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नौ करोड़ से शुरू हुई सिल्ट सफाई
पीलीभीत।
Updated Wed, 10 Feb 2016 12:27 AM IST
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पीलीभीत से रायबरेली तक फसलों की सिंचाई के लिए पानी मुहैया कराने वाली हरदोई ब्रांच नहर में नौ करोड़ की लागत से सिल्ट सफाई का काम शुरू कराया गया है। सिल्ट की सफाई नहर के हेड से शुरू करने के बजाय 13.4 मील आगे अपस्ट्रीम से शुरू की गई है। इससे सिल्ट सफाई कार्य की गुणवत्ता पर प्रश्रचिन्ह लगता नजर आ रहा है।
पीलीभीत के अलावा शाहजहांपुर, हरदोई, लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली तक फसलों की सिंचाई के लिए वर्ष 1926 में बाइफरकेशन से हरदोई ब्रांच नहर निकाली गई थी। कई दशक तक तो नहर किसानों को उनकी मंशा के अनुरूप सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराती रही लेकिन धीरे-धीरे हरदोई ब्रांच नहर में पानी और उसका प्रवाह घटने लगा। अब सरकार ने इस नहर की सिल्ट सफाई कराने का निर्णय लिया है।
पहले रोस्टर के मुताबिक होती थी सिंचाई
नहरों में डिमांड के मुताबिक रबी एवं खरीफ की फसलों में पानी कब-कब दिया जाए, इसके लिए रोस्टर पर संयुक्त निदेशक कृषि विभाग, अधीक्षण अभियंता षष्टम मंडल सिंचाई, अधीक्षण अभियंता सिंचाई सीतापुर, अधीक्षण अभियंता पंचम मंडल एवं अधिशासी अभियंता हेड वर्क्स खंड के संयुक्त हस्ताक्षर से पानी सप्लाई होता था।
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नौ करोड़ से शुरू हुआ सिल्ट सफाई का कार्य
नहर में घटती जा रही पानी क्षमता को पुनर्जीवित करने को नौ करोड़ की लागत से सिल्ट सफाई की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को सौंपी गई है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद ठेकेदार द्वारा यहां कार्य आधा दर्जन मशीनों की मदद से शुरू कराया गया है। यह कार्य नहर के हेड के बजाए हेड से 13 मील दूर सबसीडरी हरदोई ब्रांच की टेल के अपस्ट्रीम में हरदोई ब्रांच में शुरू किया है।
तो उठ सकती हैं उंगलियां
नहर में जीरो किमी से लेकर 21.600 किमी तक यह कार्य 45 दिन में पूरा करना है लेकिन यदि इस बीच रायबरेली तक के किसानों को पानी की जरूरत हुई तो पानी छोड़ना पड़ेगा। ऐसे में जहां सफाई कराई जा रही है वहां सिल्ट जमा होने को अंदेशा तो रहेगा ही, साथ ही नौ करोड़ की लागत से कराए जा रहे कार्य की गुणवत्ता पर भी उंगलियां उठ सकती है।
फाटक खराब होने से बह रहा पानी
डैम से निकलने वाली सबसीडरी ब्रांच में फाटकों की कमी के चलते नहर में 13.4 मील से आगे पानी बह रहा है। ऐसे में सिल्ट सफाई कार्य बाधित हो सकता है। उक्त नहर में बसपा शासनकाल में भी सिल्ट सफाई के नाम पर बड़ा खेल हुआ था।
वर्जन:
हरदोई ब्रांच में टेंडर प्रक्रिया अपनाकर डबल ए श्रेणी के ठेकेदार से कार्य शुरू कराया गया है। अवर अभियंताओं को मौके पर काम देखने को लगाया गया है। सिल्ट निकालने से नहर में पानी की क्षमता बढ़ेगी।
- पीके तिवारी, सहायक अभियंता, हेडवर्क्स खंड
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पीलीभीत के अलावा शाहजहांपुर, हरदोई, लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली तक फसलों की सिंचाई के लिए वर्ष 1926 में बाइफरकेशन से हरदोई ब्रांच नहर निकाली गई थी। कई दशक तक तो नहर किसानों को उनकी मंशा के अनुरूप सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराती रही लेकिन धीरे-धीरे हरदोई ब्रांच नहर में पानी और उसका प्रवाह घटने लगा। अब सरकार ने इस नहर की सिल्ट सफाई कराने का निर्णय लिया है।
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पहले रोस्टर के मुताबिक होती थी सिंचाई
नहरों में डिमांड के मुताबिक रबी एवं खरीफ की फसलों में पानी कब-कब दिया जाए, इसके लिए रोस्टर पर संयुक्त निदेशक कृषि विभाग, अधीक्षण अभियंता षष्टम मंडल सिंचाई, अधीक्षण अभियंता सिंचाई सीतापुर, अधीक्षण अभियंता पंचम मंडल एवं अधिशासी अभियंता हेड वर्क्स खंड के संयुक्त हस्ताक्षर से पानी सप्लाई होता था।
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नौ करोड़ से शुरू हुआ सिल्ट सफाई का कार्य
नहर में घटती जा रही पानी क्षमता को पुनर्जीवित करने को नौ करोड़ की लागत से सिल्ट सफाई की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को सौंपी गई है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद ठेकेदार द्वारा यहां कार्य आधा दर्जन मशीनों की मदद से शुरू कराया गया है। यह कार्य नहर के हेड के बजाए हेड से 13 मील दूर सबसीडरी हरदोई ब्रांच की टेल के अपस्ट्रीम में हरदोई ब्रांच में शुरू किया है।
तो उठ सकती हैं उंगलियां
नहर में जीरो किमी से लेकर 21.600 किमी तक यह कार्य 45 दिन में पूरा करना है लेकिन यदि इस बीच रायबरेली तक के किसानों को पानी की जरूरत हुई तो पानी छोड़ना पड़ेगा। ऐसे में जहां सफाई कराई जा रही है वहां सिल्ट जमा होने को अंदेशा तो रहेगा ही, साथ ही नौ करोड़ की लागत से कराए जा रहे कार्य की गुणवत्ता पर भी उंगलियां उठ सकती है।
फाटक खराब होने से बह रहा पानी
डैम से निकलने वाली सबसीडरी ब्रांच में फाटकों की कमी के चलते नहर में 13.4 मील से आगे पानी बह रहा है। ऐसे में सिल्ट सफाई कार्य बाधित हो सकता है। उक्त नहर में बसपा शासनकाल में भी सिल्ट सफाई के नाम पर बड़ा खेल हुआ था।
वर्जन:
हरदोई ब्रांच में टेंडर प्रक्रिया अपनाकर डबल ए श्रेणी के ठेकेदार से कार्य शुरू कराया गया है। अवर अभियंताओं को मौके पर काम देखने को लगाया गया है। सिल्ट निकालने से नहर में पानी की क्षमता बढ़ेगी।
- पीके तिवारी, सहायक अभियंता, हेडवर्क्स खंड