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बरखेड़ा विधायक समेत 16 के खिलाफ एफआईआर के आदेश

अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Updated Sun, 22 Dec 2019 03:54 AM IST
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बरखेड़ा के भाजपा विधायक किशनलाल राजपूत, उनके भांजे ऋषभ समेत 16 नामजद और 40 अज्ञात समर्थकों पर एफआईआर दर्ज की जाएगी। डीएम के गनर रहे मोहित गुर्जर की ओर से दाखिल किए गए प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए) विवेक कुमार ने सुनगढ़ी पुलिस को रिपोर्ट दर्ज करके 15 दिन के भीतर एफआईआर की कॉपी न्यायालय भेजने को कहा है।
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ककरौली (मुजफ्फरनगर) के कटिया गांव निवासी सिपाही मोहित कुमार गुर्जर का कहना है कि उसकी तैनाती डीएम पीलीभीत के गनर के तौर पर थी। उसी दौरान उसने एक बाइक राहुल नाम के युवक से परिचित निरंजनकुंज कॉलोनी निवासी पुनीत गंगवार के माध्यम से खरीदी थी। कई बार कहने के बाद भी जब उसके नाम पर कागजात ट्रांसफर नहीं कराए तो उसने राहुल को बाइक वापस कर दी।
12 सितंबर (2019) की रात राहुल ने पीड़ित को रुपये लौटाने के लिए नवीन मंडी समिति गेट के पास बुलाया। इस पर मोहित अपने परिचित पुनीत गंगवार के साथ वहां पहुंचा। वहां पर राहुल के साथ विधायक बरखेड़ा किशनलाल राजपूत का भांजा रामअवतार उर्फ ऋषभ और अन्य लड़के थे। रुपये वापस मांगने पर ऋषभ ने राहुल का पक्ष लेते गालियां देते हुए पीटना शुर कर दिया।
इसके बाद ऋषभ ने जानलेवा हमले के लिए फायर भी किया। इसके बाद सोने की चेन और पर्स छीन लिया। किसी तरह जान बचाकर वह (मोहित) असम रोड पुलिस चौकी पहुंचा। पीछे से हमलावर भी आ गए। फोन कर विधायक किशनलाल राजपूत को भी चौकी बुला लिया। सभी ने मारपीट की। ऋषभ ने चौकी परिसर में ही गला दबाकर जान लेने की कोशिश की।

चौकी पर मौजूद अधिकारी-पुलिसकर्मी विधायक के दबाव में बेबस बने रहे। आरोप है कि इसके बाद सत्ता के दबाव में उसके खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज कराकर जेल भेज दिया। वहीं उसकी ओर से दी गई तहरीर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। एसपी को 26 सितंबर को डाक से प्रार्थना पत्र भेजा, फिर भी सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद 28 सितंबर को सिपाही ने कोर्ट की शरण ली। इसके बाद अब विधायक बरखेड़ा समेत 16 नामजद, 40 अज्ञात पर एफआईआर के आदेश किए हैं।

ये किए तहरीर में नामजद
विधायक बरखेड़ा किशनाल राजपूत, उनका भांजा ऋषभ, के अलावा इस मामले में 14 अन्य आरोपी राहुल, सिंटू सिंह पुत्र सुरेश सिंह, बंटी सिंह पुत्र सुरेश सिंह, अमित गंगवार पुत्र महाराज गंगवार, धर्मेंद्र सिंह चौहान पुत्र रणवीर चौहान, विशाल शुक्ला, कमल सिंह उर्फ भूरा, टोनी चौहान पुत्र प्रेमपाल सिंह चौहान, बच्चू सिंह पुत्र प्रेमपाल सिंह चौहान, चंद्रपाल सिंह उर्फ चंदू पुत्र भूपराम, विनय सिंह पुत्र गिरिराज सिंह, रामगोपाल पुत्र रामपाल, हर्षित चौधरी, प्रेम नरायण वर्मा के नाम प्रार्थना पत्र लिखे हैं। रिपोर्ट होने पर उसमें ये सभी नामजद होंगे।

विधायक पर जूतों से पीटने का आरोप
सिपाही मोहित गुर्जर ने दिए गए प्रार्थना पत्र में विधायक बरखेड़ा किशनलाल राजपूत के खिलाफ संगीन आरोप लगाए हैं। उसका कहना है पुलिस चौकी में समर्थकों संग आए विधायक ने जूतों से पिटाई की और फिर पेशाब पिलाने के लिए भी कहा गया।

विधायक बोले-सिपाही के आरोप सरासर गलत
 बरखेड़ा विधायक किशनलाल राजपूत का कहना है कि सिपाही मोहित गूर्जर के उन पर लगाए गए आरोप सरासर गलत हैं। अभी न्यायालय का आदेश उनके संज्ञान में नहीं है। इसलिए इस पर वह कुछ नहीं कहना चाहते। मगर, यह मामला केवल बाइक का था। मोहित गूर्जर ने उनके भांजे ऋषभ को मंडी समिति गेट पर धक्का देकर गिराया था।

