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चौथे दिन भी नहीं हुई हमलावर बाघ की पहचान
Updated Fri, 23 Jun 2017 05:47 PM IST
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पीलीभीत। शिवपुरिया के मिहीलाल को मौत के घाट उतारने वाले बाघ की पहचान चौथे दिन भी नहीं हो सकी है। वहीं लगाए गए कैमरों में एक से अधिक बाघ दिखाई देने की चर्चा से क्षेत्र में दहशत है। उधर अमरिया क्षेत्र में खेतों में बाघ को देख धान की रोपाई कर रहे किसान घबराकर भाग गए।
20 जून को न्यूरिया थाना क्षेत्र के गांव शिवपुरिया निवासी मिहीलाल पर बाघ ने हमला कर उस समय मार डाला था जब वह घर से करीब एक किमी दूर सरदूल सिंह के गन्ने के खेत में घास काट रहा था। घटना के बाद हमलावर बाघ को लेकर कई चर्चाएं थी। कोई जंगल में घायल घूम रहे बाघ द्वारा हमला करने की बात कह रहा था तो कुछ लोगों ने मिहीलाल के शव के पास दो शावकों को देखने की बात की थी। घटना के दूसरे दिन मुख्य वन संरक्षक एवं दुधवा नेशनल पार्क के डायरेक्टर सुनील चौधरी एवं वन संरक्षक वीके सिंह हमलावर की पहचान और क्षेत्र की निगरानी के लिए कैमरे लगाने के निर्देश दिए थे। अधिकारियों के निर्देश पर जंगल के अंदर और घटना स्थल के आसपास करीब एक दर्जन से अधिक कैमरे लगाए गए थे। अब तक हमलावर बाघ की पहचान नहीं हो सकी है। बाघ की पहचान न होने से वन विभाग यह भी पता नहीं लगा पा रहा है कि मिहीलाल पर हमला करने वाला बाघ दो दिन पूर्व केवल प्रसाद पर हमला करने वाला बाघ ही है या कोई दूसरा। सूत्रों की मानें तो कैमरों में अब तक कोई शावक का फोटो नहीं आया है लेकिन अब तक आए फोटो में एक से अधिक बाघ होने की संभावनाएं प्रतीत हो रही हैं। ऐसे में यदि बाघ की समय रहते पहचान कर जंगल में न खदेड़ा गया तो मुश्किल और बढ़ सकती है।
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घायल बाघ के बाबत नहीं मिला निर्देश
घटना स्थल से कुछ दूरी पर ही करीब 20-25 दिन पूर्व एक बाघ घायल अवस्था में देखा गया था जिसका अगला पैर चोट के कारण सूजा हुआ था। इस पर वनाधिकारियों को प्रमुख वन संरक्षक को रिपोर्ट भेजा दिशा निर्देश मांगे थे ताकि बाघ समय रहते इलाज कराया जा सके लेकिन अब कोई निर्देश नहीं मिला है। ऐसे में घायल बाघ का न तो बेहोश कर इलाज हो पा रहा है और न ही उसे इलाज के लिए चिड़ियाघर भेजा जा रहा है। इस बाबत जानकारी करने पर एसडीओ केपी सिंह ने बताया कि कैमरे लगाए गए हैं। कैमरों की जांच के बाद ही स्थिति सामने आएगी। अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
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बाघ देख रोपाई कर रहे किसान भागे
मझोला। अमरिया क्षेत्र में जंगल से बाहर घूम रहा बाघों का परिवार आम जनता के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। शुक्रवार को शुक्ला फार्म के बिशनपुर में दोपहर के समय धान की रोपाई कर रहे किसान एवं मजूदरों ने बाघ को खेतों में घूमते देखा। इससे उनके होश उड़ गए और घबराए किसान-मजदूर रोपाई छोड़कर भाग गए। किसान प्रशांत शुक्ला ने इसकी जानकारी वन विभाग को दी लेकिन कोई वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। इससे ग्रामीणों में दहशत है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि पांच दिन पूर्व किसान पर बाघ ने हमला किया था लेकिन बेटे की मदद के चलते बाघ किसान को घायल कर चला गया। डीएफओ आदर्श कुमार ने बताया उन्हें सूचना मिली है, टीम भेजी गई है।
