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Banda News: बुंदेलखंड से लखनऊ तक फैला कोडीन के नशे का नेटवर्क
Sat, 05 Sep 2026 11:29 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sat, 05 Sep 2026 11:29 PM IST
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बांदा। बिसंडा क्षेत्र में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के पास दो दिन पहले ट्रक से कोडीनयुक्त सिरप की बड़ी खेप बरामद की गई।
वहीं शुक्रवार को लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर में पकड़ी गई नशीली दवाओं के बीच सीधा कनेक्शन सामने आया है। दोनों जगह बरामद सिरप ऑनरेक्स है, जो हिमाचल प्रदेश की कंपनी बनाती है। एक ही कंपनी का सिरप मिलने से अब जांच का दायरा बढ़ गया है।
कोडीनयुक्त सिरप ऑनरेक्स का निर्माण विंग्स बायोटेक एलएलपी, एचपीएसआईडीसी इंडस्ट्रियल एरिया, बद्दी (हिमाचल प्रदेश) में करती है। लखनऊ में पकड़ी गई खेप में ऑनरेक्स की 720 शीशियां मिली हैं। इससे कोडीनयुक्त सिरप के नशे के कारोबार में हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, बुंदेलखंड के साथ अब लखनऊ कनेक्शन भी पुलिस की जांच में जुड़ गया है।
बिसंडा क्षेत्र में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के पास पुलिस और एसटीएफ ने ट्रक से कोडीनयुक्त सिरप का बड़ा जखीरा बरामद किया था। इसमें 30 हजार शीशियां मिलने के मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इसमें बिसंडा के नहर पुरवा निवासी धीरेंद्र, अतर्रा के लखन कॉलोनी निवासी प्रवीण उर्फ लकी, अतर्रा के रामलीला मैदान निवासी रोहित और हापुड़ के बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र के भैना गांव निवासी डीसीएम चालक शेखर शामिल हैं।
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पूछताछ और बरामदगी के बाद पुलिस को सिरप की सप्लाई के नेटवर्क से जुड़े कई अहम सुराग मिले हैं। वहीं अतर्रा निवासी प्रियांशु गुप्ता की पुलिस को तलाश है।
वहीं बिसंडा में बरामद सिरप और लखनऊ की खेप में एक ही कंपनी का उत्पाद मिलने के बाद पुलिस दोनों मामलों के बीच संभावित कनेक्शन खंगाल रही है। इससे जांच का एंगल अब लखनऊ तक पहुंच गया है।
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बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को चुना सुरक्षित रास्ता
जांच में सामने आया है कि कोडीनयुक्त सिरप की खेप दिल्ली से लाई गई। आम रास्तों पर जीएसटी और पुलिस की चेकिंग अधिक होने के कारण आरोपियों ने एक्सप्रेसवे का रास्ता चुना। दिल्ली से यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और फिर बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के रास्ते खेप बांदा तक पहुंचाई गई।
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मध्यप्रदेश के सीमावर्ती जिलों तक फैले तार
पुलिस को जांच में बुंदेलखंड के विभिन्न जिलों के अलावा मध्यप्रदेश के सीमावर्ती जिलों में भी कोडीनयुक्त सिरप की सप्लाई के सुराग मिले हैं। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हिमाचल प्रदेश में निर्मित सिरप दिल्ली के रास्ते किन-किन जिलों तक पहुंचाया जा रहा था और नशे के कारोबार में इसकी सप्लाई का मुख्य नेटवर्क कौन संचालित कर रहा है।
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सब्जी बेचते थे पिता, कुछ साल में प्रियांशु बना दौलतमंद
