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Pilibhit News: फर्जी कॉल सेंटर गिरोह का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, छह आरोपी धरे, एक नेपाल का भी शामिल
Sat, 06 Dec 2025 11:32 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Sat, 06 Dec 2025 11:32 PM IST
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आरोपी कुनाल।
घुंघचाई (पीलीभीत)। थाना पुलिस ने फर्जी कॉल सेंटर चलाने वाले गिरोह के छह अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरोह का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क था। पकड़े गए आरोपियों में एक नेपाल जबकि अन्य गुजरात, भोपाल, उत्तराखंड आदि राज्यों के रहने वाले हैं। दो दिन पूर्व जेल भेज गए आरोपियों से पूछताछ में मिले अहम सुरागों के बाद पुलिस ने रुद्रपुर में छापा मारकर आरोपियों की धरपकड़ की है। उनके पास से मोबाइल, लैपटॉप, सिम समेत अन्य उपकरण भी बरामद किए। पुलिस की जांच में करीब 5.54 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा हुआ है। पुलिस ने खुलासे के बाद आरोपियों का चालान कर दिया।
घुंघचाई पुलिस ने तीन दिन पूर्व फर्जी कॉल सेंटर गिरोह का खुलासा किया था। मामले में थाना क्षेत्र के हरीपुर ताल्लुके अजीतपुर बिल्हा निवासी अमृतपाल समेत तीन आरोपियों को पुलिस ने पकड़ा था। पूछताछ में सामने आया था कि अमृत पाल ने दुबई में नौकरी करने के दौरान कॉल सेंटर संचालन के तौर तरीके सीखे और फिर गांव आकर फर्जीवाड़े की शुरुआत की। देशभर के लोगों को गेमिंग एप के जरिए रुपये कमाने का लालच देकर साइबर ठगी को अंजाम दिया जाने लगा। जांच में सामने आया कि करीब पांच राज्यों के हजारों लोगों को ठगी का शिकार बनाया। क्षेत्र के रहने वाले बीसी केंद्र संचालक की शिकायत की जांच के बाद पुलिस अमृतपाल तक पहुंची थी। फर्जी सिम और रुपये का ट्रांजेक्शन कराने वाले उसके दो सहयोगी क्षेत्र के ही धमेंद्र और प्रियांशु को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
इधर आरोपी अमृतपाल सिंह से हुई पूछताछ के आधार पर पुलिस ने रुद्रपुर स्थित फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारा। इसके बाद छह आरोपी पकड़े गए। इनमें एक नेपाल व अन्य देश के अलग-अलग राज्यों के रहने वाले हैं। सभी वर्तमान में गाबा चौक, रुद्रपुर में रहकर कॉल सेंटर चला रहे थे। गिरोह के पास से 13 मोबाइल फोन, 13 लैपटॉप, कंप्यूटर सिस्टम, यूएई का सिम, अन्य सिम कार्ड, प्रिंटर, नकदी समेत भारी मात्रा में उपकरण बरामद किए। पुलिस जांच में सामने आया है कि गैंग अब तक पांच करोड़ 54 लाख रुपये से अधिक का इन्वेस्टमेंट ठगी के जरिए करा चुका था। सभी आरोपियों को जेल भेज दिया है।
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ये आरोपी हुए गिरफ्तार
- मनजीत सिंह उर्फ सोनू (गिरोह संचालक), निवासी बसंतपुर नौनेर, माधोटांडा, पीलीभीत
- विक्रांत पंडित उर्फ विक्की, मूल निवासी गुजरात, हाल रुद्रपुर उत्तराखंड
- चक्र खड़का, मूल निवासी नेपाल, हाल रुद्रपुर उत्तराखंड
- कपिल मेहरा, मूल निवासी भोपाल, हाल रुद्रपुर उत्तराखंड
- कुनाल प्रजापति, मूल निवासी भोपाल, हाल रुद्रपुर उत्तराखंड
- प्रशांत सिंह, मूल निवासी भोपाल, हाल रुद्रपुर उत्तराखंड
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दुबई में ट्रेनिंग लेकर शुरू किया साइबर फ्रॉड
