक जनवरी 1957 दर्शाई गई, जबकि स्कूल में प्रवेश की तिथि 27 अप्रैल 1995 व स्कूल से निकलने की तिथि 30 जून 1995 दर्शाई गई। वहीं टीसी सात जुलाई को निर्गत होना दर्शाया गया। यानी उक्त महिला ने करीब 38 वर्ष की उम्र में प्राइमरी स्कूल में दाखिला लेने के बाद मात्र दो महीने में पढ़ाई पूरी कर डाली। आरोप है कि महिला ने फर्जी टीसी दिखाकर नौकरी हथिया ली और गत वर्ष दिसंबर माह में सेवानिवृत भी हो गई। टीसी के संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी बिलसंडा के आदेश पर हुई जांच में प्राइमरी स्कूल बिलसंडा प्रथम के प्राध्यापक ने एसआर संख्या 1171 पर या इसके बाद कोई भी छात्र विद्यालय के अभिलेख के अनुसार अंकित न होने बताया। शिकायतकर्ता ने बीएसए से मामले की जांच कराकर महिला की पेंशन व फंड पर रोक लगाने की मांग की। इधर बीएसए डॉ. इंद्रजीत प्रजापति ने बताया कि इस मामले की जांच बीसलपुर के खंड शिक्षा अधिकारी को सौंपी गई है। उन्हें जल्द जांच पूरी कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
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मामला बेसिक शिक्षा विभाग का है। बीसलपुर के गांव अहिरबाड़ा निवासी ऊषा देवी की मृतक आश्रित के रूप में वर्ष 2000 में बेसिक शिक्षा विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर नियुक्ति की गई थी। आरोप है कि नियुक्ति के दौरान उक्त महिला ने जो टीसी संलग्न की, वह फर्जी है। मामले की शिकायत पुवांया निवासी रामकुमार ने बीएसए से की। बीएसए को सौंपे गए शिकायती पत्र में कहा गया कि ऊषा देवी ने नियुक्ति के दौरान अभिलेखों में जो टीसी संलग्न की, वह प्राइमरी स्कूल बिलसंडा प्रथम की, जबकि उक्त महिला मूल रूप से बरेली जिले के थाना भमोरा के गांव मोतीपुरा की रहने वाली है। टीसी में जन्मतिथि एक जनवरी 1957 दर्शाई गई, जबकि स्कूल में प्रवेश की तिथि 27 अप्रैल 1995 व स्कूल से निकलने की तिथि 30 जून 1995 दर्शाई गई। वहीं टीसी सात जुलाई को निर्गत होना दर्शाया गया। यानी उक्त महिला ने करीब 38 वर्ष की उम्र में प्राइमरी स्कूल में दाखिला लेने के बाद मात्र दो महीने में पढ़ाई पूरी कर डाली। आरोप है कि महिला ने फर्जी टीसी दिखाकर नौकरी हथिया ली और गत वर्ष दिसंबर माह में सेवानिवृत भी हो गई। टीसी के संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी बिलसंडा के आदेश पर हुई जांच में प्राइमरी स्कूल बिलसंडा प्रथम के प्राध्यापक ने एसआर संख्या 1171 पर या इसके बाद कोई भी छात्र विद्यालय के अभिलेख के अनुसार अंकित न होने बताया। शिकायतकर्ता ने बीएसए से मामले की जांच कराकर महिला की पेंशन व फंड पर रोक लगाने की मांग की। इधर बीएसए डॉ. इंद्रजीत प्रजापति ने बताया कि इस मामले की जांच बीसलपुर के खंड शिक्षा अधिकारी को सौंपी गई है। उन्हें जल्द जांच पूरी कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
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