उसके बाद सिपाही ने उसे एफसीआई गोदाम पर ले जाकर मारा। उसे मार-मारकर अधमरा कर दिया। फिर सिपाही ऋषभ को लेेकर पुलिस चौकी गया। मैने ऋषभ के गायब होने की सूचना डीएम-एसपी समेत अन्य अफसरों को दी थी। उसके बाद वह भी असम रोड पुलिस चौकी पर एक-डेढ़ घंटे बाद पहुंचे। उनकी शिकायत की जांच एडीजी स्तर से की गई। हमें शक था कि मोहित सिपाही नहीं है, लेकिन वह जांच में सिपाही निकला। न्यायालय का आदेश देखने के बाद ही इस विषय पर कुछ कहा जा सकता है।

शासन तक गूंजता रहा विधायक के भांजे और सिपाही के बीच विवाद
पीलीभीत। बरखेड़ा विधायक किशनलाल राजपूत के भांजे ऋषभ और सिपाही मोहित गुर्जर के बीच हुए विवाद की गूंज शासन तक रही थी। सिपाही के जेल जाने के बाद उसके समर्थन में गुर्जर महासभा, सपा के कई बाहरी नेता आंदोलन को आगे आए तो मामला पलट गया था। सिपाही पर लगी संगीन धाराएं हटा दी गईं। फिर वह जमानत पर भी छूट गया। इस पूरी घटना की जांच शासन के निर्देश पर आए लखनऊ से आए वहां के एडीजी जोन ने की थी।

12 सितंबर की रात हुई इस घटना के बाद काफी हंगामा हुआ था। सिपाही पर विधायक के भांजे ऋषभ को अगवा कर कार में डालकर डेढ़ घंटे तक बंधक बनाकर रखने और अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर जानलेवा हमला करते हुए पीटने के आरोप थे। विधायक के भांजे की ओर से सिपाही मोहित गुर्जर, उसके साथी पुनीत गंगवार, डोडो आदि के खिलाफ लूट, जानलेवा हमला, अपहरण की संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी। इन्हीं धाराओं में तीनों का चालान कर जेल भेज दिया था।

सिपाही के जेल जाने के बाद मामला तूल पकड़ गया। सिपाही के समर्थन में गुर्जर महासभा, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता अतुल प्रधान समेत कई अन्य भी उतर आए थे। लखनऊ, बरेली, पीलीभीत के अधिकारियों से मुलाकात की गई। धरने प्रदर्शन का भी एलान किया गया। इसके बाद कार्रवाई को लेकर पुलिस का पलटवार हुआ। पुलिस ने मेडिकल परीक्षण रिपोर्ट और जांच का हवाला देते हुए कुछ दिन बाद ही अपहरण, जानलेवा हमला, लूट की धाराएं हटा दी गई। मामला बंधक बनाकर मारपीट में कर दिया गया।

यह पूरी कार्रवाई शासन से मिले निर्देशों के बाद किया जाना माना गया। धाराएं कम होते ही जेल गए सिपाही और उसके साथियों को जमानत मिल गई थी। उसके जेल से बाहर निकलने पर भी सपा नेता और गुर्जर महासभा के लोग यहां आए थे और स्वागत कर साथ ले गए थे। उसी दिन तय हो गया था कि विधायक और उनके साथियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कोर्ट की शरण ली जाएगी। इधर, शासन से भी इस मामले की जांच कराई गई। लखनऊ जोन के एडीजी पीलीभीत आए थे और सभी पक्षों के बयान लेकर वापस गए। उन्होंने अपनी रिपोर्ट शासन को दी थी।

अब न्यायालय बंदीगृह में तैनात है सिपाही
घटना के समय सिपाही मोहित गुर्जर डीएम के गनर के तौर पर तैनात था। अब भी उसकी तैनाती इसी जिले में है। उसकी तैनाती न्यायालय बंदीगृह में चल रही है।

पुलिस में भी बनने लगे थे गुट
इस घटना का असर पुलिस विभाग में देखने को मिल रहा था। सिपाही के समर्थन में पुलिस का निचला तबका गुटबाजी करने लगा था। सिपाही की ओर से कार्रवाई न होने पर अधिकारियों पर भी सवाल खड़े किए जा रहे थे।

एसपी के तबादले को भी इसी से जोड़कर देखा गया
विधायक के भांजे और सिपाही के बीच हुए विवाद कुछ समय बाद ही तत्कालीन एसपी मनोज कुमार सोनकर का तबादला हो गया था। व्यवहार से लेकर कार्रवाई तक उनकी कोई अन्य शिकायत नहीं चल रही थी। उनके तबादले को भी इसी विवाद से जोड़कर देखा गया था।

विधायक के कई वीडियो हुए थे वायरल
घटना के बाद विधायक बरखेड़ा किशनलाल राजपूत के कई वीडियो वायरल हुए थे। सिपाही की ओर से विधायक और उनके साथियों पर लगाए गए आरोपों की चर्चा उस वक्त भी रही थी। उसके वीडियो की तलाश भी पुलिसकर्मी गुपचुप तरीके से करते रहे थे, लेकिन कुछ मिल नहीं सका था।
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