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बांग्लादेशी शरणार्थी चिंतित..जन्म प्रमाण पत्र बनवाने में जुटे

Tue, 14 Jan 2020 02:34 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jan 2020 02:34 AM IST
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पीलीभीत। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लागू होने और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजनशिप (एनपीआर) को लेकर दूसरे देशों से आए लोग चिंतित हैं। भ्रम की स्थिति के बीच शरणार्थी और घुसपैठिए फिलहाल किसी भी तरह नगर निकायों से जन्म प्रमाण पत्र हासिल करने में जुटे हैं तो निर्वाचन कार्यालय से अपने नाम वाली वोटर लिस्ट की मूल प्रति लेने को पहुंच रहे हैं।
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नगर निकायों में जन्म प्रमाणपत्र बनवाने की होड़
नगर पंचायत और नगर पालिकाओं में युवाओं के साथ ही 1948 तक के जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन हो रहे हैं। यानी देश की आजादी अपनी आंखों से देखने वाले लोग भी जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन कर रहे हैं। इतने पुराने प्रमाण पत्र जारी करने में अफसरों के भी पसीने छूट रहे हैं। जो लोग आवेदन कर रहे हैं, उनके साक्ष्य का मिलान करने में निकाय अधिकारियों को दिक्कत हो रही है। इस कारण इतने पुराने जन्म प्रमाणपत्र जारी करने से पहले निकाय अफसर आवेदनों की पूरी तरह से जांच करने में जुटे हैं।
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निर्वाचन कार्यालय में पहुंचे 200 आवेदक
निर्वाचन कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक सीएए से पहले प्रत्येक वर्ष 150 के आसपास वोटर लिस्ट की छायाप्रति के लिए आवेदन किया जाता रहा है, मगर अब करीब पखवाड़ा भर से 200 से अधिक लोग प्रमाणित छायाप्रति के लिए आवेदन कर चुके हैं। इन डेढ़ सौ में से करीब सौ आवेदन सीएए को लेकर बताए गए हैं। सहायक निर्वाचन अधिकारी पीके जौहरी ने भी वोटर लिस्ट की प्रमाणित छायाप्रति लेने वालों में आंशिक बढ़ोतरी हुई है।
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1965 से शुरू हो गया था शरणार्थियों के आने का सिलसिला
जनपद की तराई में बसी बंगाली कालोनियों में करीब 35 हजार के आसपास आबादी है। ये शरणार्थी परिवार बांग्लादेश और पूर्वी पाकिस्तान से वर्ष 1965 के आसपास यहां आकर बसे थे। उस दौरान इन परिवारों को नौजल्हा नंबर एक, नौजल्हा नंबर दो, गभिया सहराई, रमनगरा, ढकिया ताल्लुके महाराजपुर, पूरनपुर क्षेत्र के राहुल नगर इलाके में बसाया गया था, लेकिन इसके बाद भी बंगाली समुदाय का दूसरे प्रांतों के कैंपों और बांग्लादेश से आने का सिलसिला जारी रहा। इसके अलावा न्यूरिया क्षेत्र में भी करीब 20 हजार आबादी है। इन बंगाली परिवारों में अधिकांश परिवार ऐसे हैं जो बांग्लादेश से आकर यहां बसे हैं। इन शरणार्थी परिवारों को देश की नागरिकता न मिलने और मतदाता सूची में नाम दर्ज न होने से कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।

नागरिकता देने का मामला चल रहा है। इसलिए मैंने आधार कार्ड, पहचान पत्र और राशन कार्ड सुरक्षित रख लिए हैं। -विमल दास, गभिया सहराई
मैंने कुछ प्रमाणपत्रों को लेकर आवेदन किया है। कागजात होंगे तो नागरिकता मिलने में कोई दिक्कत नहीं होगी। -मिर्नल राय, गभिया सहराई
कुछ कागजात नहीं मिल रहे हैं तो उनकी दूसरी कॉपी लेने को आवेदन किया है। ताकि नागरिकता मिल सके। -अजित समद्दार, गभिया सहराई
बरसों से इस पल का इंतजार था। सारे प्रमाण पत्र तैयार हैं। अब हमें हमारी जमीनों का मालिकाना हक भी मिलेगा। -असीम मिर्धा, गभिया सहराई
जन्म प्रमाणपत्र नगर पंचायत और ब्लॉकों में ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से बनाए जा रहे हैं। ऑनलाइन आवेदन के चलते इनकी संख्या की जानकारी नहीं है। यदि कहीं आवेदकों की भीड़ बढ़ती है तो इसको संज्ञान में लिया जाएगा। -हरिओम शर्मा, एसडीएम, कलीनगर
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