अतर्रा (बांदा)। बिसंडा क्षेत्र में 30 हजार शीशी कोडीनयुक्त प्रतिबंधित कफ सीरप पकड़े जाने के बाद सामने आए नेटवर्क की जड़ें कस्बे तक पहुंचने से लोग हैरान हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा मुख्य वांछित आरोपी प्रियांशु गुप्ता उर्फ किशन की बदली जिंदगी को लेकर है। स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ साल पहले तक उसके पिता सब्जी की टोकरी लगाकर परिवार चलाते थे। इसके बाद प्रियांशु ने मेडिकल एजेंसी का कारोबार शुरू किया और कम समय में ही उसकी आर्थिक स्थिति तेजी से बदल गई।
बीते बृहस्पतिवार को एसटीएफ और पुलिस की संयुक्त टीम ने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के पास डीसीएम से 30 हजार शीशी कोडीनयुक्त कफ सीरप बरामद किया था। मौके से चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें कस्बे के रामलीला रोड निवासी रोहित पांडेय और लखन कॉलोनी निवासी प्रवीण उर्फ लकी गुप्ता भी शामिल हैं।
इस मामले में गिरोह का मुख्य आरोपी बताया जा रहा प्रियांशु गुप्ता अभी गायब है। स्थानीय लोगों के मुताबिक प्रियांशु के पिता करीब 20 साल तक सब्जी बेचते रहे। इसके बाद प्रियांशु ने बस स्टैंड के पास मेडिकल एजेंसी के नाम से कारोबार शुरू किया।
यहीं से उसकी जिंदगी बदलती चली गई। अब उसके रहन-सहन, कारों और शौक को देखकर लोग सवाल उठा रहे हैं। दवा कारोबार की आड़ में प्रतिबंधित कफ सीरप का नेटवर्क खड़ा किए जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इसका पूरा सच पुलिस की जांच के बाद ही सामने आएगा।
कस्बे में चर्चा है कि प्रतिबंधित कफ सीरप का कारोबार लंबे समय से चल रहा था और अलग-अलग लोगों की टीमें इसमें सक्रिय हो सकती हैं। ऐसे में पुलिस के सामने सिर्फ फरार मुख्य आरोपी को पकड़ने की चुनौती नहीं है, बल्कि उसके कारोबार, संपत्ति, लेनदेन, वाहनों और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच करना भी जरूरी है।
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अन्य आरोपियों की संपत्ति और कारोबार भी जांच के दायरे में
गिरफ्तार रोहित पांडेय के पिता की दवा एजेंसी थाने से करीब 50 मीटर दूर करीब 20 साल से संचालित होने की बात सामने आई है। आरोप है कि इसी कारोबार की आड़ में रोहित ने कफ सीरप के धंधे में पैर जमाया। वहीं प्रवीण ने भी घर से दवा एजेंसी संचालन के नाम पर कारोबार शुरू किया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों की आर्थिक स्थिति और रहन-सहन में पिछले कुछ वर्षों में काफी बदलाव आया है। पुलिस यदि आरोपियों की संपत्ति, बैंक लेनदेन, वाहनों और दवा कारोबार की गहराई से जांच करे तो नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आ सकती है।
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डॉक्टर की कार इस्तेमाल होने से भी उठे सवाल
पुलिस ने कफ सीरप से लदे डीसीएम के साथ नेक्सन कार भी पकड़ी थी। यह कार कस्बे के एक निजी अस्पताल के डॉक्टर के नाम दर्ज होने की बात सामने आई है। प्रतिबंधित सिरप की खेप के साथ कार का इस्तेमाल कैसे हुआ, इसका पता लगाना भी जांच का अहम बिंदु है। कार मालिक और आरोपियों के बीच संबंधों की जांच से नेटवर्क की अन्य कड़ियां सामने आ सकती हैं।
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चार माह पहले एमपी में पकड़ी गई थी सिरप की खेप
