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डकैती एक : चार्जशीट दो, माल गायब
Pilibhit
Updated Wed, 22 May 2013 05:30 AM IST
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पीलीभीत। अमरिया में डॉक्टर के घर पड़ी डकैती के खुलासे में पुलिस का खेल खुलता जा रहा है। डॉक्टर की पत्नी ने जिन दो लोगों को डकैती का मुख्य सूत्रधार बताया विवेचक ने उनको नजरअंदाज कर दिया। कुछ अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर और मामूली रकम बरामद दर्शा कर घटना के खुलासे का दावा किया और चार्जशीट तैयार कर ली। डॉक्टर दंपति की आपत्ति पर एसपी ने यह चार्जशीट निरस्त कर दूसरे अफसर को विवेचना सौंपी। दूसरी विवेचना में मुख्य सूत्रधारों के नाम शामिल कर लिए गए, जिन्होंने सोमवार को कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। डॉक्टर दंपति का आरोप है कि पुलिस वाले लूटा गया 22 तोला सोना और चार लाख रुपये में से करीब 3.50 लाख रुपये बरामद कर हजम कर गए। अब यदि आत्मसमर्पण करने वाले आरोपियों से पूछताछ हो तो असलियत सामने आए।
मालूम हो कि नौ अक्तूबर 2012 की सुबह तड़के कसबा अमरिया निवासी डॉ. साबिर हुसैन के घर डकैती पड़ी थी। बदमाशों ने पूरे परिवार को बांधकर चार लाख रुपये की नगदी, एक पिस्टल, 22 तोला सोना लूट लिया था। जाते समय बदमाश उनकी आई-टेन कार पर सवार होकर भाग निकले थे। कार उसी दिन उत्तराखंड से बरामद हो गई थी। अमरिया के तत्कालीन एसओ ताहिर हुसैन ने माधोटांडा निवासी जीशान, इस्माइल और हापुड़ निवासी आशिफ, साजिद को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा करने का दावा किया था। एक अन्य मुल्जिम मोबीन को फरार दर्शाया गया था, जिसे बाद में गिरफ्तार किया गया। उन्होंने महज 50 हजार रुपये की नगदी, पिस्टल और आर्टीफीशियल ज्वैलरी की बरामदगी दर्शायी थी।
पुलिस की कहानी पर डॉक्टर साबिर हुसैन और उनकी पत्नी ने असंतोष जताते हुए तत्कालीन एसपी अमित वर्मा और आईजी मुकुल गोयल से मिलकर पुलिस पर अभियुक्तों को छोड़ने और बरामद माल हड़पने का आरोप लगाया था। इस पर एसपी ने तेज तर्रार माने जाने वाले पीआरओ आजाद सिंह केसरी को विवेचना सौंप दी। हालांकि इस बीच अमरिया पुलिस ने चार्जशीट तैयार कर सौंप दी, जिसे एसपी ने निरस्त कर दिया था। विवेचना बदली तो जीशान अली की चाची राजिदा बेगम और उनके पुत्र इमरान निवासी माधोटांडा को आरोपी बनाया गया। सोमवार को राजिदा बेगम और उनके पुत्र इमरान ने एसीजेएम द्वितीय के कोर्ट में सरेंडर कर दिया। दूसरी चार्जशीट में घटना को अंजाम देने वाले तो फंस गए, लेकिन लूटा गया माल अभी तक बरामद नहीं हुआ है।
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डॉ. साबिर हुसैन का मानना है कि विवेचना अभी आधी अधूरी है। पूर्व विवेचक ने घटना को अंजाम देने वालों को क्यों छोड़ दिया? सही खुलासा होने के बाद भी असली जेवरात के बजाय आर्टीफीशियल ज्वैलरी बरामद दिखाया गया? 22 तोला सोना और साढ़े तीन लाख की नगदी कहां गायब हो गई? अभियुक्तों को रिमांड पर लिया जाए तब हकीकत सामने आ जाएगी।
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तत्कालीन एसओ बोले, नो कमेंट
अमरिया के तत्कालीन एसओ ताहिर हुसैन का पक्ष जानने की कोशिश की गई तो वह नो कमेंट कहकर टाल गए। अपनी विवेचना की बाबत उन्होंने कहा पहले भी जांच पूरी हुई थी। आरोप निराधार हैं।
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वर्जन...........
