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प्रदर्शन की सूचना पर छावनी बनी जामा मस्जिद
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पीलीभीत। जामा मस्जिद कमेटी के पदाधिकारियों और आस्थान-ए- आलिया हशमतिया के सज्जादानशीन मौलाना जरताब रजा खां के बीच चल रहे विवाद ने पुलिस और प्रशासन की टेंशन उस वक्त बढ़ा दी, जब कुछ लोगों द्वारा हंगामा करने की सूचना मिली। इसकी भनक लगते ही बड़ी संख्या में फोर्स मोहल्ला देशनगर स्थित ताजुल औलिया थाली वाली मस्जिद पहुंच गई। नमाज के बाद अब नमाजी बाहर निकले तो सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ सिटी ने कमेटी के सदस्यों से वार्ता की और ज्ञापन लेने के बाद मामला शांत करा दिया। इस दौरान मोहल्ला में अफरा तफरी का माहौल बन रहा।
मोहल्ला देशनगर में ताजुल औलिया थाली वाली मस्जिद में शुक्रवार को दोपहर डेढ़ बजे नमाज के बाद मौलाना जरताब रजा के विरोध में हंगामा और प्रदर्शन की सूचना प्रशासन को मिली थी। हालांकि वहां विरोध प्रदर्शन करने के बजाये मस्जिद कमेटी की ओर डीएम को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार को सौंपा गया। जिसमें कहा गया कि ईद उल मिलादुन्नबी धूमधाम से मनाते हैं। शहर में भी अपनी श्रद्धानुसार लोग जुलूस निकालते है मगर सदर कोतवाली के मोहल्ला भूरेखां/हशमतनगर निवार जरताब रजा खां खुद को शहर मुफ्ती/काजी दर्शाकर पुलिस और प्रशासन को गुमराह निजी जुलूस को निकालते हैं। उनका कहना है कि जरताब रजा शहर मुफ्ती/काजी नहीं हैं। सरकारी दस्तावेजों जुलूस शहर मुफ्ती की कवायद में परंपरागत है मगर जरताब रजा खुद शहर मुफ्ती बनकर जुलूस की अगुवाई करने लगते हैं।
कमेटी के लोगों ने कहा कि वह सिर्फ अपने पिता की दरगाह के सज्जादानशीन हैं। जुलूस के दौरान दूसरा जुलूस उसमें शामिल नहीं होने देते हैं। जिससे मुस्लिम समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है। धार्मिक जुलूस के बहाने विवादित टिप्पणी कर शहर में शांति व्यवस्था को खतरा पैदा कर देते हैं। इसको देखते हुए इस बार अगर जुलूस की सदारत जरताब रजा करेंगे तो सभी मिलकर उसका विरोध करेंगे।
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ज्ञापन में यह भी कहा गया कि दरगाह अल्लाहूं मियां से निकले वाला जुलूस हजरत मुफ्ती हसन मियां कदीरी की कयादत में निकलता था मगर 2015 में कुछ असामाजिक तत्वों ने इस जुलूस पर षड्यंत्र के तहत विवाद करा दिया और जुलूस पर प्रतिबंध लगवा दिया था। जिससे बड़ी संख्या में लोग जुलूस में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। इससे लोगों में आक्रोश है। ज्ञापन में हसन मियां कदीरी की सदारत में निकलने वाले जुलूस को अनुमति की मांग की गई है। इस संबंध में जरताब रजा से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनसे संपर्क नहीं हो सका।
09 पीबीटीपी 14
ये है विवाद
सदर कोतवाली निवासी मशामिद हशमत ने पांच सितंबर को मस्जिद कमेटी के सचिव सिराज बहादुर खां, उनके पुत्र अरशान खां, अनस खां, उमैर खां ने दो-तीन अज्ञात साथियों के साथ मिलकर मारपीट समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस पर आरोपी पक्ष की महिलाओं ने छह सितंबर का एसपी से मिलकर गलत तरीके से कार्रवाई करने की बात कही। सदर कोवताली पुलिस पर भी मिलीभगत का आरोप लगाया था। मामले में लोगों के काफी आक्रोश था। इसी को लेकर शुक्रवार को जामा मस्जिद में जुमे की नमाज के बाद विरोध प्रदर्शन की पुलिस को आशंका थी। एएसपी डॉ. पवित्र मोहन त्रिपाठी के नेतृत्व में सीओ सिटी सुनील दत्त, सीओ सदर सुशील कुमार शुक्ला, सीओ प्रशिक्षु प्रतीक कुमार दहिया के अलावा कोतवाली, सुनगढ़ी, गजरौला की फोर्स को लगाया गया था। 150 अतिरिक्त पुलिस कर्मियों तैनात किया गया था। हालांकि नमाज अदा करने के बाद शांति व्यवस्था के साथ नमाजी घर लौट गए। इसके बाद मस्जिद से फोर्स को हटाया गया था।
