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खाद्य तेल का किया दोबारा इस्तेमाल तो लाइसेंस होगा निरस्त
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पीलीभीत। होटल, ढाबों और ठेले-खोमचों पर अब एक बार इस्तेमाल सरसों के तेल या रिफाइंड का दोबारा इस्तेमाल नहीं हो पाएगा। इन लोगों को अब बचे हुए एक-एक बूंद तेल का हिसाब देना होगा। इस्तेमाल हुआ तेल नष्ट भी करना होगा। ऐसे न करने पर इनका लाइसेंस तक निरस्त किया जा सकता है। फूड सेफ्टी अथॉरटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने इसको लेकर एक आदेश जारी किया है। तेल का इस्तेमाल कर खाद्य सामग्री स्नेक्स, नमकीन आदि बनाने वाली कंपनियों पर भी यह आदेश लागू होगा। ऐसे में अब अफसरों को तेल ही नहीं तेल की धार भी देखनी होगी। यह नियम 50 लीटर तेल रोजाना इस्तेमाल करने वालों पर लागू होगा। आमतौर से बाजार की कोई तली हुई चीज खाने से पेट खराब या अन्य परेशानी हो जाती है। इसके बावजूद लोग टिक्की, समोसे, ब्रेड, डोसा, चीला आदि बड़े शौक से खाते हैं, जबकि खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और इसमें इस्तेमाल हो रहा तेल भी संदिग्ध होता है। ज्यादातर दुकानदार एक बार इस्तेमाल हुए तेल को ही बार-बार इस्तेमाल कर खाद्य सामग्री बनाते रहते हैं।
ऐसे रुकेगा इस्तेमाल
होटल, ढाबा और अन्य दुकानदारों को तेल से संबंधित रिकार्ड रखना होगा। इसमें कितना तेल खरीदा, कितना इस्तेमाल हुआ साथ ही बचे और जले तेल का क्या हुआ आदि विवरण शामिल होगा।
घटती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्श दाता डॉ. महावीर प्रसाद का कहना है कि एक बार इस्तेमाल में लिए गए तेल को बार-बार इस्तेमाल में लेने से उसकी प्रकृति और गुण बदल जाते हैं। कई हानिकारक तत्व तेल में शामिल हो जाते हैं। इसका असर श्वेत रक्त कणिकाओं पर पड़ता है। इंसान की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है। इसलिए दोबारा गर्म हुए तेल को इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
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एक ही तेल का बार-बार इस्तेमाल होना नुकसानदायक है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। एफडीए की टीमें छापा मार कर नमूने भरेंगी। दुकान में रखे खराब तेल का रिकार्ड नहीं मिला तो कार्रवाई होगी। नियमानुसार गड़बड़ी मिलने पर लाइसेंस तक निरस्त किये जा सकते हैं। - वीके वर्मा, अभिहित अधिकारी
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ऐसे रुकेगा इस्तेमाल
होटल, ढाबा और अन्य दुकानदारों को तेल से संबंधित रिकार्ड रखना होगा। इसमें कितना तेल खरीदा, कितना इस्तेमाल हुआ साथ ही बचे और जले तेल का क्या हुआ आदि विवरण शामिल होगा।
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घटती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्श दाता डॉ. महावीर प्रसाद का कहना है कि एक बार इस्तेमाल में लिए गए तेल को बार-बार इस्तेमाल में लेने से उसकी प्रकृति और गुण बदल जाते हैं। कई हानिकारक तत्व तेल में शामिल हो जाते हैं। इसका असर श्वेत रक्त कणिकाओं पर पड़ता है। इंसान की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है। इसलिए दोबारा गर्म हुए तेल को इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
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एक ही तेल का बार-बार इस्तेमाल होना नुकसानदायक है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। एफडीए की टीमें छापा मार कर नमूने भरेंगी। दुकान में रखे खराब तेल का रिकार्ड नहीं मिला तो कार्रवाई होगी। नियमानुसार गड़बड़ी मिलने पर लाइसेंस तक निरस्त किये जा सकते हैं। - वीके वर्मा, अभिहित अधिकारी