करीब चार माह पहले भी कस्बे से मध्यप्रदेश जा रही अवैध कफ सीरप की खेप पिकअप में पकड़े जाने की चर्चा सामने आई थी। पिकअप बरौंधा थाना क्षेत्र में पकड़ी गई थी। इसके बाद एमपी पुलिस ने कस्बे में आकर पूछताछ और जांच की थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि उस समय प्रभावी कार्रवाई होती तो शायद नेटवर्क इतना बड़ा नहीं हो पाता। अब 30 हजार शीशी की बरामदगी के बाद पुलिस की जांच पर सभी की नजर है।
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अतर्रा में आरोपियों के मेडिकल स्टोरों पर छापा, चार नमूने भरे
बांदा। कोडीनयुक्त सिरप के अवैध धंधे से जुड़े आरोपियों के मेडिकल स्टोर्स पर औषधि निरीक्षक ने शनिवार को छापा मारा।
यहां से पांच दवाओं के नमूने लेने के साथ ही अभिलेखों की भी जांच की। साथ ही मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता को नोटिस भी जारी किया गया है।
शनिवार को औषधि निरीक्षक दिव्यप्रकाश मौर्य ने अतर्रा में संचालित गिरफ्तार आरोपी रोहित पांडेय के पिता कल्लूराम पांडेय के नाम संचालित श्रीराम मेडिकल एजेंसी पर छापा मारा। यहां से दो एंटीबायोटिक दवा के नमूने जांच के लिए भरे।
इसके साथ ही उन्होंने पुलिस की पकड़ से दूर मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता के मेडिकल स्टोर श्याम मेडिकल एजेंसी पर भी छापा मारा। यह लाइसेंस प्रियांशु के ही नाम पर जारी है। यहां से भी दो एंटीबायोटिक दवाओं के नमूने लिए। हालांकि दोनों ही जगह कोडीनयुक्त सिरप बरामद नहीं हुआ।
प्रियांशु गुप्ता के कोडीनयुक्त सिरप के कारोबार में जुड़े होने के चलते उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। जवाब न देने पर लाइसेंस निलंबित करने की रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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बीमारी का बहाना बनाकर मांगी थी कार
अर्तरा निवासी एक निजी चिकित्सक की कार भी पुलिस ने आरोपियों से बरामद की है। निजी चिकित्सक ने बताया कि बुधवार रात को करीब नौ बजे रोहित उनके पास आया था। उसने बताया कि घर में किसी की तबीयत खराब है।
जब उन्होंने रोहित की कार के बारे में पूछा तो उसने बताया कि कार जहां खड़ी होती है, वहां बारिश का पानी भर गया है। ऐसे में कार निकल नहीं पा रही है। इसके बाद उन्होंने कार की चाबी दे दी। बृहस्पतिवार को उन्हें कार के पकड़े जाने की जानकारी मिली। उन्होंने बताया कि सीसीटीवी में भी रोहित के कार लेकर जाने की पूरी रिकॉर्डिंग है।
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वहीं शुक्रवार को लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर में पकड़ी गई नशीली दवाओं के बीच सीधा कनेक्शन सामने आया है। दोनों जगह बरामद सिरप ऑनरेक्स है, जो हिमाचल प्रदेश की कंपनी बनाती है। एक ही कंपनी का सिरप मिलने से अब जांच का दायरा बढ़ गया है।
कोडीनयुक्त सिरप ऑनरेक्स का निर्माण विंग्स बायोटेक एलएलपी, एचपीएसआईडीसी इंडस्ट्रियल एरिया, बद्दी (हिमाचल प्रदेश) में करती है। लखनऊ में पकड़ी गई खेप में ऑनरेक्स की 720 शीशियां मिली हैं। इससे कोडीनयुक्त सिरप के नशे के कारोबार में हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, बुंदेलखंड के साथ अब लखनऊ कनेक्शन भी पुलिस की जांच में जुड़ गया है।
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बिसंडा क्षेत्र में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के पास पुलिस और एसटीएफ ने ट्रक से कोडीनयुक्त सिरप का बड़ा जखीरा बरामद किया था। इसमें 30 हजार शीशियां मिलने के मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इसमें बिसंडा के नहर पुरवा निवासी धीरेंद्र, अतर्रा के लखन कॉलोनी निवासी प्रवीण उर्फ लकी, अतर्रा के रामलीला मैदान निवासी रोहित और हापुड़ के बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र के भैना गांव निवासी डीसीएम चालक शेखर शामिल हैं।