पूछताछ में गिरोह सरगना मनजीत सिंह ने बताया कि वह अगस्त 2024 में दुबई गया था, जहां विक्की और अमृतपाल से उसकी मुलाकात हुई। विक्की ने उसे कॉल सेंटर में काम दिलाया, जहां 35,000 रुपये प्रतिमाह वेतन पर उसने पूरा साइबर फ्रॉड सिस्टम सीख लिया। कुछ समय बाद वह अमृतपाल के साथ भारत लौट आया और रुद्रपुर व माधोटांडा में फर्जी कॉल सेंटर संचालित करने लगा।
ऐसे करते थे साइबर ठगी
पूछताछ में गिरोह संचालक मनजीत सिंह ने बताया कि वह 2024 में दुबई गया था, जहां उसकी मुलाकात विक्की और अमृतपाल से हुई। विक्की ने उसे कॉल सेंटर में नौकरी दिलाई, जहां उसने साइबर ठगी के पूरे तरीके सीख लिए। कुछ महीनों बाद वह और अमृतपाल पीलीभीत लौट आए और अलग-अलग स्थानों रुद्रपुर और माधोटांडा से कॉल सेंटर संचालित करने लगे। गिरोह फेयरप्ले247.गेम्स वेबसाइट से जुड़े फ्रोजन सॉफ्टवेयर और डायलर के जरिए लोगों को कॉल कर एवियेटर, रम्मी जैसे गेम खेलने के लिए लालच देते थे। शुरुआत में पीड़ितों को बड़ी रकम का इनाम जीतवाकर भरोसा दिलाया जाता था और उनके बैंक खाते की जानकारी हासिल की जाती थी। बाद में पूरा अकाउंट खाली कर दिया जाता था। गिरोह डार्क वेब से गेम में रुचि रखने वाले लोगों का डेटा भी खरीदता था।
विक्रांत उर्फ विक्की था ट्रेनर
पूछताछ में सामने आया कि विक्रांत उर्फ विक्की गिरोह का ट्रेनर है, जबकि प्रियांशु दीक्षित और धर्मेंद्र कुमार इन्हें फर्जी सिम और बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। पूछताछ में यह भी कपिल व कुनाल कॉलिंग करते थे और प्रशांत चैटिंग से ग्राहकों को फंसाने का काम करता था। पुलिस के अनुसार कई आरोपी अपनी गर्लफ्रेंड के महंगे शौक और नशे की लत पूरी करने के लिए इस गैंग से जुड़े थे।
लाखों यूजर के डेटा मिले, करोड़ों का इनवेस्टमेंट
पुलिस के मुताबिक चक्र खड़का के लैपटॉप में मौजूद एयरप्ले एप से 50 हजार से ज्यादा यूजर लॉगिन मिले, जिनमें से करीब 20 हजार लोगों ने पैसे इन्वेस्ट किए थे।
इसके अलावा विक्रांत और चक्र खड़का के मोबाइल में मौजूद 11,739 यूजर आईडी से 5,54,40,242 रुपये इन्वेस्टमेंट किए जाने की पुष्टि हुई है। सीओ प्रतीक दहिया के बताया कि गैंग को फर्जी सिम कार्ड और बैंक खाते प्रियांशु दीक्षित, धर्मेंद्र कुमार और गोरखपुर निवासी राकेश की ओर से उपलब्ध कराए जाते थे। पुलिस इस नेटवर्क का भी पता लगा रही है। थाना प्रभारी जयशंकर सिंह ने बताया कि आरोपियों के पकड़े जाने से साइबर ठगी पर बड़ा अंकुश लगेगा। सभी को मेडिकल परीक्षण के बाद जेल भेज दिया गया है।
देशभर से जुड़े साइबर फ्रॉड के मामले, दिल्ली भागने की फिराक में थे आरोपी
- गिरोह जिन बैंक खातों का इस्तेमाल करता था, उन पर उड़ीसा, तमिलनाडु, बिहार, कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कई साइबर ठगी मामलों के चलते होल्ड लगा हुआ है। पुलिस मोबाइल नंबरों, आईएमईआई, बैंक खातों और आधार कार्डों की जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके। अमृतपाल की गिरफ्तारी के बाद गिरोह रुद्रपुर से भागकर माधोटांडा में छिपा हुआ था और दिल्ली भागने की फिराक में था, लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का दावा है कि गिरोह की धरपकड़ से साइबर ठगी के मामलों पर बड़ा अंकुश लगेगा।
इन बातों का रखें खास ख्याल
