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पानी के व्यवसायिक उपयोग पर नहीं होती कार्रवाई
Updated Sat, 23 Jul 2016 12:11 AM IST
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जिले में अमूमन हर साल भूजल सप्ताह मनाया जाता है। इन दिनों लोगों को जल संरक्षण और जल संचय के प्रति जागरूक किया जाता है लेकिन इसका नतीजा सिफर ही रहता है। बानगी के तौर पर अधिकांश घरों और औद्योगिक क्षेत्रों को ही देखें तो यह सब बरसों से सबमर्सिबल पंपों के जरिए पानी का अंधाधुंध दोहन कर रहे हैं। कुछ इससे मोटी कमाई भी कर रहे हैं, लेकिन कमाई के लिए धरती की कोख खाली करने वालों के खिलाफ न तो जिला प्रशासन सख्त है और न ही नगर पालिका परिषद।
शहर में करीब 50 से अधिक ऑटोवॉश सेंटर हैं। आधा दर्जन से ज्यादा वॉटर प्लांट भी लगे हैं। नगर पालिका परिषद घरेलू और कॉमर्शियल उपभोक्ताओं से वॉटर टैक्स वसूलता है, लेकिन पानी का अंधाधुंध इस्तेमाल करने वाले ऑटोवॉश सेंटरों और वॉटर प्लांटों से न तो नगर पालिका परिषद ही अभी तक कोई टैक्स वसूल पाई है और न ही इन पर रोक लगाने को लेकर कोई कार्रवाई की गई है। शहर में दर्जनों नर्सिंग होम, अस्पताल, होटल, रेेस्टोरेंट भी हैं, लेकिन इनमें कुछेक से ही वॉटर टैक्स वसूला जा रहा है। खास बात यह है कि जब नगर पालिका परिषद घरेलू और औद्योगिक संस्थाओं से टैक्स वसूलती है तो आज तक यह ऑटो वॉशिंग सेंटर और वॉटर प्लांट बिना टैक्स दिए कैसे संचालित हो रहे हैं, यह एक बड़ा सवाल है। इस मसले को लेकर पालिका बोर्ड की बैठक में भी हंगामा हुआ लेकिन इसके लिए बॉयलाज बनाने की बात कहकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
रोक लगाने का नहीं है फार्मूला
प्राकृतिक संपदा की बिक्री कर मोटी कमाई कर जेबें भर लोगों पर रोक लगाने का नगर पालिका परिषद के टैक्स अनुभाग के पास अभी तक कोई फार्मूला ही नहीं है। वहीं वर्कशॉप, होटल समेत शहर की पॉश कॉलोनियों में लगे सबमर्सिबल पंप को लेकर रोक लगाने की व्यवस्था नहीं है।
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वर्जन:
शहर के ऑटोवॉश सेंटरों और वॉटर प्लांटों को टैक्स के दायरे में लाने की कार्रवाई चल रही है। बायलाज बनाया रहा है। इसके बनते ही इन सभी से शुल्क वसूली की जाएगी।
- वीपी सिंह, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद
शहर में करीब 50 से अधिक ऑटोवॉश सेंटर हैं। आधा दर्जन से ज्यादा वॉटर प्लांट भी लगे हैं। नगर पालिका परिषद घरेलू और कॉमर्शियल उपभोक्ताओं से वॉटर टैक्स वसूलता है, लेकिन पानी का अंधाधुंध इस्तेमाल करने वाले ऑटोवॉश सेंटरों और वॉटर प्लांटों से न तो नगर पालिका परिषद ही अभी तक कोई टैक्स वसूल पाई है और न ही इन पर रोक लगाने को लेकर कोई कार्रवाई की गई है। शहर में दर्जनों नर्सिंग होम, अस्पताल, होटल, रेेस्टोरेंट भी हैं, लेकिन इनमें कुछेक से ही वॉटर टैक्स वसूला जा रहा है। खास बात यह है कि जब नगर पालिका परिषद घरेलू और औद्योगिक संस्थाओं से टैक्स वसूलती है तो आज तक यह ऑटो वॉशिंग सेंटर और वॉटर प्लांट बिना टैक्स दिए कैसे संचालित हो रहे हैं, यह एक बड़ा सवाल है। इस मसले को लेकर पालिका बोर्ड की बैठक में भी हंगामा हुआ लेकिन इसके लिए बॉयलाज बनाने की बात कहकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
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रोक लगाने का नहीं है फार्मूला
प्राकृतिक संपदा की बिक्री कर मोटी कमाई कर जेबें भर लोगों पर रोक लगाने का नगर पालिका परिषद के टैक्स अनुभाग के पास अभी तक कोई फार्मूला ही नहीं है। वहीं वर्कशॉप, होटल समेत शहर की पॉश कॉलोनियों में लगे सबमर्सिबल पंप को लेकर रोक लगाने की व्यवस्था नहीं है।
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वर्जन:
शहर के ऑटोवॉश सेंटरों और वॉटर प्लांटों को टैक्स के दायरे में लाने की कार्रवाई चल रही है। बायलाज बनाया रहा है। इसके बनते ही इन सभी से शुल्क वसूली की जाएगी।
- वीपी सिंह, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद