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दुबई में नौकरी दिलाने के नाम पर दो युवकों से ठगी
Updated Tue, 05 Dec 2017 11:35 PM IST
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पीलीभीत। दुबई में नौकरी लगवाने के नाम पर दिल्ली के एक जालसाज ने मोहल्ला छोटा खुदागंज निवासी मुस्तफा गौस व उसके मित्र नसीम मियां से 15 अगस्त को पीलीभीत आकर 50-50 हजार रुपये ठग लिए। इसके बाद दिल्ली बुलाकर एक प्राइवेट चिकित्सक के यहां मेडिकल कराने के बाद घर भेज दिया। नवंबर माह में ईमेल पर भेजे गए वीजा चेक कराए गए तो दोनों ही फर्जी निकले। सोमवार को कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर पीड़ित ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मोहल्ला छोटा खुदागंज निवासी मुस्तफा गौस ने तहरीर में बताया कि चार महीने पहले उसकी मुलाकात दिल्ली के खानपुर निवासी एक युवक से हुई थी। उसने बताया कि वह विदेश में नौकरी दिलवाने का काम करता है। उसने पीड़ित को भी दुबई में इलेक्ट्रीशियन की नौकरी दिलाने का झांसा दिया। 15 अगस्त 2017 को आरोपी दिल्ली से पीलीभीत आया। आरोपी की बातों में फंसकर पीड़ित ने 50 हजार रुपये आरोपी को दे दिए। साथ ही अपने एक मित्र नसीम मियां से भी 50 हजार रुपये दिलवा दिए। इस पर उसने दोनों को नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया और चला गया। करीब 15 दिन बाद आरोपी ने दोनों को दिल्ली बुलाया। यहां एक प्राइवेट चिकित्सक से मेडिकल कराने के बाद जल्द ही वीजा मुहैया कराने की बात कहकर घर भेज दिया। कई दिन बीतने के बाद भी जब वीजा नहीं मिला तो दुबारा फोन पर संपर्क कर आरोपी से जानकारी की गई। इसके बाद दस हजार रुपये 27 सितंबर 2017 को दुबारा आरोपी के खाते में ट्रांसफर कर दिए। 15 नवंबर को आरोपी ने दुबई के वीजा मेल के जरिए भेजा। इसमें वीजा जारी होने की तिथि 19 नवंबर और वैद्यता 17 जनवरी 2017 लिखी हुई थी। इस पर शक होने पर पीड़ित ने इंटरनेट के जरिए जानकारी की, इसमें पता लगा कि उसके नाम का कोई वीजा जारी किया ही नहीं गया है। कोतवाल एसके सिंह ने बताया कि सोमवार को आरोपी के बरेली आने की जानकारी मिली थी। इस पर पीड़ित के साथ पुलिस को भेजा गया था, लेकिन आरोपी नहीं आया। वीजा असली है या फर्जी, इसकी पुष्टि पासपोर्ट कार्यालय से रिपोर्ट मिलने के बाद हो सकेगी। तहरीर की जांच कर कार्रवाई कराई जा रही है।
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मोहल्ला छोटा खुदागंज निवासी मुस्तफा गौस ने तहरीर में बताया कि चार महीने पहले उसकी मुलाकात दिल्ली के खानपुर निवासी एक युवक से हुई थी। उसने बताया कि वह विदेश में नौकरी दिलवाने का काम करता है। उसने पीड़ित को भी दुबई में इलेक्ट्रीशियन की नौकरी दिलाने का झांसा दिया। 15 अगस्त 2017 को आरोपी दिल्ली से पीलीभीत आया। आरोपी की बातों में फंसकर पीड़ित ने 50 हजार रुपये आरोपी को दे दिए। साथ ही अपने एक मित्र नसीम मियां से भी 50 हजार रुपये दिलवा दिए। इस पर उसने दोनों को नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया और चला गया। करीब 15 दिन बाद आरोपी ने दोनों को दिल्ली बुलाया। यहां एक प्राइवेट चिकित्सक से मेडिकल कराने के बाद जल्द ही वीजा मुहैया कराने की बात कहकर घर भेज दिया। कई दिन बीतने के बाद भी जब वीजा नहीं मिला तो दुबारा फोन पर संपर्क कर आरोपी से जानकारी की गई। इसके बाद दस हजार रुपये 27 सितंबर 2017 को दुबारा आरोपी के खाते में ट्रांसफर कर दिए। 15 नवंबर को आरोपी ने दुबई के वीजा मेल के जरिए भेजा। इसमें वीजा जारी होने की तिथि 19 नवंबर और वैद्यता 17 जनवरी 2017 लिखी हुई थी। इस पर शक होने पर पीड़ित ने इंटरनेट के जरिए जानकारी की, इसमें पता लगा कि उसके नाम का कोई वीजा जारी किया ही नहीं गया है। कोतवाल एसके सिंह ने बताया कि सोमवार को आरोपी के बरेली आने की जानकारी मिली थी। इस पर पीड़ित के साथ पुलिस को भेजा गया था, लेकिन आरोपी नहीं आया। वीजा असली है या फर्जी, इसकी पुष्टि पासपोर्ट कार्यालय से रिपोर्ट मिलने के बाद हो सकेगी। तहरीर की जांच कर कार्रवाई कराई जा रही है।
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