- किसी से भी अपनी व्यक्तिगत या बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें।
- लाटरी या यात्रा संबंधी पैकेज में छूट आदि संदेशों से बचें।
- मोबाइल पर आने वाले एपीके फाइल डाउनलोड न करें।
- लुभावने विज्ञापन टास्क से रुपये जीतने आदि के लालच में न फंसें।
- साइबर ठगी का शिकार होने पर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
- किसी भी तरह की समस्या होने पर संबंधित थाना या साइबर थाने में भी संपर्क करें।
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घुंघचाई पुलिस ने तीन दिन पूर्व फर्जी कॉल सेंटर गिरोह का खुलासा किया था। मामले में थाना क्षेत्र के हरीपुर ताल्लुके अजीतपुर बिल्हा निवासी अमृतपाल समेत तीन आरोपियों को पुलिस ने पकड़ा था। पूछताछ में सामने आया था कि अमृत पाल ने दुबई में नौकरी करने के दौरान कॉल सेंटर संचालन के तौर तरीके सीखे और फिर गांव आकर फर्जीवाड़े की शुरुआत की। देशभर के लोगों को गेमिंग एप के जरिए रुपये कमाने का लालच देकर साइबर ठगी को अंजाम दिया जाने लगा। जांच में सामने आया कि करीब पांच राज्यों के हजारों लोगों को ठगी का शिकार बनाया। क्षेत्र के रहने वाले बीसी केंद्र संचालक की शिकायत की जांच के बाद पुलिस अमृतपाल तक पहुंची थी। फर्जी सिम और रुपये का ट्रांजेक्शन कराने वाले उसके दो सहयोगी क्षेत्र के ही धमेंद्र और प्रियांशु को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
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इधर आरोपी अमृतपाल सिंह से हुई पूछताछ के आधार पर पुलिस ने रुद्रपुर स्थित फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारा। इसके बाद छह आरोपी पकड़े गए। इनमें एक नेपाल व अन्य देश के अलग-अलग राज्यों के रहने वाले हैं। सभी वर्तमान में गाबा चौक, रुद्रपुर में रहकर कॉल सेंटर चला रहे थे। गिरोह के पास से 13 मोबाइल फोन, 13 लैपटॉप, कंप्यूटर सिस्टम, यूएई का सिम, अन्य सिम कार्ड, प्रिंटर, नकदी समेत भारी मात्रा में उपकरण बरामद किए। पुलिस जांच में सामने आया है कि गैंग अब तक पांच करोड़ 54 लाख रुपये से अधिक का इन्वेस्टमेंट ठगी के जरिए करा चुका था। सभी आरोपियों को जेल भेज दिया है।
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ये आरोपी हुए गिरफ्तार
- मनजीत सिंह उर्फ सोनू (गिरोह संचालक), निवासी बसंतपुर नौनेर, माधोटांडा, पीलीभीत
- विक्रांत पंडित उर्फ विक्की, मूल निवासी गुजरात, हाल रुद्रपुर उत्तराखंड
- चक्र खड़का, मूल निवासी नेपाल, हाल रुद्रपुर उत्तराखंड
- कपिल मेहरा, मूल निवासी भोपाल, हाल रुद्रपुर उत्तराखंड
- कुनाल प्रजापति, मूल निवासी भोपाल, हाल रुद्रपुर उत्तराखंड
- प्रशांत सिंह, मूल निवासी भोपाल, हाल रुद्रपुर उत्तराखंड
दुबई में ट्रेनिंग लेकर शुरू किया साइबर फ्रॉड
पूछताछ में गिरोह सरगना मनजीत सिंह ने बताया कि वह अगस्त 2024 में दुबई गया था, जहां विक्की और अमृतपाल से उसकी मुलाकात हुई। विक्की ने उसे कॉल सेंटर में काम दिलाया, जहां 35,000 रुपये प्रतिमाह वेतन पर उसने पूरा साइबर फ्रॉड सिस्टम सीख लिया। कुछ समय बाद वह अमृतपाल के साथ भारत लौट आया और रुद्रपुर व माधोटांडा में फर्जी कॉल सेंटर संचालित करने लगा।
ऐसे करते थे साइबर ठगी