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मोहल्ला देशनगर में ताजुल औलिया थाली वाली मस्जिद में शुक्रवार को दोपहर डेढ़ बजे नमाज के बाद मौलाना जरताब रजा के विरोध में हंगामा और प्रदर्शन की सूचना प्रशासन को मिली थी। हालांकि वहां विरोध प्रदर्शन करने के बजाये मस्जिद कमेटी की ओर डीएम को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार को सौंपा गया। जिसमें कहा गया कि ईद उल मिलादुन्नबी धूमधाम से मनाते हैं। शहर में भी अपनी श्रद्धानुसार लोग जुलूस निकालते है मगर सदर कोतवाली के मोहल्ला भूरेखां/हशमतनगर निवार जरताब रजा खां खुद को शहर मुफ्ती/काजी दर्शाकर पुलिस और प्रशासन को गुमराह निजी जुलूस को निकालते हैं। उनका कहना है कि जरताब रजा शहर मुफ्ती/काजी नहीं हैं। सरकारी दस्तावेजों जुलूस शहर मुफ्ती की कवायद में परंपरागत है मगर जरताब रजा खुद शहर मुफ्ती बनकर जुलूस की अगुवाई करने लगते हैं।
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कमेटी के लोगों ने कहा कि वह सिर्फ अपने पिता की दरगाह के सज्जादानशीन हैं। जुलूस के दौरान दूसरा जुलूस उसमें शामिल नहीं होने देते हैं। जिससे मुस्लिम समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है। धार्मिक जुलूस के बहाने विवादित टिप्पणी कर शहर में शांति व्यवस्था को खतरा पैदा कर देते हैं। इसको देखते हुए इस बार अगर जुलूस की सदारत जरताब रजा करेंगे तो सभी मिलकर उसका विरोध करेंगे।
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ज्ञापन में यह भी कहा गया कि दरगाह अल्लाहूं मियां से निकले वाला जुलूस हजरत मुफ्ती हसन मियां कदीरी की कयादत में निकलता था मगर 2015 में कुछ असामाजिक तत्वों ने इस जुलूस पर षड्यंत्र के तहत विवाद करा दिया और जुलूस पर प्रतिबंध लगवा दिया था। जिससे बड़ी संख्या में लोग जुलूस में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। इससे लोगों में आक्रोश है। ज्ञापन में हसन मियां कदीरी की सदारत में निकलने वाले जुलूस को अनुमति की मांग की गई है। इस संबंध में जरताब रजा से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनसे संपर्क नहीं हो सका।
09 पीबीटीपी 14
ये है विवाद
सदर कोतवाली निवासी मशामिद हशमत ने पांच सितंबर को मस्जिद कमेटी के सचिव सिराज बहादुर खां, उनके पुत्र अरशान खां, अनस खां, उमैर खां ने दो-तीन अज्ञात साथियों के साथ मिलकर मारपीट समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस पर आरोपी पक्ष की महिलाओं ने छह सितंबर का एसपी से मिलकर गलत तरीके से कार्रवाई करने की बात कही। सदर कोवताली पुलिस पर भी मिलीभगत का आरोप लगाया था। मामले में लोगों के काफी आक्रोश था। इसी को लेकर शुक्रवार को जामा मस्जिद में जुमे की नमाज के बाद विरोध प्रदर्शन की पुलिस को आशंका थी। एएसपी डॉ. पवित्र मोहन त्रिपाठी के नेतृत्व में सीओ सिटी सुनील दत्त, सीओ सदर सुशील कुमार शुक्ला, सीओ प्रशिक्षु प्रतीक कुमार दहिया के अलावा कोतवाली, सुनगढ़ी, गजरौला की फोर्स को लगाया गया था। 150 अतिरिक्त पुलिस कर्मियों तैनात किया गया था। हालांकि नमाज अदा करने के बाद शांति व्यवस्था के साथ नमाजी घर लौट गए। इसके बाद मस्जिद से फोर्स को हटाया गया था।