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20 जून को न्यूरिया थाना क्षेत्र के गांव शिवपुरिया निवासी मिहीलाल पर बाघ ने हमला कर उस समय मार डाला था जब वह घर से करीब एक किमी दूर सरदूल सिंह के गन्ने के खेत में घास काट रहा था। घटना के बाद हमलावर बाघ को लेकर कई चर्चाएं थी। कोई जंगल में घायल घूम रहे बाघ द्वारा हमला करने की बात कह रहा था तो कुछ लोगों ने मिहीलाल के शव के पास दो शावकों को देखने की बात की थी। घटना के दूसरे दिन मुख्य वन संरक्षक एवं दुधवा नेशनल पार्क के डायरेक्टर सुनील चौधरी एवं वन संरक्षक वीके सिंह हमलावर की पहचान और क्षेत्र की निगरानी के लिए कैमरे लगाने के निर्देश दिए थे। अधिकारियों के निर्देश पर जंगल के अंदर और घटना स्थल के आसपास करीब एक दर्जन से अधिक कैमरे लगाए गए थे। अब तक हमलावर बाघ की पहचान नहीं हो सकी है। बाघ की पहचान न होने से वन विभाग यह भी पता नहीं लगा पा रहा है कि मिहीलाल पर हमला करने वाला बाघ दो दिन पूर्व केवल प्रसाद पर हमला करने वाला बाघ ही है या कोई दूसरा। सूत्रों की मानें तो कैमरों में अब तक कोई शावक का फोटो नहीं आया है लेकिन अब तक आए फोटो में एक से अधिक बाघ होने की संभावनाएं प्रतीत हो रही हैं। ऐसे में यदि बाघ की समय रहते पहचान कर जंगल में न खदेड़ा गया तो मुश्किल और बढ़ सकती है।
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घायल बाघ के बाबत नहीं मिला निर्देश
घटना स्थल से कुछ दूरी पर ही करीब 20-25 दिन पूर्व एक बाघ घायल अवस्था में देखा गया था जिसका अगला पैर चोट के कारण सूजा हुआ था। इस पर वनाधिकारियों को प्रमुख वन संरक्षक को रिपोर्ट भेजा दिशा निर्देश मांगे थे ताकि बाघ समय रहते इलाज कराया जा सके लेकिन अब कोई निर्देश नहीं मिला है। ऐसे में घायल बाघ का न तो बेहोश कर इलाज हो पा रहा है और न ही उसे इलाज के लिए चिड़ियाघर भेजा जा रहा है। इस बाबत जानकारी करने पर एसडीओ केपी सिंह ने बताया कि कैमरे लगाए गए हैं। कैमरों की जांच के बाद ही स्थिति सामने आएगी। अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
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बाघ देख रोपाई कर रहे किसान भागे
मझोला। अमरिया क्षेत्र में जंगल से बाहर घूम रहा बाघों का परिवार आम जनता के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। शुक्रवार को शुक्ला फार्म के बिशनपुर में दोपहर के समय धान की रोपाई कर रहे किसान एवं मजूदरों ने बाघ को खेतों में घूमते देखा। इससे उनके होश उड़ गए और घबराए किसान-मजदूर रोपाई छोड़कर भाग गए। किसान प्रशांत शुक्ला ने इसकी जानकारी वन विभाग को दी लेकिन कोई वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। इससे ग्रामीणों में दहशत है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि पांच दिन पूर्व किसान पर बाघ ने हमला किया था लेकिन बेटे की मदद के चलते बाघ किसान को घायल कर चला गया। डीएफओ आदर्श कुमार ने बताया उन्हें सूचना मिली है, टीम भेजी गई है।