पूछताछ में गिरोह संचालक मनजीत सिंह ने बताया कि वह 2024 में दुबई गया था, जहां उसकी मुलाकात विक्की और अमृतपाल से हुई। विक्की ने उसे कॉल सेंटर में नौकरी दिलाई, जहां उसने साइबर ठगी के पूरे तरीके सीख लिए। कुछ महीनों बाद वह और अमृतपाल पीलीभीत लौट आए और अलग-अलग स्थानों रुद्रपुर और माधोटांडा से कॉल सेंटर संचालित करने लगे। गिरोह फेयरप्ले247.गेम्स वेबसाइट से जुड़े फ्रोजन सॉफ्टवेयर और डायलर के जरिए लोगों को कॉल कर एवियेटर, रम्मी जैसे गेम खेलने के लिए लालच देते थे। शुरुआत में पीड़ितों को बड़ी रकम का इनाम जीतवाकर भरोसा दिलाया जाता था और उनके बैंक खाते की जानकारी हासिल की जाती थी। बाद में पूरा अकाउंट खाली कर दिया जाता था। गिरोह डार्क वेब से गेम में रुचि रखने वाले लोगों का डेटा भी खरीदता था।
विक्रांत उर्फ विक्की था ट्रेनर
पूछताछ में सामने आया कि विक्रांत उर्फ विक्की गिरोह का ट्रेनर है, जबकि प्रियांशु दीक्षित और धर्मेंद्र कुमार इन्हें फर्जी सिम और बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। पूछताछ में यह भी कपिल व कुनाल कॉलिंग करते थे और प्रशांत चैटिंग से ग्राहकों को फंसाने का काम करता था। पुलिस के अनुसार कई आरोपी अपनी गर्लफ्रेंड के महंगे शौक और नशे की लत पूरी करने के लिए इस गैंग से जुड़े थे।
लाखों यूजर के डेटा मिले, करोड़ों का इनवेस्टमेंट
पुलिस के मुताबिक चक्र खड़का के लैपटॉप में मौजूद एयरप्ले एप से 50 हजार से ज्यादा यूजर लॉगिन मिले, जिनमें से करीब 20 हजार लोगों ने पैसे इन्वेस्ट किए थे।
इसके अलावा विक्रांत और चक्र खड़का के मोबाइल में मौजूद 11,739 यूजर आईडी से 5,54,40,242 रुपये इन्वेस्टमेंट किए जाने की पुष्टि हुई है। सीओ प्रतीक दहिया के बताया कि गैंग को फर्जी सिम कार्ड और बैंक खाते प्रियांशु दीक्षित, धर्मेंद्र कुमार और गोरखपुर निवासी राकेश की ओर से उपलब्ध कराए जाते थे। पुलिस इस नेटवर्क का भी पता लगा रही है। थाना प्रभारी जयशंकर सिंह ने बताया कि आरोपियों के पकड़े जाने से साइबर ठगी पर बड़ा अंकुश लगेगा। सभी को मेडिकल परीक्षण के बाद जेल भेज दिया गया है।
देशभर से जुड़े साइबर फ्रॉड के मामले, दिल्ली भागने की फिराक में थे आरोपी
- गिरोह जिन बैंक खातों का इस्तेमाल करता था, उन पर उड़ीसा, तमिलनाडु, बिहार, कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कई साइबर ठगी मामलों के चलते होल्ड लगा हुआ है। पुलिस मोबाइल नंबरों, आईएमईआई, बैंक खातों और आधार कार्डों की जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके। अमृतपाल की गिरफ्तारी के बाद गिरोह रुद्रपुर से भागकर माधोटांडा में छिपा हुआ था और दिल्ली भागने की फिराक में था, लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का दावा है कि गिरोह की धरपकड़ से साइबर ठगी के मामलों पर बड़ा अंकुश लगेगा।
इन बातों का रखें खास ख्याल
- किसी से भी अपनी व्यक्तिगत या बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें।
- लाटरी या यात्रा संबंधी पैकेज में छूट आदि संदेशों से बचें।
- मोबाइल पर आने वाले एपीके फाइल डाउनलोड न करें।
- लुभावने विज्ञापन टास्क से रुपये जीतने आदि के लालच में न फंसें।
- साइबर ठगी का शिकार होने पर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
- किसी भी तरह की समस्या होने पर संबंधित थाना या साइबर थाने में भी संपर्क करें।

आरोपी कुनाल।

आरोपी कुनाल।

आरोपी कुनाल।

आरोपी कुनाल।

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