पीलीभीत। शहर में शेरों वाली मठिया के समीप श्री ब्रह्मदेव मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन श्री गिरिराज जी महाराज की कथा का वर्णन किया गया। कथा व्यास वृंदावन धाम से पधारे ब्रजवासी रासबिहारी लाल व्यास गोकुल ठाकुर जी महाराज ने कहा कि गोवर्धन की परिक्रमा से पाप नष्ट हो जाते हैं और पुण्य उदय होता है।
उन्होंने श्री गिरिराज की कथा में बताया कि गोवर्धन पर्वत, जिसे गिरिराज जी के नाम से भी जाना जाता है, एक पवित्र पर्वत है। यह भगवान कृष्ण की लीलास्थली है, जिन्होंने ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए इस पर्वत को अपनी कनिष्ठ उंगली पर उठाया था। जब हनुमान ब्रज में थे, जहां आज भी गोवर्धन विराजमान हैं, तभी रामचंद्र का यह संदेश उन्हें मिला। इसलिए हनुमान जी ने गिरिराज-गोवर्धन को वहीं रखा और प्रभु श्री राम के पास लौट गए। उसी समय से गोवर्धन वहां विराजमान हैं। गोवर्धन वहां आकर बहुत प्रसन्न हुए। क्योंकि कृष्ण वहां आकर अपनी सभी लीलाएं प्रकट करेंगे। कहा कि जो लोग गोवर्धन परिक्रमा का व्रत लेते हैं, उनके घर में कभी भी दरिद्रता, कलह और अकाल मृत्यु का प्रवेश नहीं होता। स्वयं लक्ष्मी और नारायण उनके घर की रक्षा करते हैं। उन्होंने कृष्ण की बाल लीलाओं को सुनाया। कथा के उपरांत आरती हुई और प्रसाद वितरण किया गया। कार्यक्रम में भोगराज, शिवलाल, सुशीला, कृतिका, कार्तिक सहित तमाम श्रद्धालु उपस्थित रहे। संवाद
-----------------