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स्वास्थ्य विभाग नहीं, जिला दिव्यांग सशक्तिकरण अधिकारी करेंगे गड़बड़ी की जांच
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पीलीभीत। खुद को दिव्यांग दर्शाकर दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाने के मामले में डीएम को भी अब स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर संदेह प्रतीत हो रहा है। मामला उजागर होने के बाद भी इस पर कोई एक्शन न लिए जाने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। साथ ही इस पूरे प्रकरण की जांच स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से न कराकर जिला दिव्यांग सशक्तीकरण अधिकारी केपी सिंह को दी गई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जांच पूरी होने के बाद अपात्रों के साथ-साथ इसको बनाने वाले कर्मचारियों पर भी एफआईआर कराई जाएगी। डीएम की सख्ती के बाद स्वास्थ्य विभाग में खलबली मची है।
बता दें, सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने के लिए स्वास्थ्य विभाग के कुछ डॉक्टर और कर्मचारियों ने खुद के साथ ही अपने परिचितों को अभिलेखों में दिव्यांग दर्शाकर (यूनिक डिसएबिलिटी आईडी) यूडीआईडी बनवा ली है। इनका सबसे ज्यादा इस्तेमाल परिवहन निगम की बसों, ट्रेनों में मुफ्त यात्रा के लिए हो रहा है। इससे जुड़ा एक मामला पिछले दिनों सीएमओ कार्यालय पहुंचने पर स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत ही नहीं, बल्कि डॉक्टरों के फर्जी हस्ताक्षर से यूडीआईडी जारी होने की बात निकलकर सामने आई। सीएमओ ने प्रकरण में बड़ी गड़बड़ी की बात स्वीकार करने के साथ ही दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी करने के लिए पैनल में शामिल डॉक्टरों के फर्जी हस्ताक्षर से यूडीआईडी जारी करने की बात स्वीकार कर एसीएमओ से मामले की जांच कराने का दावा किया। लेकिन तय समय में जांच एक कदम भी नहीं बढ़ सकी। इधर, रविवार को अमर उजाला में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते ही डीएम वैभव श्रीवास्तव ने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों पर भरोसा न जताकर पूरे मामले की जांच जिला दिव्यांग सशक्तीकरण अधिकारी केपी सिंह को सौंप दी। उनसे जल्द जांच पूरी कर रिपोर्ट तलब की गई है।
यूडीआईडी से खुलेगा राज
-जिला दिव्यांग सशक्तीकरण अधिकारी केपी सिंह ने बताया कि यूडीआईडी कार्ड की डिटेल ऑनलाइन चेक की जाएगी। इसके साथ ही जिसके नाम से यूडीआईडी जारी की गई है। कार्डधारक से संपर्क कर उसको कार्यालय बुलाया जाएगा। इसके बाद ही यूडीआईडी कैसे और किसने जारी कि इसका पता चल सकेगा।
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बोले डीएम-
मामला संज्ञान में आने पर इस मामले की जांच जिला दिव्यांग सशक्तीकरण अधिकारी को दे दी गई है। अपात्रों को यूडीआईडी जारी करने के मामले में स्वास्थ्य विभाग के अफसर हो या कर्मचारी जिसकी भी मिलीभगत उजागर होगी। उन सभी पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। मामला सामने आने के बाद भी कोई एक्शन न लेना लापरवाही की ओर इशारा करता है। - वैभव श्रीवास्तव, डीएम
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बता दें, सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने के लिए स्वास्थ्य विभाग के कुछ डॉक्टर और कर्मचारियों ने खुद के साथ ही अपने परिचितों को अभिलेखों में दिव्यांग दर्शाकर (यूनिक डिसएबिलिटी आईडी) यूडीआईडी बनवा ली है। इनका सबसे ज्यादा इस्तेमाल परिवहन निगम की बसों, ट्रेनों में मुफ्त यात्रा के लिए हो रहा है। इससे जुड़ा एक मामला पिछले दिनों सीएमओ कार्यालय पहुंचने पर स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत ही नहीं, बल्कि डॉक्टरों के फर्जी हस्ताक्षर से यूडीआईडी जारी होने की बात निकलकर सामने आई। सीएमओ ने प्रकरण में बड़ी गड़बड़ी की बात स्वीकार करने के साथ ही दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी करने के लिए पैनल में शामिल डॉक्टरों के फर्जी हस्ताक्षर से यूडीआईडी जारी करने की बात स्वीकार कर एसीएमओ से मामले की जांच कराने का दावा किया। लेकिन तय समय में जांच एक कदम भी नहीं बढ़ सकी। इधर, रविवार को अमर उजाला में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते ही डीएम वैभव श्रीवास्तव ने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों पर भरोसा न जताकर पूरे मामले की जांच जिला दिव्यांग सशक्तीकरण अधिकारी केपी सिंह को सौंप दी। उनसे जल्द जांच पूरी कर रिपोर्ट तलब की गई है।
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यूडीआईडी से खुलेगा राज
-जिला दिव्यांग सशक्तीकरण अधिकारी केपी सिंह ने बताया कि यूडीआईडी कार्ड की डिटेल ऑनलाइन चेक की जाएगी। इसके साथ ही जिसके नाम से यूडीआईडी जारी की गई है। कार्डधारक से संपर्क कर उसको कार्यालय बुलाया जाएगा। इसके बाद ही यूडीआईडी कैसे और किसने जारी कि इसका पता चल सकेगा।
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बोले डीएम-
मामला संज्ञान में आने पर इस मामले की जांच जिला दिव्यांग सशक्तीकरण अधिकारी को दे दी गई है। अपात्रों को यूडीआईडी जारी करने के मामले में स्वास्थ्य विभाग के अफसर हो या कर्मचारी जिसकी भी मिलीभगत उजागर होगी। उन सभी पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। मामला सामने आने के बाद भी कोई एक्शन न लेना लापरवाही की ओर इशारा करता है। - वैभव श्रीवास्तव, डीएम