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वहीं बिसंडा में बरामद सिरप और लखनऊ की खेप में एक ही कंपनी का उत्पाद मिलने के बाद पुलिस दोनों मामलों के बीच संभावित कनेक्शन खंगाल रही है। इससे जांच का एंगल अब लखनऊ तक पहुंच गया है।
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को चुना सुरक्षित रास्ता
जांच में सामने आया है कि कोडीनयुक्त सिरप की खेप दिल्ली से लाई गई। आम रास्तों पर जीएसटी और पुलिस की चेकिंग अधिक होने के कारण आरोपियों ने एक्सप्रेसवे का रास्ता चुना। दिल्ली से यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और फिर बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के रास्ते खेप बांदा तक पहुंचाई गई।
मध्यप्रदेश के सीमावर्ती जिलों तक फैले तार
पुलिस को जांच में बुंदेलखंड के विभिन्न जिलों के अलावा मध्यप्रदेश के सीमावर्ती जिलों में भी कोडीनयुक्त सिरप की सप्लाई के सुराग मिले हैं। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हिमाचल प्रदेश में निर्मित सिरप दिल्ली के रास्ते किन-किन जिलों तक पहुंचाया जा रहा था और नशे के कारोबार में इसकी सप्लाई का मुख्य नेटवर्क कौन संचालित कर रहा है।
सब्जी बेचते थे पिता, कुछ साल में प्रियांशु बना दौलतमंद
अतर्रा (बांदा)। बिसंडा क्षेत्र में 30 हजार शीशी कोडीनयुक्त प्रतिबंधित कफ सीरप पकड़े जाने के बाद सामने आए नेटवर्क की जड़ें कस्बे तक पहुंचने से लोग हैरान हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा मुख्य वांछित आरोपी प्रियांशु गुप्ता उर्फ किशन की बदली जिंदगी को लेकर है। स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ साल पहले तक उसके पिता सब्जी की टोकरी लगाकर परिवार चलाते थे। इसके बाद प्रियांशु ने मेडिकल एजेंसी का कारोबार शुरू किया और कम समय में ही उसकी आर्थिक स्थिति तेजी से बदल गई।
बीते बृहस्पतिवार को एसटीएफ और पुलिस की संयुक्त टीम ने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के पास डीसीएम से 30 हजार शीशी कोडीनयुक्त कफ सीरप बरामद किया था। मौके से चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें कस्बे के रामलीला रोड निवासी रोहित पांडेय और लखन कॉलोनी निवासी प्रवीण उर्फ लकी गुप्ता भी शामिल हैं।
इस मामले में गिरोह का मुख्य आरोपी बताया जा रहा प्रियांशु गुप्ता अभी गायब है। स्थानीय लोगों के मुताबिक प्रियांशु के पिता करीब 20 साल तक सब्जी बेचते रहे। इसके बाद प्रियांशु ने बस स्टैंड के पास मेडिकल एजेंसी के नाम से कारोबार शुरू किया।
यहीं से उसकी जिंदगी बदलती चली गई। अब उसके रहन-सहन, कारों और शौक को देखकर लोग सवाल उठा रहे हैं। दवा कारोबार की आड़ में प्रतिबंधित कफ सीरप का नेटवर्क खड़ा किए जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इसका पूरा सच पुलिस की जांच के बाद ही सामने आएगा।
कस्बे में चर्चा है कि प्रतिबंधित कफ सीरप का कारोबार लंबे समय से चल रहा था और अलग-अलग लोगों की टीमें इसमें सक्रिय हो सकती हैं। ऐसे में पुलिस के सामने सिर्फ फरार मुख्य आरोपी को पकड़ने की चुनौती नहीं है, बल्कि उसके कारोबार, संपत्ति, लेनदेन, वाहनों और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच करना भी जरूरी है।
अन्य आरोपियों की संपत्ति और कारोबार भी जांच के दायरे में
