{"_id":"598da0714f1c1be4408b4924","slug":"161502453873-pilibhit-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"38 साल बाद पकड़ा गया फरार हत्या का सजायापता गुरमीत","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
38 साल बाद पकड़ा गया फरार हत्या का सजायापता गुरमीत
Updated Fri, 11 Aug 2017 05:47 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीलीभीत। सगे भाई की हत्या के मामले में न्यायालय से आजीवन कारावास की सजा मिलने के बाद अचानक लापता हुआ रामनगर का गुरमीत सिंह 38 साल बाद पुलिस के हत्थे चढ़ा। स्वाट टीम ने सुरागरसी कर फरार हत्यारोपी को धर दबोचा। एसपी ने प्रेसवार्ता कर टीम के गुडवर्क की सराहना करते हुए पांच हजार ईनाम की घोषणा की है।
गजरौला थाना क्षेत्र के ग्राम रामनगर निवासी गुरमीत सिंह पुत्र बख्शीश सिंह ने अपने सगे भाई मलकीत सिंह की 1978 में हत्या कर दी थी। जिसका मुकदमा गजरौला थाना पर दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया गया। ट्रायल के दौरान उसको जिला न्यायालय से आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इस बीच आजीवन कारावास की सजा से बचने के लिए गुरमीत सिंह कहीं चला गया। उसकी काफी तलाश की गई, लेकिन उसका कोई पता नहंी लग सका। 38 साल बाद मासिक अभियान के दौरान अभिलेखों की छटनी करने पर पुलिस को उसकी लंबे से फरारी का पता लगा। उस पर पुलिस की ओर से पांच हजार का ईनाम घोषित किया जा चुका था। एसपी ने फरार ईनामी की गिरफ्तारी के लिए स्वाट टीम प्रभारी इंद्रजीत सिंह भदौरिया को लगाया। जिसके बाद स्वाट टीम और गजरौला पुलिस ने शुक्रवार सुबह उसको उसके मकान से धर दबोचा। वह अपने परिवारीजनों से मिलने आया हुआ था। एसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि गुरमीत सिहं यहां से भागकर पंजाब चला गया था। इसके बाद वहीं गुरुद्वारों में पहचान बदलकर रह रहा था। उसके परिवारीजनों पर दबाव बनाने के बाद धरपकड़ में सफलता मिली है। पूरे मामले की कोर्ट से फाइल निकलवाई गई है। सजायापता अपराधी को चालान कर न्यायालय भेज दिया है। गिरफ्तारी करने वाली टीम में एसएचओ गजरौला नरेंद्र यादव, स्वाट टीम के कांस्टेबल अतेंद्र प्रताप सिंह, उदयवीर सिंह, मोहम्मद अली थे।
विज्ञापन
गजरौला थाना क्षेत्र के ग्राम रामनगर निवासी गुरमीत सिंह पुत्र बख्शीश सिंह ने अपने सगे भाई मलकीत सिंह की 1978 में हत्या कर दी थी। जिसका मुकदमा गजरौला थाना पर दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया गया। ट्रायल के दौरान उसको जिला न्यायालय से आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इस बीच आजीवन कारावास की सजा से बचने के लिए गुरमीत सिंह कहीं चला गया। उसकी काफी तलाश की गई, लेकिन उसका कोई पता नहंी लग सका। 38 साल बाद मासिक अभियान के दौरान अभिलेखों की छटनी करने पर पुलिस को उसकी लंबे से फरारी का पता लगा। उस पर पुलिस की ओर से पांच हजार का ईनाम घोषित किया जा चुका था। एसपी ने फरार ईनामी की गिरफ्तारी के लिए स्वाट टीम प्रभारी इंद्रजीत सिंह भदौरिया को लगाया। जिसके बाद स्वाट टीम और गजरौला पुलिस ने शुक्रवार सुबह उसको उसके मकान से धर दबोचा। वह अपने परिवारीजनों से मिलने आया हुआ था। एसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि गुरमीत सिहं यहां से भागकर पंजाब चला गया था। इसके बाद वहीं गुरुद्वारों में पहचान बदलकर रह रहा था। उसके परिवारीजनों पर दबाव बनाने के बाद धरपकड़ में सफलता मिली है। पूरे मामले की कोर्ट से फाइल निकलवाई गई है। सजायापता अपराधी को चालान कर न्यायालय भेज दिया है। गिरफ्तारी करने वाली टीम में एसएचओ गजरौला नरेंद्र यादव, स्वाट टीम के कांस्टेबल अतेंद्र प्रताप सिंह, उदयवीर सिंह, मोहम्मद अली थे।
विज्ञापन