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एमएम डिग्री कालेज के कर्मचारी को सत्रह वर्ष बाद आखिरकार न्यायालय ने दिलाया न्याय।
Updated Mon, 30 Oct 2017 01:38 AM IST
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खेकड़ा (बागपत)।
हाईकोर्ट ने एमएम डिग्री कॉलेज के प्रधानाचार्य और प्रबंधक को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को मय व्याज केधनराशि का भुगतान करने के आदेश दिए हैं।
नगर स्थित एमएम डिग्री कॉलेज के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शाली वान सिंह के वर्ष दो हजार एक से अब तक के एसीपी एवं बोनस विभिन्न आरोप लगाकर पूर्व की प्रबंध समिति एवं उस समय रहे कॉलेज के प्रधानाचार्यों ने रोक लगवा रखी थी। इसके चलते कर्मचारी ने हाईकोर्ट की शरण में जाकर अपना पक्ष रखा। सत्रह साल की लंबी लड़ाई लड़ने के बाद हाईकोर्ट ने विभाग के साथ ही कॉलेज के वर्तमान प्राचार्य को आदेश दिए कि कर्मचारी का एसीपी, बोनस वेतन के साथ बढ़ोतरी पर रोक लगाना नियम विरुद्ध था। तत्काल मय ब्याज के सत्रह वर्ष तक की उसकी अवशेष धनराशि का भुगतान किया जाए। कर्मचारी शालीवान सिंह ने कहा कि उस पर झूठे आरोप लगाने से उसके बच्चे मानसिक रूप से पीड़ित थे। न्यायालय ने आखिरकार उसका पक्ष सुनकर उसे न्याय दिलाया और आखिर में सच्चाई की जीत हुई है। न्यायालय के आदेश की प्रतिलिपि कर्मचारी ने कॉलेज के प्राचार्य एवं प्रबंधक को उपलब्ध कराई।
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हाईकोर्ट ने एमएम डिग्री कॉलेज के प्रधानाचार्य और प्रबंधक को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को मय व्याज केधनराशि का भुगतान करने के आदेश दिए हैं।
नगर स्थित एमएम डिग्री कॉलेज के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शाली वान सिंह के वर्ष दो हजार एक से अब तक के एसीपी एवं बोनस विभिन्न आरोप लगाकर पूर्व की प्रबंध समिति एवं उस समय रहे कॉलेज के प्रधानाचार्यों ने रोक लगवा रखी थी। इसके चलते कर्मचारी ने हाईकोर्ट की शरण में जाकर अपना पक्ष रखा। सत्रह साल की लंबी लड़ाई लड़ने के बाद हाईकोर्ट ने विभाग के साथ ही कॉलेज के वर्तमान प्राचार्य को आदेश दिए कि कर्मचारी का एसीपी, बोनस वेतन के साथ बढ़ोतरी पर रोक लगाना नियम विरुद्ध था। तत्काल मय ब्याज के सत्रह वर्ष तक की उसकी अवशेष धनराशि का भुगतान किया जाए। कर्मचारी शालीवान सिंह ने कहा कि उस पर झूठे आरोप लगाने से उसके बच्चे मानसिक रूप से पीड़ित थे। न्यायालय ने आखिरकार उसका पक्ष सुनकर उसे न्याय दिलाया और आखिर में सच्चाई की जीत हुई है। न्यायालय के आदेश की प्रतिलिपि कर्मचारी ने कॉलेज के प्राचार्य एवं प्रबंधक को उपलब्ध कराई।