गिरफ्तार रोहित पांडेय के पिता की दवा एजेंसी थाने से करीब 50 मीटर दूर करीब 20 साल से संचालित होने की बात सामने आई है। आरोप है कि इसी कारोबार की आड़ में रोहित ने कफ सीरप के धंधे में पैर जमाया। वहीं प्रवीण ने भी घर से दवा एजेंसी संचालन के नाम पर कारोबार शुरू किया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों की आर्थिक स्थिति और रहन-सहन में पिछले कुछ वर्षों में काफी बदलाव आया है। पुलिस यदि आरोपियों की संपत्ति, बैंक लेनदेन, वाहनों और दवा कारोबार की गहराई से जांच करे तो नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आ सकती है।
डॉक्टर की कार इस्तेमाल होने से भी उठे सवाल
पुलिस ने कफ सीरप से लदे डीसीएम के साथ नेक्सन कार भी पकड़ी थी। यह कार कस्बे के एक निजी अस्पताल के डॉक्टर के नाम दर्ज होने की बात सामने आई है। प्रतिबंधित सिरप की खेप के साथ कार का इस्तेमाल कैसे हुआ, इसका पता लगाना भी जांच का अहम बिंदु है। कार मालिक और आरोपियों के बीच संबंधों की जांच से नेटवर्क की अन्य कड़ियां सामने आ सकती हैं।
चार माह पहले एमपी में पकड़ी गई थी सिरप की खेप
करीब चार माह पहले भी कस्बे से मध्यप्रदेश जा रही अवैध कफ सीरप की खेप पिकअप में पकड़े जाने की चर्चा सामने आई थी। पिकअप बरौंधा थाना क्षेत्र में पकड़ी गई थी। इसके बाद एमपी पुलिस ने कस्बे में आकर पूछताछ और जांच की थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि उस समय प्रभावी कार्रवाई होती तो शायद नेटवर्क इतना बड़ा नहीं हो पाता। अब 30 हजार शीशी की बरामदगी के बाद पुलिस की जांच पर सभी की नजर है।
अतर्रा में आरोपियों के मेडिकल स्टोरों पर छापा, चार नमूने भरे
बांदा। कोडीनयुक्त सिरप के अवैध धंधे से जुड़े आरोपियों के मेडिकल स्टोर्स पर औषधि निरीक्षक ने शनिवार को छापा मारा।
यहां से पांच दवाओं के नमूने लेने के साथ ही अभिलेखों की भी जांच की। साथ ही मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता को नोटिस भी जारी किया गया है।
शनिवार को औषधि निरीक्षक दिव्यप्रकाश मौर्य ने अतर्रा में संचालित गिरफ्तार आरोपी रोहित पांडेय के पिता कल्लूराम पांडेय के नाम संचालित श्रीराम मेडिकल एजेंसी पर छापा मारा। यहां से दो एंटीबायोटिक दवा के नमूने जांच के लिए भरे।
इसके साथ ही उन्होंने पुलिस की पकड़ से दूर मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता के मेडिकल स्टोर श्याम मेडिकल एजेंसी पर भी छापा मारा। यह लाइसेंस प्रियांशु के ही नाम पर जारी है। यहां से भी दो एंटीबायोटिक दवाओं के नमूने लिए। हालांकि दोनों ही जगह कोडीनयुक्त सिरप बरामद नहीं हुआ।
प्रियांशु गुप्ता के कोडीनयुक्त सिरप के कारोबार में जुड़े होने के चलते उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। जवाब न देने पर लाइसेंस निलंबित करने की रिपोर्ट भेजी जाएगी।
बीमारी का बहाना बनाकर मांगी थी कार
अर्तरा निवासी एक निजी चिकित्सक की कार भी पुलिस ने आरोपियों से बरामद की है। निजी चिकित्सक ने बताया कि बुधवार रात को करीब नौ बजे रोहित उनके पास आया था। उसने बताया कि घर में किसी की तबीयत खराब है।
जब उन्होंने रोहित की कार के बारे में पूछा तो उसने बताया कि कार जहां खड़ी होती है, वहां बारिश का पानी भर गया है। ऐसे में कार निकल नहीं पा रही है। इसके बाद उन्होंने कार की चाबी दे दी। बृहस्पतिवार को उन्हें कार के पकड़े जाने की जानकारी मिली। उन्होंने बताया कि सीसीटीवी में भी रोहित के कार लेकर जाने की पूरी रिकॉर्डिंग है।