विवेचना में कई पहलू सामने आए हैं। आत्मसमर्पण करने वालों को रिमांड पर लेने की तैयारी है। आरोपियों के बयान में कोई नई बात मिली तो उसे भी समाहित करते हुए दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
आजाद सिंह केसरी, विवेचक/ प्रभारी क्राइम ब्रांच।
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मालूम हो कि नौ अक्तूबर 2012 की सुबह तड़के कसबा अमरिया निवासी डॉ. साबिर हुसैन के घर डकैती पड़ी थी। बदमाशों ने पूरे परिवार को बांधकर चार लाख रुपये की नगदी, एक पिस्टल, 22 तोला सोना लूट लिया था। जाते समय बदमाश उनकी आई-टेन कार पर सवार होकर भाग निकले थे। कार उसी दिन उत्तराखंड से बरामद हो गई थी। अमरिया के तत्कालीन एसओ ताहिर हुसैन ने माधोटांडा निवासी जीशान, इस्माइल और हापुड़ निवासी आशिफ, साजिद को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा करने का दावा किया था। एक अन्य मुल्जिम मोबीन को फरार दर्शाया गया था, जिसे बाद में गिरफ्तार किया गया। उन्होंने महज 50 हजार रुपये की नगदी, पिस्टल और आर्टीफीशियल ज्वैलरी की बरामदगी दर्शायी थी।
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पुलिस की कहानी पर डॉक्टर साबिर हुसैन और उनकी पत्नी ने असंतोष जताते हुए तत्कालीन एसपी अमित वर्मा और आईजी मुकुल गोयल से मिलकर पुलिस पर अभियुक्तों को छोड़ने और बरामद माल हड़पने का आरोप लगाया था। इस पर एसपी ने तेज तर्रार माने जाने वाले पीआरओ आजाद सिंह केसरी को विवेचना सौंप दी। हालांकि इस बीच अमरिया पुलिस ने चार्जशीट तैयार कर सौंप दी, जिसे एसपी ने निरस्त कर दिया था। विवेचना बदली तो जीशान अली की चाची राजिदा बेगम और उनके पुत्र इमरान निवासी माधोटांडा को आरोपी बनाया गया। सोमवार को राजिदा बेगम और उनके पुत्र इमरान ने एसीजेएम द्वितीय के कोर्ट में सरेंडर कर दिया। दूसरी चार्जशीट में घटना को अंजाम देने वाले तो फंस गए, लेकिन लूटा गया माल अभी तक बरामद नहीं हुआ है।
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डॉ. साबिर हुसैन का मानना है कि विवेचना अभी आधी अधूरी है। पूर्व विवेचक ने घटना को अंजाम देने वालों को क्यों छोड़ दिया? सही खुलासा होने के बाद भी असली जेवरात के बजाय आर्टीफीशियल ज्वैलरी बरामद दिखाया गया? 22 तोला सोना और साढ़े तीन लाख की नगदी कहां गायब हो गई? अभियुक्तों को रिमांड पर लिया जाए तब हकीकत सामने आ जाएगी।
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तत्कालीन एसओ बोले, नो कमेंट
अमरिया के तत्कालीन एसओ ताहिर हुसैन का पक्ष जानने की कोशिश की गई तो वह नो कमेंट कहकर टाल गए। अपनी विवेचना की बाबत उन्होंने कहा पहले भी जांच पूरी हुई थी। आरोप निराधार हैं।
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विवेचना में कई पहलू सामने आए हैं। आत्मसमर्पण करने वालों को रिमांड पर लेने की तैयारी है। आरोपियों के बयान में कोई नई बात मिली तो उसे भी समाहित करते हुए दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
आजाद सिंह केसरी, विवेचक/ प्रभारी क्राइम ब्रांच।